60 के दशक की सिंगर और एक्ट्रेस टुन टुन के नाम से हर कोई वाकिफ है। टुन टुन उस दशक की पहली फीमेल कॉमेडियन थीं जिनके पर्दे पर आते ही हॉल में ठहाके गूंजने लगते थे। टुन टुन का असली नाम उमा देवी खत्री था। लेकिन मोटे होने की वजह से उन्हें लोग टुन टुन बुलाने लगे। तबसे उनका नाम टुन टुन पड़ गया।
'टुन टुन' का गाना सुन उनसे शादी करने भारत आ गया था एक पाकिस्तानी, आखिरी वक्त में हुआ था ये हाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टुन टुन का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके मां-बाप बचपन में ही गुजर गए थे। टुन टुन से 9 साल बड़ा उनका एक भाई हरि था। वहीं उनका ख्याल रखता था। लेकनि कुछ समय बाद हरि का भी निधन हो गया। अब टुन टुन के लिए खाने के भी लाले पड़ गए थे।
पढ़ें- गले लगाने के बहाने कान में ये क्या कह गईं रेखा, हैरान सा मुंह बनाकर खड़ी रहीं जया
वो रिश्तेदारों के घर में नौकारानी का काम करने लगीं। थोड़े बड़े होने पर टुन टुन को पता चला कि उनकी जमीन हड़पने के लिए उनके माता-पिता और भाई का कत्ल करवा दिया गया था। टुन टुन को बचपन से ही गाने का शौक था और वो मुंबई आकर सिंगर बनना चाहती थीं।
पढ़ें- एक्ट्रेस ने ब्रेस्ट फीडिंग कराते हुए शेयर की फोटो, लोगों काे इतनी बुरी लगी कि कर दिए ऐसे कमेंट्स
टुन टुन ने ठान लिया था कि जब भी उन्हें गाने का मौका मिलेगा तो वो नौशाद के लिए गाएंगी। एक दिन चुपचाप वो रिश्तेदारों से भागकर मुंबई आ गईं। दिल्ली में किसी ने उन्हें निर्देशक नितिन बोस के असिस्टेंट जव्वाद हुसैन का पता दिया था। वो मुंबई आकर उनसे मिलीं और उन्होंने ही टुन टुन को पनाह दी।
ये बात 1947 की है तब देश का बंटवारा हो रहा था। उन दिनों कारदार फिल्म 'दर्द' बना रहे थे। तभी टुन टुन एक दिन बेरोकटोक उनके घर में जा घुसीं और उन्हीं से पूछ बैठीं कि कारदार कहां मिलेंगे, 'मुझे गाना गाना है।' दरअसल, टुन टुन फिल्मी तौर तरीकों से वाकिफ नहीं थी।