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जावेद अख्तर से लोग गाने क्यों नहीं लिखवाना चाहते, नाराजगी है या वजह कुछ और है?

Thu, 30 Aug 2018 11:33 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 30 Aug 2018 11:33 AM IST
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why people dont want to write songs by javed akhtar

गीतकार और लेखक जावेद अख्तर अक्सर नाराज हो जाते हैं, कभी गलत उर्दू या हिंदी बोलने की बात पर, तो कभी इस दौर के संगीत को लेकर। हाल ही में उनकी नई फिल्म पलटन के एक इवेंट पर उन्होंने फिर से अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि जावेद अख्तर से गाने मत लिखवाया करो, वो गानों में शायरी लिख देते हैं। गानों में शायरी मांगने वाले बहुत कम हो गए हैं। अगर गाने के बोल में कुछ मतलब या गहराई है तो ये उनके लिए खतरे की बात हो जाती है। 

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कुछ फिल्म मेकर, जो अपने गानों में अब भी गहराई चाहते हैं, उनमें से एक हैं जेपी दत्ता। दरअसल नई फिल्म पलटन में जावेद अख्तर और जेपी दत्ता एक साथ काम कर रहे हैं। जेपी दत्ता फिल्म के कहानीकार हैं जबकि गानों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं। म्यूजिक दिया है अनु मलिक ने। ये तिकड़ी पहले भी कई फिल्मों में काम कर चुकी है। 1997 में आई जेपी दत्ता की फिल्म बॉर्डर में भी जावेद अख्तर ही गीतकार थे और अनु मलिक ने संगीत दिया था। 21 साल बाद बॉर्डर की यह टोली, पलटन लेकर आ रही है, जो 7 सितंबर 2018 को रिलीज होगी। 

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बॉर्डर फिल्म के "संदेशे आते हैं" और "तो चलूं" गाने दर्शकों के बीच खासे लोकप्रिय हुए थे। इन गानों को लोग आज भी उतने ही चाव से सुनते हैं, जितना 1997 में सुना करते थे। जावेद अख्तर ने आजकल के गानों पर हैरानी जताई है। वो कहते हैं कि आजकल के गीतों को गीत कहा भी जाए या नहीं। जावेद कहते हैं, आजकल के गानों में सिंगर की आवाज और ऑर्केस्ट्रा, ड्रम, गिटार और तबले की आवाज मिक्स होती है।

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ये सारे साधन आवाज के ऊपर बज रहे होते हैं, इससे सिंगर की आवाज कहीं नीचे दब जाती है। ऐसे में आवाज को कभी-कभी खोदकर निकालना पड़ता है और कभी तो निकाल भी नहीं पाते। अब जब आवाज ही सुनाई नहीं देती, तो शब्द अच्छे हैं या बुरे, किसे फर्क पड़ता है। यंग जनरेशन को यही सब सुनना पसंद है इस पर जावेद अख्तर तंज कसते हुए कहते हैं, 'अगर ऐसा है तो सिंगिंग रियालिटी शो में सब लता जी, रफी, मुकेश, किशोर दा के गाने क्यों गाते हैं?'

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