राकेश रोशन बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर, एक्टर, निर्माता, लेखक और संगीतकार हैं। उन्होंने इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक कई हिट फिल्में दी हैं। जहां राकेश रोशन के दमदार अभिनय ने वाहवाही लूटी तो वहीं उनकी लिखी कहानियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने बेहतरीन निर्देशन करके हर किसी को अपना दीवाना बना दिया। 70 के दशक से लेकर 80 तक उन्होंने अपने अभिनय से जलवा बिखेरा। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों का निर्देशन भी किया है। राकेश को ‘कहो ना.. प्यार है’, ‘कोई.. मिल गया’, ‘कृष’ और ‘कृष 3 जैसी सुपरहिट फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। आज वह अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव में आकर भी उनका जलवा कायम है। आज हम उनके जन्मदिन के मौके पर बात करेंगे उनकी जिंदगी से जुड़ी दिलचस्प बातों की। तो चलिए शुरू करते हैं...
Rakesh Roshan: बीमारी नहीं इस वजह से सिर पर बाल नहीं रखते राकेश रोशन, जानिए क्यों उन्होंने किया इतना बड़ा त्याग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राकेश रोशन का जन्म 6 सितंबर 1949 को बॉम्बे में हुआ था। उनकी बतौर एक्टर साल 1970 में आई पहली फिल्म 'घर-घर की कहानी' थी और बतौर डायरेक्टर साल 1987 में पहली फिल्म 'खुदगर्ज' थी जिसमें एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा और जितेंद्र लीड रोल में थे। यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई। राकेश रोशन ने बॉलीवुड में ‘कोई मिल गया’, ‘करन-अर्जुन’, ‘क्रिश’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। इसके अलावा उन्होंने 'सीमा', 'मन मंदिर', 'आंखों आंखों में', 'बुनियाद', 'झूठा कहीं का', 'खूबसूरत', 'खट्टा मीठा' जैसी कई फिल्मों में अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है।
कई सुपरहिट फिल्में देने वाले राकेश रोशन के सिर पर अपने बाल नहीं देखे होंगे। दरअसल वह शुरू से गंजे नहीं हैं बल्कि इसके पीछे एक किस्सा है। राकेश ने 1987 में खुदगर्ज फिल्म से डायरेक्शन में डेब्यू किया। इस फिल्म के रिलीज से पहले उन्होंने तिरुपति के मंदिर में मन्नत मांगी कि यदि फिल्म हिट हुई तो वह अपना सिर मुंडवा लेंगे। खुदगर्ज हिट हो गई लेकिन राकेश अपनी मन्नत भूल गए। बाद में उनकी पत्नी पिंकी ने ये बात याद दिलाई और उन्होंने अपना सिर मुंडवा दिया।
करियर के शुरुआती दौर में राकेश रोशन की ज्यादातर फिल्में फ्लॉप हो रही थीं। साल 1984 में रिलीज हुई उनकी फिल्म 'जाग उठा इंसान' और 1986 में आई 'भगवान दादा' सिनेमाघरों में बुरी तरह से पिट गई। इसके बाद उनके पास एक फैन की चिट्ठी आई। चिट्ठी में लिखा था कि वह अपनी फिल्मों के नाम 'के' अक्षर से रखें, लेकिन उन्होंने इस बात का ध्यान नहीं दिया। 1987 में उनकी फिल्म खुदगर्ज रिलीज हुई। ये मूवी सुपरहिट हुई। तब राकेश रोशन ने 'के' अक्षर को अपना लकी चार्म मान लिया। इसके बाद उन्होंने 'कहो न प्यार है', 'कोई मिल गया' और 'कृष' जैसी हिट फिल्में दीं।
अपने करियर में कई हिट फिल्में देने वाले राकेश रोशन कभी डर के साये में जीते थे। केवल राकेश रोशन ही नहीं बल्कि उन दिनों बॉलीवुड के लगभग हर एक्टर और डायरेक्टर को अंडरवर्ल्ड से खतरा था। शाहरुख खान से लेकर गुलशन कुमार तक सभी को अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर अबू सलेम और छोटा शकील की ओर से धमकी भरे कॉल आते थे और पैसे की मांग की जाती थी। जब से गुलशन कुमार की हत्या हुई उसके बाद से ये खौफ काफी बढ़ गया था।