भारत के थिएटर्स में रिलीज होने वाली हर फिल्म को पहले सेंसर बोर्ड के सामने से गुजरना होता है। सेंसर बोर्ड इस फिल्म को देखता है और अगर कुछ इसमें विवादित लगता है तो उसे मेकर्स से हटाने के लिए कहा जाता है। फिल्म को इसके बाद कैटेगरी सर्टिफिकेट दिया जाता है। फिर कहीं जाकर फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो पाती है। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसी फिल्मों के बारे में बताएंगे जिनपर इतना हंगामा हुआ कि उन्हें भारत में बैन कर दिया गया।
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भारत में बैन कर दी गईं ये फिल्में: किसी में थे जबरदस्त बोल्ड सीन तो कोई आतंकवादी कंटेंट की वजह से नहीं हुई रिलीज
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: स्वाति सिंह
Updated Wed, 23 Jun 2021 02:00 PM IST
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भारत में बैन फिल्में
- फोटो : सोशल मीडिया
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अनफ्रीडम
- फोटो : फाइल
अनफ्रीडम
इस लिस्ट में सबसे पहले नाम आता है फिल्म 'अनफ्रीडम' (Unfreedom) का। इस फिल्म का निर्माण साल 2014 में किया था। इसे इसलिए बैन कर दिया गया क्योंकि यह समलैंगिक रिश्तों पर आधारित थी। फिल्म में ज्यादा अश्लीलता होने के वजह से सेंसर बोर्ड ने इसे रिलीज करने की मंजूरी नहीं दी थी। फिल्म अनफ्रीडम का निर्देशन अमित कुमार ने किया था।
इस लिस्ट में सबसे पहले नाम आता है फिल्म 'अनफ्रीडम' (Unfreedom) का। इस फिल्म का निर्माण साल 2014 में किया था। इसे इसलिए बैन कर दिया गया क्योंकि यह समलैंगिक रिश्तों पर आधारित थी। फिल्म में ज्यादा अश्लीलता होने के वजह से सेंसर बोर्ड ने इसे रिलीज करने की मंजूरी नहीं दी थी। फिल्म अनफ्रीडम का निर्देशन अमित कुमार ने किया था।
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फायर
- फोटो : सोशल मीडिया
फायर
दीपा मेहता के निर्देशन में बनी फिल्म 'फायर' दो महिलाओं के समलैंगिक रिश्तों पर आधारित थी। यह मध्यवर्गीय परिवार में उन दो महिलाओं की कहानी थी जो रिश्ते में देवरानी और जेठानी होती हैं और एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो जाती हैं। कई संगठनों से इस फिल्म का विरोध किया था, जिसके चलते इस पर बैन लगा दिया गया।
दीपा मेहता के निर्देशन में बनी फिल्म 'फायर' दो महिलाओं के समलैंगिक रिश्तों पर आधारित थी। यह मध्यवर्गीय परिवार में उन दो महिलाओं की कहानी थी जो रिश्ते में देवरानी और जेठानी होती हैं और एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो जाती हैं। कई संगठनों से इस फिल्म का विरोध किया था, जिसके चलते इस पर बैन लगा दिया गया।
सिंस
सिंस
साल 2005 में आई फिल्म सिंस यशराज बैनर तले बनी थी। फिल्म की कहानी एक जवान लड़की और पादरी के प्रेम प्रसंग पर आधारित थी। इस फिल्म को लेकर ईसाई धर्म के लोगों ने आपत्ति जताई थी। इसी वजह से फिल्म पर बैन लगा दिया गया।
साल 2005 में आई फिल्म सिंस यशराज बैनर तले बनी थी। फिल्म की कहानी एक जवान लड़की और पादरी के प्रेम प्रसंग पर आधारित थी। इस फिल्म को लेकर ईसाई धर्म के लोगों ने आपत्ति जताई थी। इसी वजह से फिल्म पर बैन लगा दिया गया।
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वाटर
- फोटो : फाइल
वाटर
दीपा मेहता की फिल्म 'वाटर' में विधवा महिलाओं के जीवन से जुड़ी स्याह दुनिया को दिखाया गया है। इस फिल्म को अकादमी अवॉर्ड 2007 के लिए नॉमिनेट भी किया गया। लेकिन विवादों में आने कारण इसे बैन कर दिया गया।