सौ साल के होते गीतकार शैलेंद्र अगर आज वह हमारे बीच होते। राज कपूर ने उनकी दो लाइनें ही सुनकर उन्हें अपनी फिल्मों में गीत लिखने का न्यौता दिया। बागी शैलेंद्र ने तब तो वह प्रस्ताव ठुकरा दिया लेकिन, बाद में हालात ऐसे बने कि आर्थिक मदद के लिए वह राज कपूर के पास गए। उनके लिए गाने लिखे और क्या खूब गाने लिखे। अविभाजित पंजाब के रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में) में 30 अगस्त 1923 को जन्मे शैलेंद्र ने अपनी किशोरावस्था का लंबा समय मथुरा में गुजारा। उत्तर प्रदेश की बोलियों और मुहावरों को अपने गानों में समेटा और व्यवस्था पर खूब तंज कसे।
{"_id":"64f024c8802b8d19db09bd91","slug":"screen-writers-association-mumbai-remember-lyricist-poet-shailendra-centennial-birth-anniversary-tu-zinda-hai-2023-08-31","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"100 Years Of Shailendra: गीतकार शैलेंद्र होते तो आज भी लिखते, और, हो सकता है जेल भी जाते","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
100 Years Of Shailendra: गीतकार शैलेंद्र होते तो आज भी लिखते, और, हो सकता है जेल भी जाते
विज्ञापन
तू जिंदा है
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तू जिंदा है में वरुण ग्रोवर, जावेद अख्तर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
वरुण ग्रोवर ने बताई बेचैनी की वजह
हिंदी फिल्म जगत में सक्रिय लेखकों और गीतकारों की संस्था स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन ने बीती शाम यहां मुबंई में अपने पुरखे शैलेंद्र को ‘तू जिंदा है’ नामक जन्मशती समारोह आयोजित कर याद किया। कार्यक्रम में हिंदी सिनेमा के गीतकार मसलन जावेद अख्तर, स्वानंद किरकिरे, वायु आदि मौजूद रहे। अभिनेता सचिन पिलगांवकर के सुझाव पर हुए इस कार्यक्रम में वह खुद भी आए और शैलेंद्र को काफी भावुक अंदाज में याद किया। वरुण ग्रोवर के वक्तव्य से कार्यक्रम का आरंभ हुआ और उन्होंने मौजूदा दौर के दलित लेखन और दलित साहित्य की तरफ इशारा करते हुए शैलेंद्र के इसी बिरादरी से होने की बात कही और बोले, ‘अपने गीतों के जरिये व्यवस्था पर तंज कसने की शैलेंद्र की जो फितरत थी, उसे देखते हुए कहा उनकी बेचैनी आज के समय पर भी जरूर कुछ उनसे ऐसा लिखवाती। हो सकता है कि ऐसा लिखने पर वह जेल भी जाते। हम भी जेल जाने को तैयार रहते ही हैं।’
हिंदी फिल्म जगत में सक्रिय लेखकों और गीतकारों की संस्था स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन ने बीती शाम यहां मुबंई में अपने पुरखे शैलेंद्र को ‘तू जिंदा है’ नामक जन्मशती समारोह आयोजित कर याद किया। कार्यक्रम में हिंदी सिनेमा के गीतकार मसलन जावेद अख्तर, स्वानंद किरकिरे, वायु आदि मौजूद रहे। अभिनेता सचिन पिलगांवकर के सुझाव पर हुए इस कार्यक्रम में वह खुद भी आए और शैलेंद्र को काफी भावुक अंदाज में याद किया। वरुण ग्रोवर के वक्तव्य से कार्यक्रम का आरंभ हुआ और उन्होंने मौजूदा दौर के दलित लेखन और दलित साहित्य की तरफ इशारा करते हुए शैलेंद्र के इसी बिरादरी से होने की बात कही और बोले, ‘अपने गीतों के जरिये व्यवस्था पर तंज कसने की शैलेंद्र की जो फितरत थी, उसे देखते हुए कहा उनकी बेचैनी आज के समय पर भी जरूर कुछ उनसे ऐसा लिखवाती। हो सकता है कि ऐसा लिखने पर वह जेल भी जाते। हम भी जेल जाने को तैयार रहते ही हैं।’
तू जिंदा है में स्वानंद किरकिरे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
अंगुली पकड़कर चले नए गीतकार
गीतकार स्वानंद किरकिरे कार्यक्रम में किसी चर्चा का अनुमान लगाकर आए थे और जब उन्हें मंच पर गीतकार शैलेंद्र को लेकर अपना वक्तव्य प्रस्तुत करने को कहा गया तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसी कोई तैयारी करके वह आए नहीं हैं। फिर भी उन्होंने शैलेंद्र के उन तमाम गीतों का जिक्र किया जिनके सहारे हिंदी सिनेमा के गीतकार अब तक अंगुली थामकर चलते आए हैं। अपने करियर के शुरुआती दौर में बासु भट्टाचार्य के किए शैलेंद्र के साक्षात्कारों का भाषाई अनुवाद करने के अनुभव भी इस दौरान स्वानंद ने शैलेंद्र को चाहने वालों की इस महफिल में साझा किए।
गीतकार स्वानंद किरकिरे कार्यक्रम में किसी चर्चा का अनुमान लगाकर आए थे और जब उन्हें मंच पर गीतकार शैलेंद्र को लेकर अपना वक्तव्य प्रस्तुत करने को कहा गया तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसी कोई तैयारी करके वह आए नहीं हैं। फिर भी उन्होंने शैलेंद्र के उन तमाम गीतों का जिक्र किया जिनके सहारे हिंदी सिनेमा के गीतकार अब तक अंगुली थामकर चलते आए हैं। अपने करियर के शुरुआती दौर में बासु भट्टाचार्य के किए शैलेंद्र के साक्षात्कारों का भाषाई अनुवाद करने के अनुभव भी इस दौरान स्वानंद ने शैलेंद्र को चाहने वालों की इस महफिल में साझा किए।
विज्ञापन
विज्ञापन
तू जिंदा है में सचिन पिलगांवकर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
संत तुकाराम से प्रेरणा
शैलेंद्र के मशहूर गीत ‘हम तो जाते अपने गांव, सबको राम, राम राम’ का उद्धरण देते हुए अभिनेता, लेखक और निर्देशक सचिन पिलगांवकर ने कहा कि ये गाना शैलेंद्र ने यूं लगता है जैसे कि महाराष्ट्र के लोकप्रिय महापुरुष संत तुकाराम की पंक्तियों से प्रेरित होकर लिखा है। उन्होंने ये भी कहा कि हिंदी सिनेमा में सिर्फ दो गीत ऐसे हैं जो मुखड़े से न शुरू होकर अंतरे से शुरू होते हैं। ये दोनों गाने हैं, ‘हम भी हैं तुम भी हो दोनों हैं आमने सामने’ और ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’। सचिन ने कहा कि शैलेंद्र के गीतों की मौजूदा समय में भी उतनी ही उपादेयता है जितनी कि कभी बीते समय में रही होगी।
शैलेंद्र के मशहूर गीत ‘हम तो जाते अपने गांव, सबको राम, राम राम’ का उद्धरण देते हुए अभिनेता, लेखक और निर्देशक सचिन पिलगांवकर ने कहा कि ये गाना शैलेंद्र ने यूं लगता है जैसे कि महाराष्ट्र के लोकप्रिय महापुरुष संत तुकाराम की पंक्तियों से प्रेरित होकर लिखा है। उन्होंने ये भी कहा कि हिंदी सिनेमा में सिर्फ दो गीत ऐसे हैं जो मुखड़े से न शुरू होकर अंतरे से शुरू होते हैं। ये दोनों गाने हैं, ‘हम भी हैं तुम भी हो दोनों हैं आमने सामने’ और ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’। सचिन ने कहा कि शैलेंद्र के गीतों की मौजूदा समय में भी उतनी ही उपादेयता है जितनी कि कभी बीते समय में रही होगी।
विज्ञापन
तू जिंदा है में वायु
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
अपनी जिद पर कायम रहिए
उभरते गीतकार वायु ने बचपन में रेडियो पर सुने शैलेंद्र के गीतों से अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि आज की तारीख में अगर शैलेंद्र हिंदी सिनेमा के गीतकार होते तो शायद कोई निर्माता या निर्देशक उनके किसी गीत को अपनी फिल्म में शामिल करने की मंजूरी दे पाता। अब तो समय ऐसा है कि मन के कहीं किसी कोने में भी अगर क्रांति हो तो उसे मार दीजिए। लेकिन, शैलेंद्र की सीख यही है कि आप कलाकार हैं, हुनरमंद हैं जो अपनी जिद कायम रखिए। उन्होंने अपने गीतों में सिर्फ सच्चाई लिखी और इसी सच्चाई की वजह से वह अब भी याद किए जाते हैं। ‘तू जिंदा है’ कार्यक्रम में इसके बाद लेखक और गीतकार जावेद अख्तर के साथ एक लंबी परिचर्चा भी आयोजित हुई जिसमें जावेद अख्तर ने शैलेंद्र के हुनर को सलाम किया और उनके लेखन पर खूब बातें कीं। इस साल का शैलेंद्र सम्मान भी जावेद अख्तर को ही मिलने वाला है।
यह भी पढ़ें- Ayushmann Khurrana: 'जवान' और 'गदर 2' के बीच 'ड्रीम गर्ल 2' ने बना ली जगह, फिल्म की सफलता पर बोले आयुष्मान
उभरते गीतकार वायु ने बचपन में रेडियो पर सुने शैलेंद्र के गीतों से अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि आज की तारीख में अगर शैलेंद्र हिंदी सिनेमा के गीतकार होते तो शायद कोई निर्माता या निर्देशक उनके किसी गीत को अपनी फिल्म में शामिल करने की मंजूरी दे पाता। अब तो समय ऐसा है कि मन के कहीं किसी कोने में भी अगर क्रांति हो तो उसे मार दीजिए। लेकिन, शैलेंद्र की सीख यही है कि आप कलाकार हैं, हुनरमंद हैं जो अपनी जिद कायम रखिए। उन्होंने अपने गीतों में सिर्फ सच्चाई लिखी और इसी सच्चाई की वजह से वह अब भी याद किए जाते हैं। ‘तू जिंदा है’ कार्यक्रम में इसके बाद लेखक और गीतकार जावेद अख्तर के साथ एक लंबी परिचर्चा भी आयोजित हुई जिसमें जावेद अख्तर ने शैलेंद्र के हुनर को सलाम किया और उनके लेखन पर खूब बातें कीं। इस साल का शैलेंद्र सम्मान भी जावेद अख्तर को ही मिलने वाला है।
यह भी पढ़ें- Ayushmann Khurrana: 'जवान' और 'गदर 2' के बीच 'ड्रीम गर्ल 2' ने बना ली जगह, फिल्म की सफलता पर बोले आयुष्मान