सीरियल बालिका वधू से दादी सा बनकर घर-घर में छाईं सुरेखा सीकरी का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। शुक्रवार की सुबह दिग्गज अभिनेत्री सुरेखा सीकरी ने अपनी अंतिम सांसें ली। उनके मैनेजर ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में बताया कि सुरेखा सीकरी को दिल का दौरा पड़ा था जिसकी वजह से उनका निधन हो गया। बता दें कि वो दूसरे ब्रेन स्ट्रोक के बाद वह तमाम जटिलताओं से जूझ रही थीं। 75 साल की उम्र तक दर्शकों का मनोरंजन करने वाली सुरेखा सीकरी ने अपने अलग-अलग किरदारों से दर्शकों का दिल खूब जीता। आज हम इस आर्टिकल में आपको उनके फिल्मी और टेलीविजन सफर की कुछ दिलचस्प बातें बताएंगे।
अलग-अलग किरदारों से सुरेखा सीकरी ने जीता दर्शकों का दिल, इस फिल्म के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
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टेलीविजन में भी चला जादू
बॉलीवुड के साथ-साथ सुरेखा सीकरी ने टेलीविजन पर भी अपने अभिनय का जादू दर्शकों पर खूब बिखेरा। उन्होंने टेलीविजन पर 'बालिका वधू' और 'एक था राजा एक थी रानी' जैसे कई शोज किए। उन्हें छोटे परदे पर कभी कड़क दादी सा के रूप में देखा गया तो कभी चुलबुली दादी बनकर अपनी मासूमियत से वो दर्शकों के दिलों में समा गईं। उन्होंने इन शोज के अलावा 'परदेस में है मेरा दिल' में इंदूमती लाला मेहरा का किरदार निभाया था तो वही सात फेरे में वो भाबो के रूप में नजर आईं थीं। हर शोज के साथ उनके अभिनय का एक अनोखा रूप दर्शकों को देखने को मिला। उन्होंने अपने पूरे करियर में 16 टेलीविजन सीरियल में काम किया।
बालिका वधु की दादी सा बनकर जीता सबका दिल
सुरेखा सीकरी ने छोटे और बड़े परदे पर कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए लेकिन उनके शो 'बालिका वधू' में दादी सा के किरदार ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। इस शो की कहानी समाज में होने वाले बाल विवाह पर आधारित थी। शो में सुरेखा सीकरी ने 'कल्याणी देवी धर्मवीर सिंह' उर्फ दादी सा का किरदार निभाया था। वो शो में एक कड़क दादी सा थीं जो अपनी बहुओं की हमेशा क्लास लगाकर रखती है और पूरे घर पर उन्ही का राज चलता है। हालांकि समय के साथ उनके व्यवहार में परिवर्तन आता है और बहुओं को डांट-डपट कर रखने वाली दादी सा अपनी बहुओं के लिए मां से भी बढ़कर हो जाती हैं।
सुरेखा सीकरी को राष्ट्रीय पुरस्कार से किया सम्मानित
सुरेखा सीकरी ने टेलीविजन और फिल्मों के अलावा थिएटर में भी किया है। वह लगातार थिएटर में सक्रीय रही हैं। उन्होंने हिंदी फिल्मों के अलावा मलयाली फिल्मों में भी काम किया। सुरेखा सीकरी को एक बार नहीं बल्कि तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 1986 में आई फिल्म तमस, 1995 में आई मम्मो और साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म 'बधाई हो' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बधाई हो में उन्होंने आयुष्मान खुराना की दादी की भूमिका निभाई थी और उनके किरदार को दर्शकों ने बहुत पसंद किया था।
आर्थिक तंगी से गुजरीं थीं सुरेखा सीकरी
कई सालों तक बॉलीवुड और टेलीविजन जगत का हिस्सा रहीं सुरेखा सीकरी की जिंदगी में एक समय ऐसा भी आया था जब वो आर्थिक तंगी से जूझी थी। ‘बालिका वधू’ फेम सुरेखा सीकरी सितंबर 2020 में ब्रेन स्ट्रोक की शिकार हुई थीं। उस वक्त उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी। उस दौरान उन्होंने अपने इलाज के लिए आर्थिक मदद भी मांगी थीं। साल 2018 में सुरेखा सीकरी को पहला ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिसकी वजह से वो पैरालाइज्ड हो गई थीं। वह शूटिंग के दौरान ही गिर पड़ी थीं।