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Apna Adda 28: ‘शादी में जरूर आना’ की डायरेक्टर बोलीं, काम वही करें जिसमें खुशी मिलती हो, पैसे के पीछे न भागें
विधु विनोद चोपड़ा की सहायक के तौर पर हिंदी सिनेमा में अपनी बोहनी करने वाली निर्देशक रत्ना सिन्हा जल्द ही अपनी नई फिल्म का एलान करने वाली हैं। वकीलों के परिवार में जन्मी रत्ना शुरू से नई लीक बनाने वाली इंसान रहीं, उनकी हालिया री-रिलीज फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ के इन दिनों खूब चर्चे हैं।
शुरू से शुरू करते हैं, मुंबई कब, कैसे और क्यों आना हुआ?
मैं दिल्ली की हूं, लेकिन अब तक की जिंदगी का 80 प्रतिशत हिस्सा मुंबई में बिताया है। दिल्ली के हंसराज कॉलेज में शाहरुख खान हमारे सीनियर थे। मैं मुंबई 1992 में आई थी, मास मीडिया की पढ़ाई करने। दो साल बाद ही मुझे निर्माता-निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘1942: अ लव स्टोरी’ में बतौर सहायक निर्देशक काम मिल गया और बस, गाड़ी चल निकली।
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रत्ना सिन्हा
- फोटो : इंस्टाग्राम
पहला ब्रेक कैसे मिला?
स्वतंत्र निर्देशन की शुरुआत मेरी 1996 में दूरदर्शन के शो ‘तरंग’ से हुई। इसके बाद ‘सहर’ नाम की एक सीरीज की स्टार प्लस के लिए, और फिर लगातार कई प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनी। 2005 से 2011 के बीच मैंने कई शोज प्रोड्यूस किए, लेकिन एक दिन अहसास हुआ कि मेरा असली सपना तो फिल्में बनाना था। तभी, टीवी एकदम से छोड़ दिया और फिल्मों पर काम शुरू कर दिया।
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रत्ना सिन्हा
- फोटो : इंस्टाग्राम
आपके करियर का टर्निंग पॉइंट क्या रहा?
मेरे करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ रही। इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट मे बने हुए हैं। इस फिल्म की सफलता के बाद मुझे फिर से कई टीवी शोज के ऑफर मिले, लेकिन मैंने मना कर दिया क्योंकि मुझे पता था कि मेरा रास्ता अब फिल्मों का ही है। मेरा मानना है कि सिर्फ पैसे कमाने के लिए कोई भी काम नहीं करना चाहिए। काम वह करना चाहिए जिसमें खुशी मिलती हो।
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रत्ना सिन्हा
- फोटो : इंस्टाग्राम
अब तक के निर्देशन में कोई यादगार सीन बन पड़ा हो जो भुलाए न भूलता हो?
फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ की शूटिंग हमने ‘तू बन जा गली बनारस की’ गाने की शूटिंग से की, एक शॉट है इसका जिसमें राजकुमार और कृति के पीछे से ट्रेन गुजर रही है। वह सीन मुझे आज भी भुलाए नहीं भूलता। उसके बाद दो फिल्में ‘मिडल क्लास लव’ और ‘किसको था पता’ भी बना चुकी हूं, लेकिन पहला प्यार और पहली फिल्म भुलाये नहीं भूलती।
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