देवराज इंद्र का रोल निभाकर मशहूर हुए अभिनेता सतीश कौल का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत हुआ। पंजाबी फिल्मों के अमिताभ कहे जाने वाले सतीश कौल को लुधियाना के मॉडल टाउन क्रीमेटोरियम में मुखाग्नि दी गई। दरअसल सतीश कोरोना पॉजिटिव थे ऐसे में उनके अंतिम संस्कार के दौरान सिर्फ गिने चुने लोग ही मौजूद थे। बता दें कि सतीश कौल का 10 अप्रैल को 74 साल की उम्र में निधन हो गया था।
अलविदाः कोविड प्रोटोकॉल से हुआ सतीश कौल का अंतिम संस्कार, अधूरी रह गई ये आखिरी इच्छा
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दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम कर चुके सतीश कौल को आखिरी दिन अकेले में गुजारने पड़े। उनके अंतिम दिनों में ना तो उन्हें सरकार से कोई मदद मिली ना ही इंडस्ट्री से जहां उन्होंने करीब 300 से ज्यादा फिल्मों और टीवी शो में काम किया था। इतना ही नहीं उनका इलाज भी लुधियाना के एक चैरिटेबल अस्पताल में चल रहा था।
1974 से 1998 तक सतीश ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। पिछले साल उन्होंने सोशल मीडिया पर आर्थिक मदद भी मांगी थी। कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन ने उनकी हालत और भी खराब कर दी थी। सतीश के पास जो जमा-पूंजी थी वो एक बिजनेस में डूब गए।
पिछले साल सतीश कौल ने लोगों से गुहार लगाते हुए कहा था, 'मुझे एक अभिनेता के तौर पर इतना प्यार मिला है। अब एक इंसान के तौर पर मुझे मदद की जरूरत है।' बता दें सतीश कौल को गिरने की वजह से कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया था। इससे वह उभर नहीं पाए। उन्होंने बताया था कि वो एक अच्छी जगह घर खरीदना चाहते थे। उन्होंने कहा था अभिनय की आग अभी भी मेरे अंदर है। ये बुझी नही है। काश कोई मुझे रोल दे देता। मैं कोई भी रोल कर लूंगा। उनके घर खरीदने की इच्छा भी अधूरी रह गई।
सतीश कौल ने टीवी पर महाभारत के अलावा 'विक्रम बेताल' में भी काम किया था। इतना ही नहीं वो बॉलीवुड की हिट फिल्मों जैसे 'प्यार तो होना ही था' और 'आंटी नंबर 1' का भी हिस्सा रहे थे। उन्होंने मुंबई से पंजाब जाने के बाद 2011 के आसपास एक एक्टिंग स्कूल खोला था लेकिन इसमें उन्हें कुछ खास सफलता हासिल नहीं मिली थी।

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