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B'day Spl : जब फैज ने उड़ाया था भारत का मजाक तो मजरूह ने दिया था ये कड़ा जवाब

Sat, 01 Oct 2016 01:23 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 01 Oct 2016 01:23 PM IST
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when majrooh sultanpuri got angry over insulting india
मजरूह सुल्तानपुरी
मजरूह सुल्तानपुरी महान शायर ही नहीं पक्के देशभक्त भी थे। उन्होंने विदेशों में भी भारत को झुकने नहीं दिया। उनके जीवन का एक किस्सा भारत के प्रति उनके प्यार और देशभक्ति को दर्शाता है। 


एक बार विदेश में मुशायरे के दौरान पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज ने भारत की गरीबी का मजाक उड़ाया था। इस पर सुल्तानपुरी ने न सिर्फ फैज को मुशायरे के मंच से ही मुंहतोड़ जवाब दिया बल्कि भारत की गरिमा भी कायम रखी। 

B'day Spl : जब फैज ने उड़ाया था भारत का मजाक तो मजरूह ने दिया था ये कड़ा जवाब

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फैज अहमद फैज

मजरूह सुल्तानपुरी के करीबियों में शुमार जाहिल ने एक साहित्यिक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में बताया था कि कनाडा के एक मुशायरे में मजरूह और फैज अहमद फैज समेत दुनिया के कई बड़े शायर शरीक थे। फैज ने एक तकरीर की जिसमें दुनिया के कुछ देशों के हालात का जिक्र करते हुए भारत पर भी कुछ तीखी टिप्पणी की। यह बात मजरूह को चुभ गई। जब मजरूह अपना कलाम पेश करने के लिए माइक पर गए तो फैज की उस हल्की टिप्पणी का करारा जवाब दिया। 

B'day Spl : जब फैज ने उड़ाया था भारत का मजाक तो मजरूह ने दिया था ये कड़ा जवाब

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मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह साहब ने कहा, 'अभी जिस भारत के हालात पर फैज साहब रोशनी डाल रहे थे, मैं वहीं का हूं। मैं अपने भारत के बारे में फख्र के साथ कहता हूं कि यह चश्मा जो मेरी आंख पर है, भारत का बना हुआ है। मेरे जिस्म पर मबलूस शेरवानी, कुर्ता और पायजामा का कपड़ा भारत में ही बना है। मेरा कलम, मेरा मोजा और जूता भारत का ही बना हुआ है।'
मजरुह ने भारत की तो तारीफ की ही साथ ही पाकिस्तानी शायर को भी सबक सिखाया। उन्होंने आगे कहा, 'फैज साहब के पाकिस्तान का आलम यह है कि उनकी पैंट-शर्ट का कपड़ा जर्मन का बना है तो चश्मा इंग्लैंउ का। कलम अमेरिकी है तो जूता जापान का है। अगर से सारे देश अपनी-अपनी चीज़े वापस ले लें तो फैज साहब की क्या हालत होगी, आप हज़रात महसूस कर सकते हैं।'

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B'day Spl : जब फैज ने उड़ाया था भारत का मजाक तो मजरूह ने दिया था ये कड़ा जवाब

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मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म अक्तूबर 1919 का उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआ था। तरक्कीपसंद शायरों में उनका नाम सरेफेहरिस्त लिया जाता है। उन्होंने तमाम हिन्दी फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं, जो आज भी लोगों के जेहन में तरोताजा हैं।

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मजरूह सुल्तानपुरी

1964 में फिल्म ‘दोस्ती’ के गीत 'चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे' के लिए मजरूह को फिल्मफेयर एवार्ड से नवाजा गया। इसके अलावा वे पहले ऐसे गीतकार थे, जिन्हें दादासाहब फाल्के मिला। इस अज़ीम शख़्सियत के मालिक का निधन 24 मई 2000 को हुआ। उस वक्त उनकी उम्र 80 बरस थी। 

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