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बॉलीवुड में शिक्षा पर आधारित फिल्में समय-समय पर बनती आई हैं। ऐसे में स्कूल, अध्यापक, छात्रों के बीच अध्यापकों का तालमेल, शैक्षिक व्यवस्था और टीचिंग पैटर्न का रूप खुलकर सामने आया हैं। कई मर्तबा ऐसी भी फिल्में बनी हैं जो बच्चों को नई दिशा प्रदान करती हैं। ऐसे में बात करेंगे उन 5 बॉलीवुड शैक्षिक फिल्मों की जिसे अभिभावकों के हर हाल में अपने बच्चों के साथ बैठकर देखनी चाहिए...
तारे जमीन पर
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इस लिस्ट में सबसे पहले बात करेंगे साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म 'तारे जमीन पर' की। इस फिल्म को देखने के बाद आपकी आंखों में आंसू जरूर आएंगे। क्योंकि इस फिल्म में बच्चों की उन बारिक गलतियों को दिखाया गया है जिस पर अभिभावको का आसानी से ध्यान नहीं जाता है। फिल्म में ये भी बताया गया है कि बच्चे के टैलेंट को पहचान कर उसे उसी दिशा में आगे ले जाना चाहिए। बता दें कि अभिभावको के लिए बहुत जरूरी है कि वे अपने बच्चों संग इस फिल्म को जरूर देखें।
स्टेनली का डब्बा
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फिल्म 'स्टेनली का डब्बा' में डायरेक्टर अमोल गुप्ते ने बहुत ही गहरी बात समझाने की कोशिश की है। बता दें कि स्टेनली एक ऐसा बच्चा है, जो किसी वजह से अपना टिफिन नहीं ला पाता है। उधर एक हिंदी टीचर वर्माजी (अमोल गुप्ते) भी हैं, जो अपना लंच बॉक्स कभी नहीं लाते। गौरतलब है कि अमोल गुप्ते ने पहली बार इस फिल्म से डायरेक्शन में कदम रखा है। खैर बात करे स्टोरी की तो वर्माजी बच्चों के खाने पर नीयत लगाए रहते हैं। बच्चे अपने टिफिन में से स्टेनली को तो खिलाना चाहते हैं, लेकिन वर्मा सर को नहीं। वर्मा सर इसी बात को लेकर स्टेनली से नफरत करते हैं। टिफिन के मामले में वर्मा सर स्टेनली को अपना दुश्मन ही मान लेते हैं।दूसरे टीचर वर्मा सर को बार-बार टिफिन लाने के लिए कहते हैं। वर्मा सर उस पर तो ध्यान देते नहीं और उल्टा वही हिदायत स्टेनली को पास कर देते हैं। ऐसे में अभिभावक के लिए जरूरी है कि वह इस फिल्म को स्कूल के माहौल को जानने के लिए जरूर देखें।
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चिल्लर पार्टी
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पढ़ाई के साथ-साथ अभिभावको को बच्चों में मनोरंजन और शिक्षा के बीच संतुलन बनाना भी बहुत जरूरी होता है। ऐसे में वे बच्चों के साथ फिल्म 'चिल्लर पार्टी' को भी जरूर देखना चाहिए। हालांकि फिल्म ज्यादा पोटेंशियल नहीं है लेकिन मनोरंजन के हिसाब से फिल्म देखी जा सकती है। बता दें कि फिल्म की कहानी एक आवारा बच्चे और उसके पालतु कुत्ते की है जिसे वह बेहद प्यार करता है। इस बच्चे का काम रहवासी कॉलोनी में कार साफ करने का है जहां वह अमीरों के बच्चों संग घुल-मिल जाता है। उधर, उसका कुत्ता भी सबका प्रिय हो जाता है। फिर यही कुत्ता मंत्री के पीए को हड़का देता है और मंत्री पूरे शहर को आवारा कुत्तों से मुक्त करने के अभियान में जुट जाता है।
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फिल्म 'आई एम कलाम' आपके बच्चे की कामयाबी में मील का पत्थर साबित हो सकती है। क्योंकि यह फिल्म एक ऐसे बच्चे पर आधारित है जो बहुत ही गरीब है लेकिन वह फिर भी खुश रहता है। यहां तक कि घर के कमजोर आर्थिक हालात के चलते वह एक होटल में भी काम करता है। वहीं, वक्त मिलने पर पढ़ाई भी करता है। उसके पढ़ने का एक ही मकसद है कि वह अपने घर के हालात बदल सके। ऐसे में बहुत जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों के साथ यह फिल्म देखें।
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