60 के दशक की सिंगर और एक्ट्रेस टुन टुन के नाम से हर कोई वाकिफ है। टुन टुन उस दशक की पहली फीमेल कॉमेडियन थीं जिनके पर्दे पर आते ही हॉल में ठहाके गूंजने लगते थे। टुन टुन का असली नाम उमा देवी खत्री था। लेकिन मोटे होने की वजह से उन्हें लोग टुन टुन बुलाने लगे। तबसे उनका नाम टुन टुन पड़ गया। संगीत की कोई औपचारिक तालीम न होने पर भी उनकी आवाज में एक खास मिठास थी। उनके संगीत पर नूरजहां और शमशाद बेगम का प्रभाव साफ नजर आता था। टुनटुन को बचपन से ही गाना गाने का बहुत शौक था। वो अक्सर रेडियो से गाने सुनकर उसका रियाज किया करती थीं।
जन्मदिन: हिंदी सिनेमा की पहली महिला कॉमेडियन थीं टुन टुन, जमीन के लिए कर दी गई थी मां-बाप की हत्या
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नौशाद साहब ने टुनटुन का छोटा सा ऑडिशन लिया और उनकी आवाज से प्रभावित होकर उन्हें तुरंत काम दे दिया। दिल्ली में किसी ने उन्हें निर्देशक नितिन बोस के असिस्टेंट जव्वाद हुसैन का पता दिया था। वो मुंबई आकर उनसे मिलीं और उन्होंने ही टुनटुन को पनाह दी। वर्ष 1947 में उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला। टुन टुन का पहला गीत फिल्म 'दर्द' में 'अफसाना लिख रही हूं' था। ये गाना सुपरहिट हुआ और टुन टुन की किस्मत चमक गई।
टुन टुन का ये गाना एक पाकिस्तानी अख्तर अब्बास काजी को इतना पसंद आया कि वो अपना मुल्क छोड़कर भारत आ गए और टुन टुन से शादी कर ली। अख्तर टुन टुन के पुराने जानने वाले थे। इसके बाद तो टुन टुन ने लगातार करीब 45 गाने गाए। लेकिन प्रेग्नेंट होने और कुछ घरेलू जिम्मेदारियों के चलते उन्हें फिल्मों से ब्रेक लेना पड़ा। टुन टुन के पति अख्तर नौकरी करते थे लेकिन परिवार बढ़ने के साथ सैलरी कम पड़ने लगी।
बच्चा होने के बाद टुन टुन का वजन लगातार बढ़ता जा रहा था। लेकिन नौशाद ने उनकी अभिनय प्रतिभा को पहचाना और फिल्म 'बाबुल' में काम करने का मौका दिया। टुन टुन का किरदार लोगों को बेहद पसंद आया और देखते ही देखते वो एक कॉमेडी एक्ट्रेस बन गईं। अपने पांच दशक के करियर में टुनटुन ने करीब 200 फिल्मों में काम किया। 90 के दशक में पति की मौत के बाद उन्होंने फिल्मों से खुद को अलग कर लिया। उनकी मशहूर फिल्मों में 'आरपार', 'प्यासा', 'मिस्टर ऐंड मिसेज फिफ़्टी फाइव' और 'मोम की गुड़िया' शामिल हैं।
बता दें कि टुनटुन के पेरेंट्स और भाई की हत्या जमीन विवाद में कर दी गई थी। टुनटुन के गुजरने से दो दिन पहले ही उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं नहीं जानती मेरे मां-बाप कैसे दिखते थे क्योंकि जब मैं ढाई साल की थी तो वो गुजर चुके थे। मेरा आठ-नौ साल का भाई था जिसका नाम हरी था। मुझे याद है हम अलीपुर में रहते थे। एक दिन मेरे भाई की भी हत्या कर दी गई तब मैं चार-पांच साल की रही होंगी।