अभिनेता रितेश देशमुख की मराठी भाषा में बनी रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'वेद' अब हिंदी में डब होकर टेलीविजन पर रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म के जरिए रितेश देशमुख निर्देशक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की है। फिल्म का निर्माण उनकी पत्नी जेनेलिया डिसूजा देशमुख ने किया है। रितेश देशमुख ने इस फिल्म के टीवी प्रीमियर की पूर्व संध्या पर ‘अमर उजाला’ से ये खास बातचीत की।
Riteish Deshmukh Interview: हिंदी में फिर कॉमेडी धमाल मचाने आ रहे रितेश देशमुख, खास मुलाकात में किया खुलासा
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'वेद' को हिंदी में डब करने की कोई खास वजह?
फिल्म हमने मराठी में बनाई थी। हिंदी में डब करके रिलीज करने का कोई विचार नहीं था। लेकिन जब फिल्म मराठी में रिलीज हुई और लोगों ने देखी। बहुत सारे लोगों का फोन आया कि अगर यह हिंदी में भी रिलीज हुई होती तो फिल्म को ज्यादा लोग देख पाते। इस फिल्म को महसूस कर पाते, क्योंकि फिल्म की जो थीम है, वह काफी यूनिवर्सल है। तब हमने तय किया किया कि मराठी में लोग फिल्म देख ही रहे हैं, तो फिल्म को हिंदी में भी दर्शक देखें। पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक मराठी फिल्म हिंदी में डब होकर टीवी चैनल पर आ रही है।
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निर्देशक बनने का ख्याल कैसे आया था?
हम पांच मराठी फिल्मों का निर्माण कर चुके हैं। 'वेद' हमारी छठी फिल्म है। इस फिल्म के लिए कुछ निर्देशकों से संपर्क किया। जेनेलिया को मैने पांच साल पहले कहा था कि मैं फिल्म डायरेक्ट करना चाहूंगा लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं। जेनेलिया का ही सुझाव था कि मैं ही फिल्म डायरेक्ट करूं। जब मैंने फिल्म की शूटिंग शुरू की तब लोगों को पता चला कि मैं फिल्म डायरेक्ट कर रहा हूं, उससे पहले मैंने यह बात किसी को नहीं बताई थी। शूटिंग के समय भी बड़ी खामोशी से फिल्म बनी।
‘ओएमजी 2’ से काफी पहले आपने फिल्म 'बालक पालक' में सेक्स एजूकेशन का मुद्दा उठाया था, क्या इसका हिंदी में रीमेक बनाने वाले हैं?
'बालक पालक' की कहानी बहुत ही अच्छी थी। लेकिन हम लोग रीमेक के बारे में नहीं सोच रहे। यह जरूर सोच रहे थे कि क्या वह कहानी आगे बढ़ सकती है। इस फिल्म की कहानी माता पिता और बच्चों के सेक्स एजुकेशन के बारे में थी। आज के दौर में अगर उस बारे में बात करनी है, तो किस तरह से बात कर सकते हैं। इस फिल्म में बहुत ही खूबसूरत संदेश देने की कोशिश की गई थी। जब यह फिल्म रिलीज हुई थी तो बहुत सारे स्कूल में इस फिल्म के शो हुए थे।
फिल्म 'लय भारी' को भी ट्रेंड सेटर फिल्म माना जाता है...
जेनेलिया से मैने एक बात सीखी कि काम महत्वपूर्ण होता है ना कि भाषा। अगर मराठी में 'लय भारी' जैसे जॉनर की फिल्म बन रही है तो हिंदी में 'एक विलेन' जैसे जॉनर की फिल्में बन रही है तो क्यों न किया जाए। अगर 'धमाल' और 'हाउसफुल' जैसी कॉमेडी बन रही तो क्यों किया जाए। जब मैं अपने करियर को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि हर तरह की फिल्में करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है।