राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पाना हर कलाकार का सपना होता है। इसके लिए सभी मेहनत करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही इसे प्राप्त कर पाते हैं। साल 1954 से इस अवॉर्ड को दिए जाने की शुरुआत हुई। तब इसे 'स्टेट अवॉर्ड' या राज्य पुरस्कार के नाम से जाना जाता था। इसके बाद साल 1967 में सरकार ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के नाम से फिल्मी हस्तियों को सम्मानित करना शुरू किया। आज हम आपको उन निर्देशकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा यह पुरस्कार अपने नाम किया है।
Directors: इन निर्देशकों ने जीते सबसे ज्यादा राष्ट्रीय पुरस्कार, एक डायरेक्टर ने जीते सबसे अधिक छह अवॉर्ड
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इस लिस्ट में पहले नबंर पर भारत के महान फिल्मकार सत्यजीत रे हैं। अपने करियर में सत्यजीत रे एक से बढ़कर एक शानदार फिल्में बनाईं। उन्होंने 36 फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और लघु फिल्में शामिल हैं। 2 मई 1921 को जन्मे सत्यजीत रे ने अपने पेशेवर जीवन में छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते। ये पुरस्कार उन्हें 'चिड़ियाखाना' (1967), 'गोपी गाइन बाघा बायने' (1968), 'प्रतिद्वंद्वी' (1970), 'सोनार केला' (1974), 'जन अरण्ये' (1975), 'आगंतुक' (1991) जैसी फिल्मों के लिए मिला था।
अदूर गोपालकृष्णन भारतीय सिनेमा का बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपनी फिल्मों से लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी है। फिल्म निर्देशक के साथ वह पटकथा लेखक और फिल्म निर्माता भी हैं। उनकी पहली फिल्म स्वयंवरम थी। यह साल 1972 में रिलीज हुई थी। उनकी इस फिल्म के बाद मलायलम सिनेमा में एक नई लहर की शुरुआत हुई। अपने करियर में अदूर गोपालकृष्णन ने पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते हैं। स्वयंवरम, मुखमुखम, अनंतराम, मथिलुकल और नालु पेन्नुंगल के लिए वह सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं।
इस सूची में तीसरे पायदान पर मृणाल सेन का नाम है। वह भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशकों में से एक थे। अपने फिल्मी जीवन में उन्होंने कई फिल्में बनाईं, जिसे लोगों का खूब प्यार मिला। वह चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुके हैं। उन्हें पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हिंदी फिल्म 'भुवन शोम' (1969) के लिए दिया गया था। इसके बाद उन्हें तीन पुरस्कार बंगाली भाषा की फिल्मों के लिए मिले। ये फिल्में 'एक दिन प्रतिदिन' (1979), 'अकालेर संधाने' (1980) और 'खंडहर' (1983) थीं।
गोविंदन अरविंदन मलयालम में समानांतर फिल्मों के अग्रदूतों में से एक थे। वह फिल्म निर्माण के अपरंपरागत तरीके के लिए काफी मशहूर थे। अपने फिल्म की करियर में उन्होंने कई शानदार फिल्मों का निर्देशन किया। उन्हें 3 बार राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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