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बॉलीवुड के वर्क कल्चर पर विशाल भारद्वाज ने दी प्रतिक्रिया, कहा- 'चुकानी होती है बड़ी कीमत'

Tue, 29 Sep 2020 04:45 AM IST
anand anand बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: anand anand Updated Tue, 29 Sep 2020 04:45 AM IST
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Vishal Bhardwaj has talk about work culture in bollywood
विशाल भारद्वाज - फोटो : amar ujala

फिल्म और संगीत निर्देशक विशाल भारद्वाज का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री काम करने के लिए बेहद खूबसूरत जगह है जहां फिल्म का यूनिट परिवार बन जाता है। उनका कहना है कि यहां 'इनसाइड या आउटसाइड' से ज्यादा प्रतिभा की पूछ होती है। मौजूदा दौर में जब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री कई तरह के विवादों में घिरी है। कई बड़े सितारे आरोपों के घेरे में हैं और यहां के कामकाज के तरीके को लेकर इंडस्ट्री से जुड़े कई स्टार ही सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे वक्त में विशाल भारद्वाज एक अलग तस्वीर सामने रखते हैं।

Vishal Bhardwaj has talk about work culture in bollywood
विशाल भारद्वाज - फोटो : twitter: @VishalBhardwaj

स्क्रीनप्ले राइटर एसोसिएशन अवॉर्ड के एलान के दौरान विशाल भारद्वाज से जब हिंदी बॉलीवुड की 'विषैली कार्य संस्कृति' के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत तौर पर मुझे ऐसा नहीं लगता है। हमारे वर्क कल्चर में इतनी मोहब्बत है कि फिल्म यूनिट परिवार बन जाती है।" विशाल भारद्वाज ने 'हैदर', 'मकबूल' और 'ओमकारा' जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके रचे संगीत को पसंद करने वालों का भी एक बड़ा तबका है। हालिया विवाद पर इंडस्ट्री का पक्ष रखते हुए विशाल भारद्वाज ने कहा, "यहां इतना खूबसूरत वर्क कल्चर है, जिसमें न धर्म से लेना-देना है और न ही आउटसाइडर या इनसाइडर से। जो आज कल चल रहा है, मुझे लगता है ये सब बनाई हुई बकवास है। हम परिवार की तरह हैं। मैंने कभी अपने आप को यहां आउटसाइडर महसूस नहीं किया।"

Vishal Bhardwaj has talk about work culture in bollywood
विशाल भारद्वाज - फोटो : twitter: @VishalBhardwaj

हाल में कई कलाकारों ने आरोप लगाया है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बाहर से आनेवालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है और कई खेमे बन गए हैं। विशाल भारद्वाज ने दावा किया, "जितना इमोशनल सपोर्ट यहां मिलता है वो किसी और जगह मिलना मुश्किल है। यहां कोई विषैली कार्य संस्कृति नहीं है।" विशाल भरद्वाज की राय में फिल्म इंडस्ट्री में लोग रातों-रात 'स्टार या जोकर' बन सकते है। वो कहते हैं कि यहां बड़े दांव लगते हैं और 'जहां बड़े दांव लगते हैं, वहां बड़े दाम भी चुकाने पड़ते हैं।'

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Vishal Bhardwaj has talk about work culture in bollywood
विशाल भारद्वाज - फोटो : twitter: @VishalBhardwaj

विशाल भरद्वाज इसे 'लॉटरी सिस्टम' कहते हैं। उनके मुताबिक, "यहां प्रतिभा रखने वाले लोगों की लॉटरी जरूर लगती है। फिर चाहे वो फिल्मी खानदान से ताल्लुक रखते हों या न रखते हों।" हालिया विवादों पर फिल्म इंडस्ट्री के ज्यादातर बड़े कलाकारों और निर्देशकों ने चुप्पी साधी हुई है। लेकिन विशाल भारद्वाज खुलकर अपनी बात रखते हैं। वो कहते हैं कि अभी जो कुछ हो रहा है, उस पर रोक लगनी चाहिए। वो कहते हैं, "ये जो बर्बाद किया जा रहा है आजकल... सबको पता है कि दिलचस्पी कहां हैं? ये सब क्यों और किसलिए हो रहा है?। कृपया हमें (फिल्म इंडस्ट्री) माफ कर दीजिये। हमें हमारे हाल पर छोड़ दीजिए हम लोग बहुत अच्छे हैं।"

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विशाल भारद्वाज - फोटो : twitter: @VishalBhardwaj

विशाल भारद्वाज ने 'बायोपिक' फिल्मों चलन पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "अभी जिसे देखो, वो बायोपिक बना रहा है। मुझे बहुत ही चिढ़ होती है। मुझे ऐसी फिल्में देखना पसंद नहीं।" विशाल भारद्वाज कहते हैं कि जो लोग जीवित हैं उन पर बायोपिक बनाना समझ के परे है। वो कहते हैं कि गुरुदत्त, साहिर लुधियानवी या किशोर कुमार पर बायोपिक बनाने का विचार अच्छा हो सकता है लेकिन फिलहाल उन्हें ऐसा कोई किरदार नजर नहीं आ रहा है। स्क्रीनप्ले राइटर एसोसिएशन इस साल अपनी 'डायमंड जुबली' मना रही है। एसोसिएशन ने फिल्म, टीवी और ओटीटी के लेखक और गीतकारों को पुरस्कार देने का एलान किया है जो रविवार को दिए जाएंगे।


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