बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि उन्होंने अपने पिता सुरेश ओबेरॉय से कहा था कि वह फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष करने के लिए अपना उपनाम छोड़ देंगे। विवेक ने पिता से यह भी कहा था कि वह नहीं चाहते कि पिता सुरेश ओबेरॉय उनके लिए फिल्म बनाए। यह उस वक्त की बात है जब विवेक ओबेरॉय करीब 22 साल के थे।
Vivek Oberoi: जब विवेक ओबेरॉय ने पिता से कहा था- मैं आपका सरनेम छोड़ दूंगा..मुझे संघर्ष करना है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौरतलब है कि फिल्म इंडस्ट्री में विवेक ओबेरॉय ने राम गोपाल वर्मा की फिल्म कंपनी से कदम रखा था। यह फिल्म साल 2002 में रिलीज हुई थी। इसके बाद विवेक ओबेरॉय ने रोड, दम, साथिया, मस्ती, युवा, किसना: द वॉरियर पोएट, ओमकारा, शूटआउट एट लोखंडवाला, मिशन इस्तांबुल, रक्त चरित्र, बैंक चोर और पीएम नरेंद्र मोदी सहित कई फिल्मों में अभिनय किया।
अपने एक इंटरव्यू में विवेक ओबेरॉय ने कहा कि वह जब 22 या 23 साल के थे उस वक्त अपने पिता के पास गये। उन्होंने पिता से कहा, मैं नहीं चाहता कि आप मेरे लिए फिल्म बनाए। इस पर उनके पिता की प्रतिक्रिया थी 'क्या तुम पागल हो?' इस पर विवेक ओबेरॉय ने कहा था, नहीं, मैं बिल्कुल नहीं चाहता कि आप मेरे लिए फिल्म बनाए।
आपने सबकुछ अपने दम पर किया। इस पर पिता सुरेश ओबेरॉय ने उनसे कहा था कि इसके लिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा। संघर्ष बहुत कठिन होता है।
विवेक का कहना है कि यह सुनने के बाद उन्होंने अपने पिता से कहा, मैं भी संघर्ष करूंगा। इस पर पिता ने कहा, अरे तुम संघर्ष कैसे कर सकते हो? तुम सुरेश ओबेरॉय के बेटे हो'। विवेक का कहना है कि इसके बाद उन्होंने पिता से कहा था कि मैं आपका सर नेम छोड़ दूंगा। विवेक ओबेरॉय ने पिता से कहा था, मैं सिर्फ विवेक आनंद रहूंगा और मैं संघर्ष करूंगा। मैं घर-घर जाऊंगा, मैं ऑफिस-टू-ऑफिस जाऊंगा। मैं कतारों में खड़ा रहूंगा। मैं जाऊंगा और अपने पोर्टफोलियो, पुरस्कार और प्रमाण पत्र ले जाऊंगा जो मेरे पास हैं।