श्रद्धा स्कूल में नाटकों में जरूर हिस्सा लेती थी, लेकिन उसने कभी एक्टिंग को करियर बनाने का नहीं सोचा था। वह तो एस्ट्रोनॉट बनना चाहती थी। अपनी आगे की पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए वह बॉस्टन गई थीं। एक बार श्रद्धा छुट्टियों में घर आई थी, तभी उसकी मुलाकात फिल्म 'तीन पत्ती' की निर्माता अम्बिका हिंदुजा से हुई और जिंदगी का सफर बदल गया।
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श्रद्धा कपूर के फैन हैं तो ये खबर जरूर पढ़ें, शक्ति कपूर ने खोले बेटी की निजी जिंदगी के राज
मनोरंजन डेस्क,अमर उजाला
Updated Sun, 16 Sep 2018 05:52 PM IST
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शक्ति कपूर और श्रद्धा कपूर
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shraddha kapoor
श्रद्धा एकदम आम बच्चों की तरह पली-बढ़ी है। उसको मैंने कभी उस तरह की जिंदगी जीते या बड़ी-बड़ी डिमांड्स करते नहीं देखा। इसकी एक वजह यह भी है कि मैंने उसे या अपने बेटे सिद्धांत को इस बात का फायदा उठाने नहीं दिया कि वह एक सेलेब्रिटी के बच्चे हैं। जहां तक बात श्रद्धा की है, वह शुरू से ही बहुत शांत रही है। अगर उसे गुस्सा आएगा या वह किसी से नाराज होगी तो अपने आपको कमरे में बंद कर देती है। किसी से बात नहीं करेगी। लेकिन कुछ समय बाद ठीक हो जाती है।
shraddha and sidhant
वहीं सिद्धांत शुरू से ही बहुत शरारती रहा है। मेरे दोनों ही बच्चों ने एक्टिंग में आने का कभी सोचा नहीं था। श्रद्धा स्कूल में नाटकों में जरूर हिस्सा लेती थी, लेकिन उसने कभी एक्टिंग को करियर बनाने का नहीं सोचा था। वह तो एस्ट्रोनॉट बनना चाहती थी। अपनी आगे की पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए वह बॉस्टन गई थी। वह बचपन में पिआनो बजाती थी, लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह गाती भी है। मैं इन सब चीजों को शौकिया ही समझता रहा।
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shakti kapoor with shraddha
एक बार श्रद्धा छुट्टियों में घर आई थी, तब उसकी मुलाकात फिल्म 'तीन पत्ती' की निर्माता अम्बिका हिंदुजा से हुई, तभी उसको फिल्म में कास्ट किया गया। फिल्म ने भले ही कुछ खास न किया हो, लेकिन उसी से उसकी शुरुआत हुई और वह आज इतनी ऊंचाइयों को छू रही है, तो अच्छा लगता है। जब उसकी फिल्म 'एक विलेन' आई थी, तभी मैंने उसका गाना सुना था। मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मेरी बेटी इतना अच्छा गाती है। फिर जब उसकी फिल्म 'एबीसीडी-2' आई, तब उसका डांस देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए थे। कुछ समय पहले हम दोनों बैठकर बातें कर रहे थे, तब उसने मुझे कहा, “पापा, मुझे शुरू से ही पता था कि मैं एक एक्ट्रेस ही बनूंगी।”
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shraddha kapoor
- फोटो : instagram
मुझे खुशी होती है जब देखता हूं कि मेरी बेटी सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही है। मैंने तो अभिनेता बनने के लिए एक इंस्टीट्यूट में पढ़ाई की थी। वहां अभिनय की बारीकियों को सीखा, लेकिन फिर भी आज तक कैमरे के आगे आते ही थोड़ा नर्वस हो जाता हूं। लेकिन श्रद्धा तो कमाल करती है। इतना आत्मविश्वास है उस बच्ची में, यह देखकर मुझे बड़ी तसल्ली मिलती है। मुझे लगता है, वह बेहतरीन अभिनेत्री है और मेरी बेटी ने यह साबित भी किया है। उसकी सफलताओं पर मैं खुश होता हूं, तो असफलताओं पर अन्य मां-बाप की तरह दुखी भी होता हूं। मैं उसे कहता हूं, “बेटा, तुम लकी हो कि तुम्हारे पास एक अमीर बाप है। मेरे साथ ऐसा नहीं था। तो मैं उसे यही सीख देता हूं कि बेटा कभी इसका गुरूर मत रखना।”