Movie Review: हाउसफुल 4
अक्षय कुमार ने हिंदी सिनेमा में अपना एक खास ब्रांड बना रखा है। वह एक तरफ तो भारतीयता को बढ़ावा देने की फिल्में करके अपना नाम बनाते हैं और दूसरी तरफ हाउसफुल 4 जैसी ऊलजूलूल कहानियों पर बनी फिल्में करके पैसा। सिनेमा के इतिहास में उनका नाम सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाले हीरो के तौर पर दर्ज होगा या फिर देशभक्त हीरो के तौर पर, ये खुद अक्षय कुमार ही तय करेंगे लेकिन हाउसफुल 4 की रिलीज के दिन उनके धूम 4 में काम करने की खबर की जिस तरह से यशराज फिल्म्स ने हवा निकाली, उससे उनकी ब्रांडिंग पर बहुत खराब असर पड़ा है। और, ऐसी ही एक खराब फिल्म है हाउसफुल फोर।
Housefull 4 Movie Review: अक्षय कुमार की साख पर हाउसफुल 4 ने लगाया बट्टा, देखिए मिले इतने स्टार
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फिल्म हाउसफुल 4 की कहानी लंदन से शुरू होती है जहां हैरी, मैक्स और रॉय (अक्षय कुमार, बॉबी देओल और रितेश देशमुख) को वहां के डॉन के कुछ पैसे चुकाने हैं। इस मुसीबत से पार पाने के लिए वे तीनों अमीर घराने से ताल्लुख रखने वाली कीर्ति, नेहा और पूजा (कृति सेनन, कृति खरबंदा, पूजा हेगड़े) को अपने प्यार में फंसा लेते हैं और शादी करने की तैयारी शुरू कर देते हैं। सभी शादी करने के लिए भारत में सितमगढ़ आ जाते हैं। सितमगढ़ आकर हैरी की पिछले जन्म की की सभी यादें ताजा हो जाती हैं। उसे यह पता चलता है कि वह 600 साल पहले वह यहां का राजकुमार था जिसका नाम बाला होता है और सिर्फ वही नहीं बल्कि दूसरे सभी लोगों का भी यह पुर्नजन्म है।
नितेश कुमार ने भले छिछोरे फिल्म बनाई हो लेकिन असली छिछोरे के तौर पर हाउसफुल 4 में दिखते हैं अक्षय कुमार। घिसे पिटे चुटकुले और बेतरतीब के संवादों के साथ खास तरह की मौखिक मुद्राएं बनाकर वह दर्शकों को हंसाने की कोशिश करते हैं। और, कई बार स्क्रीन पर भोंडे लगते हैं। बॉबी देओल और रितेश देशमुख का अभिनय औसत है और कृति खरबंदा, पूजा हेगड़े को फिल्म में बस फ्रेम सुंदर दिखाने से ज्यादा कुछ काम मिला नहीं है। जॉनी लीवर जरूर रंगीला के किरदार में अपनी छाप छोड़ जाते हैं। फिल्म की खासियत ये है कि अक्षय कुमार से ज्यादा तालियां कैमियो रोल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी को मिलती हैं।
फरहाद सामजी ने फिल्म का निर्देशन किया है। मूल रूप से लेखक हैं लेकिन हाउसफुल 4 में उन्हें भी लेखकों की फौज लगानी प़ड़ी है। निर्देशन की समझ उनको अभी विकसित करनी होगी। वह हिंदी सिनेमा की स्वस्थ कॉमेडी फिल्मों की परंपरा में कहीं ठहरते नहीं हैं और न ही ऐसा कुछ करने की कोशिश करेत नजर आते हैं।
फिल्म हाउसफुल 4 तकनीकी रूप से काफी कमजोर फिल्म है। साल 1419 के दौर को दिखाने के लिए इस्तेमाल की गई सिनेमेटोग्राफी बहुत ही औसत है। फिल्म ना तो अपने म्यूजिक और ना ही स्पेशल इफेक्ट्स में अपनी छाप छोड़ पाई है। अमर उजाला के मूवी रिव्यू में फिल्म हाउसफुल 4 को मिलते हैं दो स्टार।
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