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Sachin Bhowmick: फिल्म लेखन की सेंचुरी लगाने वाला इकलौता राइटर, निधन की खबर सुनकर रो पड़े थे ऋषि कपूर

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Mon, 18 Jul 2022 07:15 PM IST
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Unknown and interesting facts about hindi cinema Bollywood writer Sachin Bhowmick Rishi Kapoor Subhash Ghai
सचिन भौमिक - फोटो : अमर उजाला मुंबई

1958 में रिलीज हुई नरगिस की फिल्म ‘लाजवंती’ से लेकर 2008 में रिलीज हुई सलमान खान की फिल्म ‘युवराज’ तक बतौर पटकथा लेखक सक्रिय रहे सचिन भौमिक हिंदी सिनेमा के इकलौते ऐसे लेखक हैं जो 50 साल तक फिल्में लिखते रहे। बतौर निर्देशक भी उन्होंने एक फिल्म बनाई, ‘राजा रानी’। राजेश खन्ना स्टारर इस फिल्म की हीरोइन थीं शर्मिला टैगोर और ये बात कम लोगों को ही पता है कि शर्मिला टैगोर को फिल्मों में लाने का श्रेय भी सचिन भौमिक को ही जाता है।

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आरडी वर्मन, सचिन भौमिक, ऋषि कपूर व अन्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

निधन की खबर सुनकर रो पड़े ऋषि कपूर
17 जुलाई 1930 को पैदा हुए सचिन भौमिक उन गिनती के लोगों में रहे जो फिल्म वालों के बीच रहकर भी कभी फिल्मी नहीं हुए। 12 अप्रैल 2011 को जब उनके न रहने की खबर आई तो उस फिल्म इंडस्ट्री में भी आधे से ज्यादा लोगों को इसका पता न था जिसके लिए उन्होंने सबसे ज्यादा सिल्वर जुबली फिल्में लिखीं। फोन पर उस दिन रुंधे गले से ऋषि कपूर ना जाने कितनी देर तक उनके बारे में बातें करते रहे, बतौर हीरो अपने करियर के दूसरे ही साल में उन्हें फिल्म ‘खेल खेल में’ मिली थी और इसकी पटकथा पढ़ते पढ़ते ही ऋषि कपूर को इसके राइटर के टैलेंट की पहचान हो गई थी।

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आरडी वर्मन संग सचिन भौमिक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जमाने के साथ चलने वाले लेखक
ऋषि कपूर ने तब कहा था, “सचिन दा ने मेरे करियर को जो दिशा और दशा दी, उसका एहसान मैं कभी उतार नहीं पाऊंगा। वह जमाने के साथ चलने वाले राइटर थे। आप ही सोचिए जो राइटर मुखराम शर्मा और अख्तर उल इमान के दौर में आया हो और ऋतिक रोशन के टाइम तक फिल्में लिख रहा हो, उसमें कुछ तो ऐसा होगा ही ना। इस बीच में कितने बड़े बड़े दिग्गज राइटर आए और चले गए। कितने राइटर होंगे यहां मुंबई में जिन्होंने 50 साल तक फिल्में लिखीं? हिट फिल्में लिखीं। सुपरहिट फिल्में लिखीं।” ‘खेल खेल में’ के बाद सचिन भौमिक की लिखी जिन फिल्मों में ऋषि कपूर ने शोहरत और दौलत दोनों पाई, उनमें शामिल रहीं, ‘हम किसी से कम नहीं’, ‘कर्ज़’, और ‘जमाने को दिखाना है’।

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लेखक सचिन भौमिक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सुभाष घई संग खूब जमी जोड़ी
सचिन भौमिक की लिखी ऋषि कपूर स्टारर फिल्म ‘कर्ज’ से उनका रिश्ता निर्माता निर्देशक सुभाष घई से बना। और, ये रिश्ता ‘कर्मा’ और ‘ताल’ जैसी फिल्मों से होता हुआ ‘युवराज’ तक कायम रहा। घई जिन्होंने खुद भी हिंदी सिनेमा में बतौर राइटर ही अपने करियर की शुरुआत की थी, सचिन भौमिक के लेखन के जबरदस्त फैन रहे। उनके मुताबिक, ‘सचिन भौमिक के पास रिश्तों को पहचानने की एक अद्भुत कला थी। वह कहानी लिखते समय भी इसका ध्यान रखते थे। उनकी फिल्में ठेठ कमर्शियल सेटअप में इंसानी जज्बात का सैलाब ले आती थीं।’

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लेखक सचिन भौमिक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सादा जीवन, उच्च विचार
कहते हैं कि सिनेमा वही सुपरहिट होता है जो दर्शकों के दिल के करीब हो। और, सचिन भौमिक को हिंदी सिनेमा के दर्शकों की नब्ज बहुत सही तरीके से पता हो गई थी। सुभाष घई कहते हैं, ‘यही वजह रही कि वह हिंदी सिनेमा के सबसे कामयाब राइटर बने।’ सचिन भौमिक मुंबई के सबसे बड़े सितारों की रिहाइश वाले इलाके बांद्रा में रहते थे। वहीं अपने घर पर ही उन्होंने आखिरी सांस ली। घर पर हमेशा एक सूती लुंगी और बनियान में मिलने वाले सचिन भौमिक ने दिखावे से खुद को हमेशा दूर रखा। सादा जीवन उच्च विचार वाले सचिन भौमिक हर तरह का सिनेमा देखते थे। दुनिया भर की जानकारी उनको होती।

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