संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' रिलीज हो चुकी है। विरोध के बाद भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक आपको बांधे रखती है। बेहतरीन एक्टिंग, संगीत और कहानी से सजी यह फिल्म आखिरकार एक महान नोट पर खत्म होती है। जैसा कि देश में रानी पद्मावती का दर्जा है, यह फिल्म उसका पूरा सम्मान करते हुए रानी पद्मावती की महानता के साथ इंसाफ करती है। आज हम आपको ऐसे 5 सीन्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे देखकर हॉल में सीटियां बजने लगी थी।
'पद्मावत' के 5 ऐसे सीन, जिनपर सबसे ज्यादा बजी सीटियां, तालियों से गूंज उठा था हॉल
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फिल्म के शुरुआत में ही रणवीर सिंह यानि अलाउद्दीन खिलजी की एंट्री का सीन शानदार रहा। जैसे ही अलाउद्दीन बने रणवीर सिंह ने एंट्री मारी पूरा थियेटर तालियों और सीटियों से गूंजने लगा। दरअसल इस सीन में अलाउद्दीन खिलजी शुतुरमुर्ग लिए जब रजा मुराद यानि की जलालुद्दीन खिलजी के सामने आते हैं रणवीर का खतरनाक लुक देख लोग तालियां पीटने लगते हैं। इस सीन में जलालुद्दीन खिलजी, अलाउद्दीन से कहते हैं 'हमने तो सिर्फ पंख मांगा था तुम तो पूरा शुतुरमुर्ग ही उठा लाएं अलाउद्दीन...!
इस फिल्म का एक सीन ऐसा है जब बहुत गंभीरता से अलाउद्दीन कहता हैं कि उसे पद्मावती को देखना है और इसके लिए वो लड़ेंगा, जिसके बाद मेहरुन्निसा कहती हैं, खुदा से खौफ खाइए, तो अलाउद्दीन कहता हैं कि खाने में क्या है? मेहरुन्निसा बताती हैं कि ये सब है खाने में, तो तभी अलाउद्दीन उनकी बात बीच में काटते हुए कहते हैं कि जब इतना कुछ है खाने के लिए तो मैं खौफ क्यों खाऊं। इस डायलॉग को सुनने के बाद दर्शकों की भी हंसी छूट गई।
फिल्म के एक सीन में खिलजी का इत्र लगाने का स्टाइल गजब का है। वो इत्र की शीशी दासी पर छिड़कता है और उसके साथ लिपट जाता है। इस सीन को देखने के बाद पूरा थियेटर तालियों से गूंजने लगता है। अलाउद्दीन खिलजी एक अय्याश है, फिल्म में उसकी अय्याशी को संजय लीला भंसाली ने बखूबी फिल्माया है।
फिल्म में जौहर का सीन लोगों के रोगंटे खड़े करता है। जौहर का दृश्य बहुत मार्मिक है और राजपूत महिलाओं के साहस को दिखाता है। जब रानी पद्मावती को रतन सिंह के वीर गति के प्राप्त होने की खबर मिलती है तब रानी जौहर की बात क्षत्राणियों से करती है। खिलजी की सेना जब महल में दाखिल होती है तब रानी पद्मावती की क्षत्राणियां खिलजी के ऊपर जलता हुआ कोयला खिलजी पर और उसकी सेना पर फेंकती है। खिलजी इतने पर भी नहीं मानता पद्मावती की एक झलक पाने के लिए वह पागलों की तरह किले की दीवारें कूदता हुआ आता है लेकिन क्षत्राणियां अंत में दरवाजे बंद कर देती हैं। जिसके बाद अलाउद्दीन चीखता है। इस सीन में थियेटर एक दम शांत सा दिखता है मानों जैसे लोग इस सीन का एक एक पल हमेशा के लिए याद कर लेना चाहते हों।