आपने टेलीविजन या डिजिटल दुनिया में उपलब्ध वीडियोज देखते हुए एक बात पर अक्सर गौर किया होगा। जिस किसी भी कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र साथ साथ होते हैं, अमिताभ बच्चन हर समय धर्मेंद्र के सम्मान में थोड़े झुके से ही रहते हैं। धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी जब भी बड़े परदे पर बनी, हिट ही रही। ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’ और ‘राम बलराम’ की कामयाबी से पहले धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की कड़ी जुड़ी थी फिल्म ‘जंजीर’ से। जी हां, जिस कहानी के लिए धर्मेंद्र इसके लेखकों सलीम-जावेद को भुगतान कर चुके थे, वह कहानी अगर धर्मेंद्र बिजनौर वाले प्रकाश मेहरा को न देते तो इलाहाबाद वाले अमिताभ बच्चन का तो फिल्म इंडस्ट्री से पैक अप होने ही वाला था। खुद अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘जंजीर’ को लेकर ऐसा ही कुछ कहा था कि अगर ये फिल्म नहीं चली तो वह वापस घर लौट जाएंगे। ऐसा इसलिए कि तब तक अमिताभ बच्चन की 12 फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। फिल्म ‘जंजीर’ को रिलीज हुए 48 साल पूरे हो रहे हैं तो चलिए आज के बाइस्कोप में इसी फिल्म के किस्से दोहराते हैं।
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धर्मेंद्र ने तोहफे में दे दी खरीदी हुई पटकथा
फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र ने ये कहानी खरीदने के बाद इसे अपनी फेवरिट हीरोइन मुमताज के साथ करने की बात निर्देशक प्रकाश मेहरा से तय की थी। धर्मेंद्र और प्रकाश मेहरा की दोस्ती हुई फिल्म ‘समाधि’ से। फिल्म सुपरहिट रही। इसके पहले का रिकॉर्ड भी प्रकाश मेहरा का दमदार रहा। शशि कपूर के साथ वह 1969 में ही हिट फिल्म ‘हसीना मान जाएगी’ बना चुके थे और संजय खान व फिरोज खान को लेकर 1971 में उन्होंने बनाई सुपरहिट फिल्म ‘मेला’। ‘समाधि’ में प्रकाश मेहरा ने धर्मेंद्र के साथ आशा पारेख और जया भादुड़ी को लिया था। धर्मेंद्र उन दिनों तीन तीन शिफ्ट्स में फिल्में कर रहे थे और ‘जंजीर की शूटिंग थोड़ा रुककर शुरू करना चाहते थे। प्रकाश मेहरा के सामने समस्या ये थी कि सुनील दत्त और राखी वाली उनकी पिछली फिल्म ‘आन बान’ ज्यादा चली नहीं थी और उन्हें ‘जंजीर’ छह महीने के भीतर शूट करके किसी तरह रिलीज कर देनी थी ताकि उनका करियर धीमा न पड़े। पर धर्मेंद्र इसके लिए तैयार नहीं हुए। दरअसल धर्मेंद्र और प्रकाश मेहरा के बीच फिल्म ‘जंजीर’ को लेकर बात ‘समाधि’ के समय से ही चल रही थी। पं. मुखराम शर्मा की लिखी ‘समाधि’ की कहानी धर्मेंद्र को इतनी पसंद आई थी कि वह यह फिल्म करने के बदले ‘जंजीर’ में पैसा लगाने को भी तैयार हो गए थे।
प्राण ने की अमिताभ की सिफारिश
आपको पता ही होगा कि ये फिल्म देव आनंद से लेकर राजकुमार और दिलीप कुमार तक का चक्कर लगाकर अमिताभ बच्चन की झोली में गिरी। देव आनंद को फिल्म में अपने ऊपर चार पांच गाने चाहिए थे, प्रकाश मेहरा इसके लिए तैयार नहीं हुए। राजकुमार चाहते थे फिल्म मद्रास में शूट हो। प्रकाश मेहरा ने अपनी कहानी का शहर बदलने से इंकार कर दिया। दिलीप कुमार को तो फिल्म के हीरो का किरदार ही नहीं जमा। अमिताभ बच्चन की एक फिल्म उन्हीं दिनों रिलीज हुई थी ‘बॉम्बे टू गोवा’। फिल्म ‘ज़ंजीर’ में धर्मेंद्र, मुमताज के अलावा जो तीसरे कलाकार साइन हुए थे, वह थे प्राण। प्राण ने ही प्रकाश मेहरा को फिल्म का वो फाइटिंग सीन देखने की सलाह दी, जिसमें अमिताभ चुइंग गम चबाते हुए शत्रुघ्न सिन्हा की पिटाई करते हैं। प्रकाश मेहरा ने फिल्म देखी। अमिताभ बच्चन उन्हें जंच गए। इधर वह अमिताभ बच्चन को साइन करके आए, उधर मुमताज ने ये फिल्म ये कहते हुए छोड़ दी कि वह शादी करने की योजना बना रही हैं और शूटिंग के लिए तारीखें नहीं दे सकतीं। हालांकि उन्होंने फिल्म छोड़ी थी अमिताभ बच्चन के साथ अपनी एक और फिल्म ‘बंधे हाथ’ का हश्र देखकर। जब अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म करने को कोई हीरोइन तैयार नहीं हुई तब जया भादुड़ी की फिल्म में एंट्री हुई।
एंग्री यंगमैन के गुस्से की कड़ियां
फिल्म ‘ज़ंजीर’ में सलीम खान ने विजय खन्ना का किरदार ऐसा गढ़ा, गुस्सा जिसके पूरे जिस्म में सुलग रहा था। वह न किसी से बोलता था। न मुस्कुराता था और न ही ज्यादा किसी से मिलता जुलता था। दीवाली की रात एक हाथ में घोड़े वाला ब्रेसलेट पहने एक अपराधी के हाथों अपने माता पिता खो चुका विजय मनोवैज्ञानिक रूप से बचपन से ही भीतर भीतर घुटता रहता है। बड़ा होकर जब वह पुलिस की नौकरी करता है तो भी ज्यादा तीन पांच नहीं सुनता। जुए के अड्डे चलाने वाले शेर खान से उसका पंगा होता है तो वह वर्दी वाला ताना मार देता है। फिर विजय सादी वर्दी में शेर खान के इलाके में आता है और ये लड़ाई फिर दोस्ती में बदल जाती है। शेर खान गैरकानूनी काम छोड़ गैरज का काम करने लगता है और कहानी में ट्विस्ट आता है अमिताभ बच्चन के रिश्वतखोरी के आरोप में निलंबित होने से। इस संकट के समय माला उसकी मदद करती है। शेरखान भी साथ आता है। और, तेजा का खात्मा होता है।
असली डॉन से मिले अजीत
इस फिल्म में मशहूर अभिनेता अजीत ने तेजा का किरदार किया। हामिद अली खान के नाम से बचपन गुजारने वाले अजीत की परवरिश नवाबी अंदाज में हुई क्योंकि वालिद उनके हैदराबाद के निजाम के यहां काम करते थे। इस फिल्म के लिए जब अजीत विलेन बने तो उन्होंने प्रकाश मेहरा से पूछा कि क्या कभी उन्होंने असल जिंदगी के माफिया डॉन से मुलाकात की है। उन्होंने बताया कि असल जिंदगी के ये बड़े बड़े डॉन कभी चीखते चिल्लाते नहीं हैं। उनका सर्द लहजा ही काम कर जाता है। और, ऐसे ही इंदौर के एक डॉन का पता सलीम खान को भी मालूम था। सलीम और अजीत दोनों मिले। फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले अजीत ने लंबा वक्त इस शख्स के साथ गुजारा और उसके तौर तरीके सीखे। फिल्म में शेर खान का किरदार करने वाले प्राण ने भी इस फिल्म के लिए काफी कुछ तैयारियां कीं। फिल्म में उनका जो गेटअप है, वह उनका खुद का तैयार किया हुआ है। प्राण ने अपनी एक फिल्म का गेटअप कभी किसी दूसरी फिल्म में रिपीट नहीं किया। अगर लुक एक जैसा हुआ तो वह बोली बदल लेते थे। फिल्म ‘ज़ंजीर’ को बनाने में भी प्राण का ही सबसे बड़ा योगदान रहा। प्राण ने प्रकाश मेहरा का साथ नहीं छोड़ा ये इसके बावजूद कि इस फिल्म को छोड़ने पर मनोज कुमार ने उन्हें दो फिल्में देने का लालच भी दिया था। प्राण जुबान के पक्के इंसान आखिर तक रहे। (यहां प्राण के गाने वाला फोटो ही लगाएं)
https://www.youtube.com/watch?v=7KIcWTV3MME