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Rocketry The Nambi Effect: झूठ की नींव पर बनी है माधवन की 'रॉकेट्री'? इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों ने किया दावा

Thu, 25 Aug 2022 02:57 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Thu, 25 Aug 2022 02:57 PM IST
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Rocketry The Nambi Effect: R. Madhavan movie is a bluff by Nambi Narayanan saying former ISRO scientists
रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

आर. माधवन की बीते महीने रिलीज हुई फिल्म 'रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट' खूब पसंद की गई। यह फिल्म वैज्ञानिक नंबी नारायणन के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म में नंबी नारायणन का किरदार आर. माधवन ने अदा किया। फिल्म के निर्देशक का जिम्मा भी माधवन ने ही संभाला। इस फिल्म ने देशभर में खूब तारीफें बटोरीं। फिल्म में दिखाया गया कि किस तरह नंबी नारायणन को एक झूठे केस में फंसाकर देश के वैज्ञानिक विकास को अवरुद्ध किया गया। बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया। मगर, अब अचानक से इस फिल्म को लेकर विरोध के सुर उठ रहे हैं।

Rocketry The Nambi Effect: R. Madhavan movie is a bluff by Nambi Narayanan saying former ISRO scientists
ROCKETRY

दरअसल, फिल्म में किए गए दावों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह सवाल इसरो के ही कुछ पूर्व वैज्ञानिकों की तरफ से उठाए गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में बुधवार को इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों के ग्रुप ने कहा फिल्म में दिखाए गए कई दृश्यों में बिल्कुल सच्चाई नहीं है। उनका कहना है, 'फिल्म में दिखाया गया है कि नंबी नारायणन की गिरफ्तारी के कारण देश को क्रायोजेनिक इंजन बनाने में देरी का सामना करना पड़ा और इससे देश को वित्तीय नुकसान हुआ। लेकिन, यह दावा पूरी तरह से गलत है।' वैज्ञानिकों का कहना है कि नंबी नारायणन ने दावा किया है कि रॉकेट्री में सबकुछ सच दिखाया गया है, लेकिन फिल्म में दिखाए गए बहुत से सीन का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।

Rocketry The Nambi Effect: R. Madhavan movie is a bluff by Nambi Narayanan saying former ISRO scientists
रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों ने यह दावा भी किया कि नंबी नारायण पद्म भूषण उनके इसरो में किए गए कार्यों के आधार पर मिला है। प्रेस कांफ्रेंस कर वैज्ञानिकों के ग्रुप ने बताया कि इसरो ने 80 के दशक के मध्य में क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके प्रभारी ईवीएस नंबुथिरी थे। नंबूथिरी के नेतृत्व में एक ग्रुप ने इसके 12 खंड विकसित किए थे। उस समय नंबी नारायणन का क्रायोजेनिक्स से कोई लेना-देना नहीं था। बाद में वासुदेवन गांधी के नेतृत्व में क्रायोजेनिक इंजन का विकास शुरू हुआ, लेकिन नंबी नारायण उस टीम का हिस्सा नहीं थे।

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Rocketry The Nambi Effect: R. Madhavan movie is a bluff by Nambi Narayanan saying former ISRO scientists
रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

वैज्ञानिकों ने सिलसिलेवार कई सीन के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि नंबी नारायणन ने यह भी दावा किया है कि विक्रम साराभाई ने उन्हें अमेरिका के प्रेस्टन यूनिवर्सिटी में पीजी के लिए भेजा था, लेकिन यह सच नहीं है। जिस वैज्ञानिक को भेजा गया था, वो एलपीएस के निदेशक मुथुनायकम थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक नंबी नारायणन ने 1968 में इसरो जॉइन किया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के अधीन केवल कुछ महीनों के लिए काम किया था। लेकिन, आरोप के मुताबिक नंबी नारायणन ने फिल्म में दावा किया है कि उन्होंने एक बार अब्दुल कलाम को भी गलत फैसला लेने से रोका था। एलपीएससी के पूर्व निदेशक मुथुनायकम ने कहा, 'जब 1990 में एलपीएससी में क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम परियोजना शुरू हुई थी, तब मैंने नंबी नारायणन को परियोजना निदेशक नियुक्त किया था'।

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रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

उन्होंने कहा कि क्रायोजेनिक इंजन प्रौद्योगिकी को स्थानांतरित करने के लिए 1993 में रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। वासुदेवन गांधी को रूस के साथ समझौते की शर्तों पर बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके ही नेतृत्व में एक दल रूस गया था। हालांकि बाद में अमेरिका के दबाव के चलते रूस समझौते से पीछे हट गया था। दिसंबर 1993 में रूस के साथ फिर से बातचीत के बाद समझौते का नवीनीकरण किया गया। उन्होंने कहा कि नंबी नारायणन ने नवंबर 1994 में सेवानिवृत्ति का आवेदन दिया था। उसी महीने गिरफ्तारी के बाद उन्हें क्रायोजेनिक टीम से बाहर कर दिया गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक 1994 में एलपीएससी छोड़ने के बाद नंबी नारायणन का क्रायोजेनिक विकास से कोई लेना-देना नहीं था। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह दावा भी गलत है कि विकास इंजन को नंबी नारायणन ने विकसित किया था। इसे फ्रांस के वाइकिंग इंजन ने विकसित किया गया था। इस प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. डीआर एई मुथुनायकम,  डी. शशिकुमार, , ईवीएस नंबूथिरी,  श्रीधरदास, डॉ आदिमूर्ति आदि वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

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