बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक गायक हुए, जो आज भी लोगों के दिलों पर राज करते हैं और लोग बड़े ही चाव से इनके गीत सुनते हैं। ‘मेरे पिया गये रंगून’ और ‘कजरा मोहब्बत वाला’ गाना भी ऐसी ही एक महान गायिका ने गाया था और हमेशा के लिए इस गाने को अमर कर दिया। इन गीतों को अपनी आवाज देने वालीं गायिका शमशाद बेगम की आज जयंती है। उनके सुरीले सुर आज भी लोगों के कानों में गूंजते हैं। शमशाद बेगम भारतीय हिंदी सिनेमा का वो नाम हैं, जिसको संगीत के प्रेमी कभी नहीं भूल सकते हैं। शमशाद ने अपने करियर में ऐसे गीतों को गाया था, जो फैंस के जहन में अब तक तर-ओ-ताजा हैं।
अपने दौर की सबसे महंगी गायिका थीं शमशाद बेगम, 15 साल की उम्र में हिंदू से शादी कर सहा था कड़ा विरोध
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शमशाद बेगम का जन्म 14 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ था। उन्होंने अपने गायन की शुरुआत रेडियो से की थी। साल 1937 में शमशाद बेगम ने लाहौर रेडियो पर अपना पहला गीत पेश किया था। फिर साल 1944 में उन्होंने अपना पहला कदम मुंबई में रखा था। इसके बाद पूरी दुनिया ने शमशाद बेगम की आवाज के जादू को महसूस किया। उन्होंने कजरा मोहब्बत वाला, लेके पहला पहला प्यार, मेरे पिया गए रंगून, जैसे अनगिनत सुपरहिट गाने फैंस को दिए।
उन्होंने अपने करियर में कई भाषाओं में छह हजार से ज्यादा गाने गाए थे। शमशाद बेगम अपने जमाने की सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वालीं और मोटी फीस लेने वालीं प्लेबैक सिंगर थीं। बेगम साहिबा दिखने में भी उतनी ही खूबसूरत थीं। उनकी खूबसूरती के आगे बड़ी-बड़ी अभिनेत्रियां फेल थीं। जब वह गानों से सभी के बीच धूम मचा रही थीं, तभी उनको फिल्मों में अभिनय के भी ऑफर आए, लेकिन परिवार की रुढ़िवादी सोच होने की वजह से उन्होंने ये ऑफर ठुकरा दिया था।
शमशाद बेगम की शादी काफी विवादित रही थी। वो जब तरक्की के झंडे गाड़ रही थीं तो उनके परिवार वाले उनके लिए लड़का ढूंढ़ रहे थे, लेकिन शमशाद अपने हमसफर की तलाश पूरी कर चुकी थीं। वो जिससे प्यार करती थीं उसी से शादी करना चाहती थीं। ये बात साल 1934 की है। उस समय देश में हिंदू-मुस्लिम दंगे हो रहे थे। इसी साल शमशाद की मुलाकात गणपत लाल बट्टो से हुई। दोनों एक-दूसरे को काफी पसंद करते थे। दोनों के घर वाले इस शादी के खिलाफ थे, लेकिन उन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर शादी कर ली। जिस वक्त शमशाद बेगम की शादी हुई थी तब वे सिर्फ 15 साल की थीं।
उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक गाने गाए। इसमें ‘ओ गाड़ीवाले गाड़ी धीरे हांक रे’ (मदर इंडिया), 'कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना' (सीआईडी), 'कभी आर कभी पार लागा तीरे-नजर' (आर-पार), 'मेरे पिया गये रंगून' (पतंगा), 'छोड़ बाबुल का घर' (बाबुल), 'कजरा मोहब्बत वाला' (किस्मत), 'दूर कोई गाए' (बैजू बावरा), 'न बोल पी पी मोरे अंगना' (दुलारी) और 'एक दो तीन आजा मौसम है रंगीन' (आवारा) जैसे गानें शामिल हैं।
फिल्मों से दूर होने के बाद शमशाद गुमनाम हो गईं। अपने करियर में उन्होंने कई अवॉर्ड अपने नाम किए। 2009 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया था। साल 2013 में 23 अप्रैल को शमशाद बेगम का निधन हो गया।