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ZERO में बौने कैसे बन गए शाहरुख खान, कैसे आसानी से निभाया ये मुश्किल किरदार?

Wed, 03 Jan 2018 07:54 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 03 Jan 2018 07:54 AM IST
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shahrukh khan film new looks like a dwarf in his upcoming film zero

शाहरुख खान ने अपनी आने वाली फिल्म 'जीरो' में एक बौने शख्स का किरदार निभा रहे हैं। इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च पर शाहरुख ने बताया कि उनके किरदार को रचने के लिए बहुत एडवांस्ड विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया है और इसे बनाने में दो साल का वक्त लगा है। निर्देशक आनंद एल राय की इस फिल्म में कई तरह के विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया है, जिसका काम शाहरुख की कंपनी रेड चिलीज वीएफएक्स के पास है। पहले भी फिल्मों में विजुअल इफेक्ट्स के जरिए छोटे को बडा और बडे को छोटा दिखाया जाता रहा है। 'जानेमन'​ फिल्म में अनुपम खेर और 'अप्पू राजा' फिल्म में कमल हसन भी बौने शख्स का किरदार निभा चुके हैं। इसके अलावा कई ​हॉलिवुड ​फिल्मों में भी बोने दिखाने वाले इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया है। इनमें एक से ज्यादा लोगों को बौना दिखाया गया है। ​फिल्मों में बौना दिखाने के लिए कुछ खास तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। 'जीरो' फिल्म में भी शाहरुख को बौना दिखाने के लिए ऐसी ही तकनीकों का इस्तेमाल किया गया होगा।

shahrukh khan film new looks like a dwarf in his upcoming film zero

इन तकनीकों के बारे में हम यहां बता रहे हैं। 
फोर्स्ड परस्पेक्टिव- 'फोर्स्ड परस्पेक्टिव', यह ऐसी तकनीक है जिसमें 'ऑप्टिकल इल्यूजन' की मदद से किसी ऑबजेक्ट को छोटा, बडा, दूर या ​पास दिखाया जा सकता है। इस तकनीक का इस्तेमाल हम आमतौर पर भी देखते हैं जैसे किसी की हथेली में बहुत ऊंची इमारत को दिखाना। इसमें इमारत छोटी दिखने लगती है और हथेली अपने ही आकार में दिखती है। शाहरुख भी फिल्म में इस तकनीक का इस्तेमाल करके उनके आसपास के लोगों और वस्तुओं के मुकाबले छोटा दिखाये जा सकते हैं।

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विदेश से बुलाए लोग
यह भी कहा जा रहा है कि इस फिल्म को बनाने के लिए विदेश से एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। हॉलिवुड​ फिल्मों में इस तरह की तकनीकों का इस्तेमाल होता रहा है। हॉलिवुड की 'द हॉबिट' और 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' जैसी फिल्मों में भी इसका इस्तेमाल किया गया है और कई लोगों को असल कद से छोटा दिखाया गया है। 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' में छोटे और बडे कद के किरदारों को शूट करने के लिए एक खास तरीका अपनाया गया था। इसमें छोटे और बडे कद वाले व्यक्तियों के सीन को अलग-अलग शूट किया गया और फिर एक साथ मिला दिया गया।

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'क्रोमा की' तकनीक
इसके अलावा ऐसी फिल्मों में 'क्रोमा की' तकनीक का इस्तेमाल भी होता है, जिसमें ग्रीन स्क्रीन में सीन को शूट करके उसका बैकग्राउंड बदला जा सकता है। शाहरुख खान ने 'जीरो' फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने से पहले शूटिंग की एक तस्वीर भी ट्वीट की थी जिससे पता चलता है कि फिल्म की शूटिंग ग्रीन स्क्रीन पर की जा रही है।

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फिल्म बनाने में लगे दो साल
इस फिल्म का ट्रेलर सोमवार को रिलीज किया गया है। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान शाहरुख खान ने कहा, ''ये एक काफी मुश्किल फिल्म थी। इसे बनाने में दो साल का वक्त लग गया।'' उन्होंने कहा, ''दो चीजों पर मुझे बहुत गर्व है। एक तो यह कि ये दुनिया में बनाई गई सबसे ज्यादा एडवांस्ड विजुअल इफेक्ट वाली फिल्म है। इसलिए इसमें ज्यादा समय लगा। हर बार ऐसी फिल्म नहीं बनती।
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