हिंदी सिनेमा में हर हफ्ते कोई न कोई नई कहानी सामने आती रहती है। अब जैसे इस साल 2 अक्टूबर को तीन हिंदी कहानियां सिनेमा की शक्ल में लोगों के सामने हैं, ‘सीरियस मेन’, ‘खाली पीली’ और ‘बहुत हुआ सम्मान’। 2 अक्टूबर को रिलीज पहले की फिल्मों की बात करें तो साल 1987 में राजेश खन्ना- सुलक्षणा पंडित की फिल्म ‘गोरा’, साल 1992 में अरमान कोहली- दिव्या भारती की फिल्म ‘दुश्मन जमाना’, साल 2008 में अभिषेक बच्चन- प्रियंका चोपड़ा की फिल्म ‘द्रोण’ और साल 2009 में रणबीर कपूर - कोंकणा सेन शर्मा की फिल्म ‘वेक अप सिड’ का जिक्र मिलता है। इन फिल्मों के साथ ही जिक्र मिलता है 2 अक्टूबर 1998 को रिलीज हुई फिल्म ‘बंधन’ का। सलमान खान और जैकी श्रॉफ की जोड़ी वाली ये फिल्म न सिर्फ अपनी कहानी के चलते काफी रोचक है, बल्कि इसकी मेकिंग के दौरान जो पंगे हुए, उसकी वजह से ये फिल्म अपने बनने के दौरान भी काफी चर्चा में रही। सलमान खान और जैकी श्रॉफ ने ‘वीर’, ‘क्योंकि’ और ‘भारत’ में भी साथ काम किया है और जल्द ही दोनों फिल्म ‘राधे- योर मोस्ट वांटेड भाई’ में भी साथ दिखाई देंगे। लेकिन, फिलहाल आज बात करते हैं आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘बंधन’ की।
बाइस्कोप: सलमान बोले, ‘जो जीजाजी बोलेंगे वो मैं करूंगा’, अश्विनी भावे को दी हिट फिल्म के साथ विदाई
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सलमान की पहली नौकरी का किस्सा
सलमान खान और जैकी श्रॉफ का दोस्ताना पुराना है। दोनों में उम्र के लिहाज से 10 साल का भी फासला नहीं है लेकिन जैकी श्रॉफ कहते हैं कि उन्होंने हमेशा सलमान को अपने बच्चे जैसा ही प्यार दिया। फिल्म ‘भारत’ के प्रचार के दौरान भी उन्होंने ये बात बार बार दोहराई। जैकी श्रॉफ और फिल्म निर्देशक शशिलाल नायर का याराना पुराना है। और, यही वह निर्देशक हैं जिनके साथ मशहूर राइटर सलीम खान के बेटों सलमान खान और अरबाज खान ने बतौर असिस्टेंट काम करना शुरू किया। ये सिलसिला तीन फिल्मों ‘क्रोध’, ‘परिवार’ और ‘फलक’ तक चला। ‘फलक’ के टाइम ही जैकी श्रॉफ और सलमान खान करीब आए। तब जैकी श्रॉफ स्टार हुआ करते थे और सलमान यूनिट के एक असिस्टेंट डायरेक्टर। लेकिन, जैकी ने सलमान को शुरू से बहुत दुलार दिया। ये अलग बात है कि दोनों के बीच एक समय संगीता बिजलानी को लेकर गलतफहमी भी हुई। फिल्म ‘बंधन’ के सेट पर मौजूद लोग बताते हैं कि दोनों के बीच तनातनी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। माहौल बहुत गरम हो गया था और बड़ी मुश्किल से उस दिन दोनों को शांत किया जा सका। विवाद की वजह बनी थी फिल्म ‘त्रिदेव’ जिसमें जैकी श्रॉफ और संगीता बिजलानी का एक बेहद रोमांटिक और कामुक गाना साथ में फिल्माया गया था।
तमिल फिल्म की रीमेक
फिल्म ‘बंधन’ में सलमान खान और जैकी श्रॉफ के अलावा रंभा और अश्विनी भावे की महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं। इसके अलावा श्वेता मेनन, शक्ति कपूर और मुकेश ऋषि ने फिल्म को मजबूत सहारा दिया है। 1992 में रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘पंडिथुराई’ की ये रीमेक बननी तो 1994 में ही शुरू हो गई थी लेकिन सलमान और जैकी श्रॉफ के पंगे के अलावा और भी वजहों से फिल्म लटकती रही और चार साल बाद जाकर 1998 में रिलीज हो सकी। फिल्म से किसी को कोई उम्मीद नहीं थी। लेकिन, ‘प्यार किया तो डरना क्या’ और ‘जब प्यार किसी से होता है’ वाले साल में ये फिल्म इससे जुड़े सभी लोगों के लिए सरप्राइज सक्सेस रही। ‘पंडिथुराई’ की रीमेक तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम में भी हुई लेकिन सबसे ज्यादा कमाई इन फिल्मों में से सलमान खान की फिल्म ‘बंधन’ ने ही की। फिल्म का एक संवाद ‘जो जीजाजी बोलेंगे वो मैं करूंगा’ अपने दौर का सुपरहिट संवाद रहा है। फिल्म ‘बंधन’ में भी इसकी कहानी का श्रेय इसकी ओरीजनल कहानी लिखने वाले मनोज कुमार को ही दिया गया। लेकिन, हिंदी के चुटीले संवाद इस फिल्म में लिखे अनवर खान ने।
कहानी भाई बहन के प्यार के बंधन की
फिल्म ‘बंधन’ की कहानी भाई और बहन के प्यार की है। फिल्म की ओपनिंग क्रेडिट्स से ही इसका अंदाजा भी मिलना शुरू हो जाता है। भाई और बहन की इन पेटिंग्स में साफ दिखता है कि अश्विनी भावे का फोटो इन पेटिंग्स का चेहरा बनाने में इस्तेमाल किया गया है। अश्विनी भावे ने कन्नड़ और मराठी फिल्मों में नाम कमाने के बाद हिंदी सिनेमा में राज कपूर की फिल्म ‘हिना’ से कदम रखा। फिल्म की मेकिंग के बीच में ही जब राज कपूर चल बसे तो उनके बेटे ने इस फिल्म का निर्देशन का जिम्मा संभाला था। फिल्म ‘बंधन’ अश्विनी भावे की आखिरी रिलीज फिल्म भी मानी जाती है। फिल्म में अश्विनी भावे और सलमान खान भाई बहन के रोल में हैं। अश्विनी के किरदार का नाम है पूजा जिससे ठाकुर सूरज प्रताप शादी करना चाहता है। छोटा भाई राजू भी साथ में ससुराल आ जाता है। ठाकुर की छोटी बहन ज्योति और राजू की दोस्ती प्यार में बदलती है। इस बीच ठाकुर एक नाचने वाली वैशाली को दूसरी बीवी बनाकर घर ले आता है। राजू इसके बाद घर छोड़ जाता है। वैशाली का भाई तमाम षडयंत्रों में जब सफल नहीं हो पाता है तो एक दिन अपनी ही बहन को छुरा घोंप देता है और ठाकुर को इस अपराध में फंसा देता है। राजू की वापसी होती है। फिल्म अपने क्लाइमेक्स को प्राप्त होती है।
करिश्मा को लॉन्च करने वाले निर्देशक
फिल्म ‘बंधन’ के निर्देशक के मुरली मोहन राव के सिर हिंदी सिनेमा का एक खास तमगा सजा हुआ है। दक्षिण भारत में साल 1983 में अपना निर्देशन करियर शुरू करने वाले राव ने 1986 में पहली हिंदी फिल्म मिथुन चक्रवर्ती के साथ बनाई, ‘दिलवाला’। इसके बाद ‘रखवाला’ में अनिल कपूर दिखे और फिल्म ‘दोस्त’ में फिर से मिथुन की उनके खेमे में वापसी हो गई। अनिल कपूर और मिथुन चक्रवर्ती में कभी कुछ खास पटी नहीं। अनिल कपूर ने ऐसे तमाम लोगों को मिथुन चक्रवर्ती से उन दिनों दूर किया जो मिथुन की संगत से दूर रहकर बेहतर काम कर सकते थे। ये बात तो सब जानते ही हैं कि मिथुन ने कभी हिंदी सिनेमा में ऊंचा मुकाम हासिल करने के लिए काम नहीं किया, उन्होंने ज्यादातर काम ज्यादा से ज्यादा फिल्में और ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के लिए किया। के मुरली मोहन राव को भी ये सही समय पर समझ आया और उन्होंने इसके बाद दक्षिण भारतीय हीरो हरीश को पकड़ा और एक दिन पहुंच गए रणधीर कपूर की पत्नी बबीता के पास। उनके पास जो कहानी थी, वह बबीता को पसंद आई और उन्होंने अपनी बेटी करिश्मा को हीरोइन बनाने केलिए हरी झंडी दे दी। परिवार वाले इसके खिलाफ थे, इसीलिए करिश्मा की लॉन्चिंग का कोई बड़ा जश्न भी नहीं हो पाया। लेकिन, हिंदी सिनेमा में के मुरली मोहन राव का नाम करिश्मा कपूर को लॉन्च करने वाले डायरेक्टर के रूप में दर्ज हो गया। करिश्मा की ये फिल्म तो नहीं चली लेकिन के मुरली मोहन राव ने बाद में व्यंकटेश और करिश्मा को लेकर साल 1993 की सुपर डुपर हिट फिल्म बनाई, ‘अनाड़ी’। ‘अनाड़ी’ के तुरंत बाद उन्होंने सलमान और जैकी की फिल्म ‘बंधन’ शुरू की थी। ये फिल्म जब तक पूरी करके वह रिलीज कर पाते उस दरम्यान फिल्म के लगातार लटकते जाने से के मुरली मोहन राव ने तीन और फिल्में ‘सुपर पुलिस’, ‘तकदीरवाला’ और ‘विजेता’ बना डालीं।