हिंदी सिनेमा की वरिष्ठ अभिनेत्री सुषमा सेठ को फिल्मों में ज्यादातर मां और दादी का किरदार निभाने के लिए जाना जाता है। वह पर्दे पर ऋषि कपूर, अक्षय कुमार, शाहरुख खान, ऋतिक रोशन, अनिल कपूर और प्रीति जिंटा जैसे कई बेहतरीन हिंदी फिल्मों के कलाकारों की दादी और मां का किरदार निभा चुकी हैं। उनका जन्म तो 1936 में दिल्ली में हुआ था लेकिन हिंदी सिनेमा में अपनी पहली फिल्म मिलने तक वह 42 साल की हो चुकी थीं। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फिल्म 'जुनून' सुषमा सेठ की पहली फिल्म रही लेकिन इसके बाद उनके करियर में अब तक ब्रेक नहीं लगा। आइए जानते हैं उनके करियर के कुछ शानदार किरदारों के बारे में।
इस हीरोइन ने 42 साल की उम्र में किया डेब्यू और फिर लगा दी सबसे बड़ी 10 हिट फिल्मों की लाइन
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जुनून (1978)
सुषमा सेठ ने इस फिल्म के साथ ही अपने हिंदी सिनेमा में करियर की शुरुआत की है। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी यह फिल्म रस्किन बॉन्ड के उपन्यास 'ए फ्लाइट ऑफ पीजन्स' पर आधारित है। फिल्म में शशि कपूर, जेनिफर केंडल, नफीसा अली, टॉम ऑल्टर, शबाना आजमी, कुलभूषण खरबंदा, नसीरुद्दीन शाह, दीप्ति नवल, पर्ल पद्मश्री और खुद सुषमा सेठ ने मुख्य भूमिकाएं निभाई है। सुषमा सेठ ने फिल्म में शशि कपूर के किरदार जावेद खान की चाची का किरदार निभाया है। यहीं से सुषमा का फिल्मों में दादी और मां बनने का सिलसिला शुरू हो गया था।
सिलसिला (1981)
यश चोपड़ा के निर्देशन और निर्माण में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई। हालांकि, फिल्म में शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, रेखा और संजीव कुमार जैसे भारी भरकम कलाकारों की टोली थी। फिर भी यह फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकामयाब रही है। यह इकलौती फिल्म है जिसमें सुषमा सेठ ने किसी के रिश्तेदार का किरदार नहीं निभाया है। वह एक अभिनेत्री के किरदार में नजर आईं। इस फिल्म के अलावा सुषमा ने अमिताभ बच्चन के साथ 'कभी खुशी कभी गम' में भी काम किया है जिसमें वह अमिताभ की सास के किरदार में नजर आईं।
प्रेम रोग (1982)
राज कपूर के निर्देशन और निर्माण में बनी यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन रोमांटिक फिल्मों में से एक है। यह फिल्म देवधर और मनोरमा के बचपन से लेकर जवानी तक के प्यार की दास्तां सुनाती है। फिल्म में सुषमा सेठ ने मनोरमा की आंटी का किरदार निभाया है। वह ठाकुर खानदान की बहू हैं लेकिन उन्होंने जिस लड़की को अपनी बेटी की तरह पाला वह एक गरीब अनाथ लड़के, जो शुरुआत से ही उनके टुकड़ों पर पलता रहा, देवधर से प्यार करने लगती है। यह पहला मौका था जब सुषमा ने ऋषि कपूर के साथ इस फिल्म में काम किया। इस फिल्म के बाद तो ये दोनों नगीना, दीवाना, बोल राधा बोल, चांदनी जैसी कई और फिल्मों में भी मां और बेटे के किरदार में नजर आए।
तवायफ (1985)
सुषमा सेठ एक काबिल अदाकारा रही हैं लेकिन फिल्मों में उनके किरदार इतने बड़े नहीं रहे या फिर यूं कहें कि इतने खास नहीं रहे कि उन्हें अपने अभिनय के लिए किसी तमगे से नवाजा गया हो। हालांकि, इस फिल्म में सुषमा सेठ को अपनी अदाकारी थोड़े बड़े पैमाने पर दिखाने का मौका मिला। यहां वह एक कोठे की मालकिन अमीना बाई के किरदार में नजर आईं। बीआर चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म में शानदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया।