15 जून 1929 में करांची में जन्मी सुरैया का पूरा नाम सुरैया जमाल शेख था। फिल्मी जगत में लोग उन्हें सुरैया के नाम से जानते थे। सुरैया ने 1941 में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। एक अच्छी अभिनेत्री होने के साथ-साथ वो बहुत ही उम्दा गायिका भी थीं, उन्हें आधुनिक भारत का सिंगिंग सुपरस्टार कहा जा सकता है। उन्होंने नानुबाई वकील की फिल्म 'ताजमहल' से बतौर अभिनेत्री फिल्म जगत में कदम रखा। इस फिल्म में उन्होंने 'मुमताज' की महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। आज हम आपको इस अभिनेत्री की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से बताएंगे।
दिलचस्प राज: जब देर रात सुरैया से मिलने पहुंचे थे हॉलीवुड अभिनेता ग्रैगरी पेक
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हॉलीवुड अभिनेता ग्रैगरी पेक की थी बड़ी प्रशंसक
सुरैया को हॉलीवुड अभिनेता ग्रैगरी पेक के साथ एक फिल्म करने का प्रस्ताव भी मिला था। जब ग्रैगरी पेक भारत आए थे तो उन्होंने अभिनेत्री के साथ चाय पी और इस बात ने बहुत सुर्खियां बटोरी। 1952 में भारत में हुए अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान जब सुरैया हॉलीवुड के निर्देशक फ्रैंक काप्रा से मिलीं तो उन्होंने पेक को देने के लिए अपना एक ऑटोग्राफ दिया। बाद में पेक ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि उन्हें सुरैया का ऑटोग्राफ मिला है।
सुरैया से मिलने उनके घर पहुंच गए थे ग्रेगरी पैक
एक बार ग्रैगरी पेक जब मुंबई आए तो वो सुरैया से मिलने उनके घर पहुंच गए। इस बात का खुलासा खुद सुरैया ने एक बातचीत के दौरान किया था। उन्होंने कहा था ' ग्रैगरी पेक ने मुझे एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने लिखा था मुंबई आना हुआ तो मुलाकात जरूर होगी। लेकिन मैं हमेशा ये ही सोचती थी कि वो क्या ही आएंगे और मुलाकात करेंगे।' लेकिन अपने काम से थक कर जब सुरैया घर आईं और आराम कर रही थीं उसी दौरान उनके दरवाजे की घंटी बजी और दरवाजा सुरैया की मां ने खोला। जहां बहुत ही प्रेम से ग्रैगरी पेक ने उनकी मां से पूछा, मैडम सुरैया हैं क्या? जिसके बाद उनकी मां भी हैरान हो गईं और उन्होंने सुरैया को करीब 12 बजे नींद से उठाते हुए कहा तुमसे ग्रैगरी पेक मिलने आए हैं। सुरैया को पहले तो लगा कि वो मजाक कर रही हैं, लेकिन बाद में सुरैया ने इस हॉलीवुड अभिनेता को अपने सामने खड़ा पाया तो आश्चर्यचकित रह गईं। अपने पसंदीदा अभिनेता को देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने उन्हें आमंत्रित किया और अच्छे से खातिरदारी की।
सुरैया और देव आनंद ने एक साथ कई फिल्में की। कहा जाता है इस दौरान दोनों एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए थे। सुरैया ग्रैगरी पेक की इतनी बड़ी प्रशंसक थीं कि देव आनंद की तुलना हॉलीवुड अभिनेता पेक से करने लगीं। सुरैया ने जब देव आनंद से कहा कि उनकी शक्ल ग्रैगरी पेक से मिलती है और उनका स्टाइल भी, तब देव आनंद ने उनसे कहा कि मेरी तुलना उससे मत करो। सुरैया ने जब इसकी वजह पूछी तो देव आनंद ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ जवाब देते हुए कहा मेरी शक्ल उससे कई ज्यादा बेहतर है। उनकी इस बात पर सुरैया मुस्कुराईं और बड़े ही प्यार से उन्होंने देव आनंद को कहा तुम्हारे इसी आत्मविश्वास की कायल हूं मैं।
बाल-कलाकार के रूप में किया खूब काम
1936 में सुरैया ने जद्दन बाई की मैडम फैशन में मिस सुरैया के रूप में बाल कलाकार के तौर पर शुरुआत की। उन्हें अपने चाचा एम. जहूर की मदद से एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली। 1941 में छुट्टियों के दौरान, वह अपने चाचा के साथ बॉम्बे के 'मोहन स्टूडियो' में फिल्म ताजमहल की शूटिंग देखने पहुंचीं। उसी दौरान निर्देशक नानुभाई वकील ने सुरैया के आकर्षण और मासूमियत को देखा और उन्हें अपनी फिल्म 'ताजमहल' में मुमताज की भूमिका निभाने के लिए चुना। एक बाल कलाकार के रूप में, उन्होंने तमन्ना, स्टेशन मास्टर, हमारी बात में अभिनय किया और अपनी आवाज दी। बाद में सुरैया की पहचान एक प्लेबैक सिंगर के रूप में हुई। उन्होंने अनमोल, दर्द और ताजमल जैसी फिल्मों में अभिनय किया और साथ ही अपनी आवाज का जादू चलाया। सुरैया जिस भी फिल्म का हिस्सा होती थीं उस फिल्म की सफलता की गारंटी मान ली जाती थी। वो अपने समय की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री थीं उनके प्रशंसकों की फेहरिस्त काफी लंबी है।