यामी गौतम पॉजिटिव सोच में विश्वास रखती हैं और किसी रेस में शामिल नहीं हैं। 'विक्की डोनर' से मिली पहचान के बाद वह ऋतिक रोशन के साथ 'काबिल' में नेत्रहीन युवती बनी दिखीं तो रामगोपाल वर्मा की 'सरकार-3' में ग्रे शेड वाले किरदार में। अब वह 'बत्ती गुल मीटर चालू' में वकील बनी हैं। यामी से फिल्म इंडस्ट्री के अनुभवों को लेकर रवि बुले की विशेष बातचीत...
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एक्ट्रेस नहीं आईएएस बनना चाहती थीं यामी गौतम, पिता के दोस्त ने बदली किस्मत, किए कई और खुलासे
रवि बुले
Updated Fri, 14 Sep 2018 09:29 PM IST
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yami gautam
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.विक्की डोनर की सफलता को छह साल हो गए। इस बीच आपने ऋतिक जैसे सितारे के साथ भी फिल्म की। अब तक के सफर से संतुष्ट हैं?
.जब तक काम करते रहेंगे संतोष नहीं आएगा। ऐसा ही होना भी चाहिए। पिछले दिनों फिल्म 'उरी' की शूटिंग के बाद मैं चंडीगढ़ में घर गई थी। पिता से भी यही बात हो रही थी और मैंने कहा कि सफर तो जारी है। रुक नहीं सकते। हां इस दौर में बहुत उतार-चढ़ाव देखे। अनुभव लिए। काफी सीखा। जहां से आई हूं, वहां से इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं है। मेरा कोई गॉडफादर नहीं। कोई सरपरस्त नहीं है। और मैं इस बात से खुश हूं।
.उतार-चढ़ाव के दौर में कभी ख्याल आया कि काश गॉडफादर होता, किसी का हाथ सिर पर होता?
.कभी ऐसा ख्याल आया भी तो मैंने अगले ही पल झटक दिया। ख्याल तो आते हैं। मुंबई के लिए पहला टिकट मैंने नहीं खरीदा था, उसे हासिल किया था। एक प्रोडक्शन हाउस ने मुझे बुलाया था। यह थोड़ा दार्शनिक अंदाज होगा परंतु मेरा मानना है कि अगर मैं यहां हूं तो इसकी खास वजह है। जब तक वजह पूरी नहीं होती तब तक यात्रा चलती रहेगी।
.जब तक काम करते रहेंगे संतोष नहीं आएगा। ऐसा ही होना भी चाहिए। पिछले दिनों फिल्म 'उरी' की शूटिंग के बाद मैं चंडीगढ़ में घर गई थी। पिता से भी यही बात हो रही थी और मैंने कहा कि सफर तो जारी है। रुक नहीं सकते। हां इस दौर में बहुत उतार-चढ़ाव देखे। अनुभव लिए। काफी सीखा। जहां से आई हूं, वहां से इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं है। मेरा कोई गॉडफादर नहीं। कोई सरपरस्त नहीं है। और मैं इस बात से खुश हूं।
.उतार-चढ़ाव के दौर में कभी ख्याल आया कि काश गॉडफादर होता, किसी का हाथ सिर पर होता?
.कभी ऐसा ख्याल आया भी तो मैंने अगले ही पल झटक दिया। ख्याल तो आते हैं। मुंबई के लिए पहला टिकट मैंने नहीं खरीदा था, उसे हासिल किया था। एक प्रोडक्शन हाउस ने मुझे बुलाया था। यह थोड़ा दार्शनिक अंदाज होगा परंतु मेरा मानना है कि अगर मैं यहां हूं तो इसकी खास वजह है। जब तक वजह पूरी नहीं होती तब तक यात्रा चलती रहेगी।
yami gautam
.ड्राइविंग फोर्स आपके लिए क्या है?
.आपके सपने, आपका पैशन, आपका विजन। यह दिल-दिमाग में होना चाहिए, यह नहीं कि आप कहते फिरें, पांच साल बाद खुद को फलां-फलां मुकाम पर देखना चाहती हूं। मेरे लिए फिल्में जिंदगी का हिस्सा हैं, वे जिंदगी नहीं हैं।
.एक्टर कहते हैं कि फिल्में तनाव से भरा जॉब है। एक ऐक्टर को क्या-क्या तनाव होते हैं?
.आज स्टारडम की पहचान सिर्फ सिनेमा नहीं है। फिल्में हैं, एंडोर्समेंट है, मीडिया है। आप पब्लिक फिगर हैं। ब्रांड हैं। आप बहुत कुछ हैं। बहुत सारे टैग जुड़ जाते हैं। इसलिए लोगों की बहुत सी उम्मीदें जुड़ जाती हैं। एक आदमी इतना कुछ कैसे हो सकता है, एक साथ। दूसरी बात यह कि हर कोई यहां टैलेंटेड है अपने अंदाज में। ऐसे में आप अपनी जगह कैसे बनाते और बनाए रखते हैं, यह भी टेंशन है। बहुत धैर्य की जरूरत पड़ती है। दिमाग लगातार चलता रहता है।
.आपके सपने, आपका पैशन, आपका विजन। यह दिल-दिमाग में होना चाहिए, यह नहीं कि आप कहते फिरें, पांच साल बाद खुद को फलां-फलां मुकाम पर देखना चाहती हूं। मेरे लिए फिल्में जिंदगी का हिस्सा हैं, वे जिंदगी नहीं हैं।
.एक्टर कहते हैं कि फिल्में तनाव से भरा जॉब है। एक ऐक्टर को क्या-क्या तनाव होते हैं?
.आज स्टारडम की पहचान सिर्फ सिनेमा नहीं है। फिल्में हैं, एंडोर्समेंट है, मीडिया है। आप पब्लिक फिगर हैं। ब्रांड हैं। आप बहुत कुछ हैं। बहुत सारे टैग जुड़ जाते हैं। इसलिए लोगों की बहुत सी उम्मीदें जुड़ जाती हैं। एक आदमी इतना कुछ कैसे हो सकता है, एक साथ। दूसरी बात यह कि हर कोई यहां टैलेंटेड है अपने अंदाज में। ऐसे में आप अपनी जगह कैसे बनाते और बनाए रखते हैं, यह भी टेंशन है। बहुत धैर्य की जरूरत पड़ती है। दिमाग लगातार चलता रहता है।
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Yami Gautam
.इंडस्ट्री में बाहर से आना मुश्किल है। यहां जमे हुए लोगों के बच्चों को ज्यादा तुलनात्मक रूप से ज्यादा मौके मिलते हैं?
. यह सही है लेकिन पूरा सच नहीं है। मुझे लगता है कि आप बाहर से हैं तब भी शिकायत नहीं करना चाहिए।
.आपके पिता पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रहे, उन्होंने डॉक्युमेंट्रीज बनाई। क्या आप फिल्मों के माहौल से वाकिफ थीं?
.हमारे घर में फिल्मों पर बात नहीं होती थी। मैं पढ़ाई में अच्छी थी, लॉ में ऑनर्स कर रही थी। चंडीगढ़ में सब सैट था। मुझे आईएएस बनना था। तभी एक बार हमारे घर में फैमेली फ्रेंड्स आए। उन्होंने कहा कि यामी को टीवी-फिल्मों में होना चाहिए। वे मां से कुछ तस्वीरें ले गए और कुछ दिनों बाद मुंबई के एक प्रोडक्शन हाउस से कॉल आया। पिताजी ने दस-पंद्रह लाइन्स के डायलॉग का एक वीडियो शूट किया। भेजा। मुझे सिलेक्ट कर लिया। मैंने टीवी से अपना करियर शुरू किया।
. यह सही है लेकिन पूरा सच नहीं है। मुझे लगता है कि आप बाहर से हैं तब भी शिकायत नहीं करना चाहिए।
.आपके पिता पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रहे, उन्होंने डॉक्युमेंट्रीज बनाई। क्या आप फिल्मों के माहौल से वाकिफ थीं?
.हमारे घर में फिल्मों पर बात नहीं होती थी। मैं पढ़ाई में अच्छी थी, लॉ में ऑनर्स कर रही थी। चंडीगढ़ में सब सैट था। मुझे आईएएस बनना था। तभी एक बार हमारे घर में फैमेली फ्रेंड्स आए। उन्होंने कहा कि यामी को टीवी-फिल्मों में होना चाहिए। वे मां से कुछ तस्वीरें ले गए और कुछ दिनों बाद मुंबई के एक प्रोडक्शन हाउस से कॉल आया। पिताजी ने दस-पंद्रह लाइन्स के डायलॉग का एक वीडियो शूट किया। भेजा। मुझे सिलेक्ट कर लिया। मैंने टीवी से अपना करियर शुरू किया।
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Yami Gautam
.फिल्म इंडस्ट्री के अपने संघर्ष हैं। वो कौन से मुद्दें हैं जिन पर खुल कर बातें होनी चाहिए?
.ये इडंस्ट्री ऑफिस जैसी नहीं है कि जहां आप सही या गलत रूल तय करें। यहां आपको अपने नियम-कायदे और मूल्य खुद बनाने-निभाने हैं। जरूरी नहीं कि मेरे जीवन मूल्य यहां दूसरों के काम आएं या दूसरों के मेरे काम। मेरे लिए सफलता यह है कि आप अपने सपने पूरे करें लेकिन वह इंसान बने रहें, जो अंदर से हैं। परंतु ऐसा नहीं कि आपको अपना विकास नहीं करना है। मेरा स्वभाव लोगों से बहुत घुलने-मिलने वाला नहीं है लेकिन इस इंडस्ट्री के लिए मैंने उसे बदला। ताकि इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकूं।
.यानी खुद को बदलने का संघर्ष आपको करना पड़ा?
.मैं इसे संघर्ष नहीं, चुनौती मानती हूं। चुनौतियां हमेशा जिंदगी में रहेंगी। उनके मायने भले ही बदल जाएं। यह संभव नहीं कि जिंदगी आपके सामने कोई चुनौती पेश न करे।
.ये इडंस्ट्री ऑफिस जैसी नहीं है कि जहां आप सही या गलत रूल तय करें। यहां आपको अपने नियम-कायदे और मूल्य खुद बनाने-निभाने हैं। जरूरी नहीं कि मेरे जीवन मूल्य यहां दूसरों के काम आएं या दूसरों के मेरे काम। मेरे लिए सफलता यह है कि आप अपने सपने पूरे करें लेकिन वह इंसान बने रहें, जो अंदर से हैं। परंतु ऐसा नहीं कि आपको अपना विकास नहीं करना है। मेरा स्वभाव लोगों से बहुत घुलने-मिलने वाला नहीं है लेकिन इस इंडस्ट्री के लिए मैंने उसे बदला। ताकि इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकूं।
.यानी खुद को बदलने का संघर्ष आपको करना पड़ा?
.मैं इसे संघर्ष नहीं, चुनौती मानती हूं। चुनौतियां हमेशा जिंदगी में रहेंगी। उनके मायने भले ही बदल जाएं। यह संभव नहीं कि जिंदगी आपके सामने कोई चुनौती पेश न करे।