सोनू सूद का कहना है कि उनके काम से जांच करने वाले टैक्स अधिकारी खुश थे। उन्होंने कहा, मैंने टैक्स अधिकारियों को सारे कागजात दिए हैं। उन्हें जो कागजात चाहिए थे, उससे ज्यादा दिए। सोनू ने ये बातें अपने एक इंटरव्यू में कही हैं। उन्होंने कहा, मेरे पास लखनऊ व जयपुर में एक इंच भी जमीन नहीं है। विदेशी चंदे में हेराफेरी की बात पर सोनू ने कहा कि रजिस्टर्ड कंपनी को विदेशी फंड पाने के लिए एफसीआरए में रजिस्टर कराना होता है। मेरा फाउंडेशन रजिस्टर ही नहीं है, तो मैं विदेशी फंड्स ले ही नहीं सकता हूं।
जब सोनू सूद ने टैक्स अधिकारियों से कहा: मैं आपको मिस करूंगा, जानिए क्या जवाब मिला?
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सोनू सूद ने कहा, मैं लोगों की मेहनत की कमाई को बेकार नहीं जाने दूंगा। फंड में मेरा कमाया पैसा भी पड़ा है, जो मैंने दान किया है। उन्होंने कहा, फाउंडेशन को मिले फंड को इस्तेमाल करने के लिए एक साल का समय होता है। अगर फंड्स का इस्तेमाल नहीं होता, तो आप एक और साल की बढ़ोतरी कर सकते हैं। यह नियम है। मैंने अपने फाउंडेशन का रजिस्ट्रेशन कुछ महीने पहले ही कराया है। इससे पहले हम पैसा इकट्ठा नहीं कर रहे थे।
उन्होंने कहा, मैंने 4-5 महीने से ही पैसा इकट्ठा किया है। नियम के हिसाब से मैं इस पैसे को 7-8 महीने में कहीं भी इस्तेमाल कर सकता हूं।
सोनू सूद ने कहा कि अचानक एक सुबह घर पर टैक्स अधिकारियों का आना चौंकाने वाला था। मेरा छोटा बेटा कई दिनों तक घर में ही फंस गया था। जब तक अधिकारी जांच करते हैं, तब तक कोई भी बाहर नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा, मैं बहुत अच्छा होस्ट हूं। मैंने टैक्स अधिकारियों का बहुत ख्याल रखा। चार दिनों के बाद टैक्स अधिकारियों ने भी माना कि यह उनका अच्छा अनुभव था। मैंने भी उनसे कहा कि मैं आप लोगों को मिस करूंगा। इस पर टैक्स अधिकारियों ने मेरे काम की सराहना की।
सोनू सूद ने कहा कि वो राजनीति में शामिल होने के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, मैंने हाल ही में राज्यसभा सांसद के दो ऑफर्स ठुकराये हैं। मुझे लगता है कि अभी राजनीति में आने का सही वक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि दो-चार साल बाद क्या होगा उन्हें नहीं पता, लेकिन अभी वो राजनीति में आने के लिए तैयार नहीं है।
आपको बता दें कि जब से सोनू सूद के घर आयकर विभाग का छापा पड़ा है, वो सुर्खियों में बने हुए हैं। उनपर फाउंडेशन को मिले फंड के जरिए 20 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है। लॉकडाउन में सोनू सूद प्रवासी मजदूरों के मसीहा बनकर उभरे थे। उन्होंने हजारों की तादाद में लोगों की सहायत की थी और उनको अपने घर पहुंचाया था। यह ऐसा वक्त था जब कोई भी सोनू सूद से सोशल मीडिया के जरिए मदद मांग रहा था, तो वो फौरन मदद कर रहे थे।