हिंदी सिनेमा में बॉबी देओल जैसी किस्मत कम सितारों की ही हुई है। पहली फिल्म बरसात ट्विंकल खन्ना के साथ, दूसरी फिल्म गुप्त काजोल और मनीषा कोइराला के साथ और तीसरी फिल्म और प्यार हो गया ऐश्वर्या राय के साथ। अजय सिंह देओल उर्फ बॉबी देओल का करियर अपने बड़े भाई सनी देओल से ज्यादा रफ्तार से टिकट खिड़की से बाहर निकला था, अगर सनी देओल को अपने छोटे भाई पर गलत समय पर बेइंतहा प्यार न आया होता और पूरा एक साल बॉबी ने फिल्म दिल्लगी के लिए न लगा दिया होता तो हिंदी सिनेमा के इतिहास में बॉबी देओल का करियरनामा लिखने का मजा ही कुछ और होता।
बाइस्कोप: दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के बाद काजोल का ये खतरनाक रूप देख चौंक गया था पूरा हिंदुस्तान
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साल 1997 हिंदी सिनेमा के लिए बहुत कामयाब साल रहा। इस साल यश चोपड़ा की फिल्म दिल तो पागल है ने 71 करोड़ रुपये कमाकर कमाई के रिकॉर्ड बना डाले। दूसरे नंबर पर रही जे पी दत्ता की फिल्म बॉर्डर, तीसरे पर इंद्र कुमार की इश्क, चौथे पर सुभाष घई की फिल्म परदेस और पांचवे नंबर पर निर्देशक राजीव राय की फिल्म गुप्त। दिल तो पागल है और परदेस की कामयाबी का राज शाहरुख खान बने, इश्क में अजय देवगन और आमिर खान दोनों थे, बॉर्डर में तो सितारों की पूरी फौज ही मौजूद थी, ऐसे में गुप्त में अपने करियर की दूसरी फिल्म में ही बॉबी देओल ने कमाल कर दिया। उनको साथ मिला काबिल अदाकाराओं काजोल व मनीषा कोइराला का और तीनों ने मिलकर ऐसा खेल परदे पर खेला कि जमाना भी बस गाता रह गया, गुप्त गुप्त ये है गुप्त गुप्त...!
फिल्म गुप्त की कहानी लिखते समय इसके लेखक निर्देशक राजीव राय के दिमाग में लीड रोल के लिए दो ही नाम थे या तो अक्षय कुमार या फिर सनी देओल। सनी देओल के साथ वह त्रिदेव और विश्वात्मा बना चुके थे और अक्षय कुमार के साथ फिल्म मोहरा। राजीव राय ने कहानी का जिक्र अक्षय कुमार से भी किया और सनी देओल से भी। सनी देओल ने ही राजीव को सलाह दी कि ये फिल्म राजीव को बॉबी देओल के साथ बनानी चाहिए क्योंकि उसकी पहली फिल्म बरसात तब बस रिलीज ही होने वाली थी और बॉबी के करियर की दूसरी फिल्म के लिए ये कहानी सनी को परफेक्ट लगी। राजीव राय को भी बात सही लगी और उन्होंने बॉबी देओल को साइन करके फिल्म की शूटिंग 1996 के शुरू में ही करने की तैयारी शुरू कर दी। फिल्म में सबसे पहले बॉबी के साथ साइन हुई हीरोइन थीं रवीना टंडन। रवीना के साथ बॉबी का फोटोशूट भी कराया गया जो फिल्म के टीजर के तौर पर कुछ जगहों पर छपा भी। लेकिन, तभी बरसात के आखिरी शेड्यूल में बॉबी देओल घुड़सवारी के दौरान अपनी टांग तुड़वा बैठे। फिल्म बरसात का पूरा प्रचार इसी के चलते बिना बॉबी देओल के हुआ और गुप्त की शूटिंग भी राजीव राय को टालनी पड़ी।
तारीखों के चक्कर में रवीना टंडन फिल्म गुप्त का हिस्सा नहीं रहीं। रवीना को फिल्म में वही रोल करना था जो बाद में मनीषा कोइराला के हिस्से आया। फिल्म में बॉबी देओल की मंगेतर शीतल चौधरी का ये किरदार मनीषा से पहले करिश्मा कपूर को भी ऑफर हुआ था लेकिन बात किन्हीं वजहों से बन नहीं सकी। बॉबी देओल और करिश्मा कपूर की जोड़ी इसके बाद पहली बार बनी थी निर्देशक कुंदन शाह की फिल्म हम तो मोहब्बत करेगा में। मनीषा कोइराला के पास भी राजीव राय पहले फिल्म में बॉबी देओल के निभाए किरदार साहिल सिन्हा की बचपन की दोस्त ईशा दीवान के रोल के लिए ही गए थे लेकिन मनीषा ने लिया शीतल चौधरी का किरदार और ईशा के रोल में इसके बाद आईं काजोल।
फिल्म गुप्त कहानी बहुत कुछ 1976 में प्रकाशित अंग्रेजी उपन्यास गुड चिल्ड्रेन डोंट किल के आसपास की कहानी है। इसी उपन्यास पर ऋषि कपूर के करियर की भी दूसरी फिल्म बनी थी, खेल खेल में। और, इसी उपन्यास की कहानी पर बनी थी अक्षय कुमार का करियर चमका देने वाली फिल्म खिलाड़ी। खिलाड़ी के पांच साल बाद जब गुप्त लिखी गई तो राजीव राय ने इसमें तमाम सारी बातें ऐसी डालीं जो उस वक्त के सिने दर्शकों को खूब भाईं। काजोल को फिल्म में जिस तरह पेश किया गया, वह पूरा आइडिया राजीव राय का ही था। शब्बीर बॉक्सवाला ने सह पटकथा लेखक के रूप में इस पूरे विचार को पूरी फिल्म में बुन दिया। काजोल ने जब ये फिल्म साइन की तो वह दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की कामयाबी में झूम रही थीं, लेकिन उन्होंने अपने करियर का ये बड़ा रिस्क लिया। और डीडीएलजे में फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड जीतने के बाद इस फिल्म में फिल्मफेयर का बेस्ट विलेन अवार्ड जीतकर उन्होंने अपनी काबिलियत की चमक चारों तरफ बिखेर दी। हिंदी सिनेमा की वह पहली हीरोइन हैं जिन्होंने 1992 में शुरु हुआ फिल्म फेयर बेस्ट परफॉर्मेंस इन ए निगेटिव रोल का ये अवार्ड जीता।
फिल्म फेयर बेस्ट परफॉर्मेंस इन ए निगेटिव रोल का अवार्ड काजोल के अलावा सिर्फ प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म एतराज के लिए जीता है। इस पुरस्कार के लिए नामित होने वाली अदाकाराओं में फिल्म प्यार तूने क्या किया के लिए उर्मिला मातोंडकर, फिल्म मकड़ी के लिए शबाना आजमी, फिल्म जिस्म के लिए बिपाशा बसु, फिल्म अरमान के लिए प्रीति जिंटा और फिल्म कलयुग के लिए अमृता सिंह शामिल हैं। काजोल से इस किरदार पर अब भी बात करो तो वह चहक उठती हैं। वह मानती हैं कि गुप्त में ईशा दीवान का किरदार करना उनके लिए एक बहुत बड़ी चुनौती भी थी और करियर के लिहाज से बहुत बड़ा खतरा भी, लेकिन वह कहती हैं कि लाइफ मे थोड़ा रिस्क तो लेना ही चाहिए। काजोल को कंफर्ट जोन से बाहर जाकर कुछ अलग करना शुरू से पसंद रहा है। हां, ये वह बिल्कुल नहीं मानतीं कि गुप्त जैसी फिल्म का भी कोई सीक्वल बन सकता है। वह तो यहां तक कहती हैं कि उन्होंने जितनी भी फिल्में अब तक अपने करियर में की हैं, उनमें से किसी का ना तो रीमेक होना चाहिए और न ही उसकी सीक्वेल बननी चाहिए।
काजोल को विलेन बनाकर राजीव राय ने जो जुआ खेला, उसमें वह जीत गए। राजीव ने और भी तमाम एक्सपरीमेंट इस फिल्म में किए हैं। जेम्स बॉन्ड की फिल्मों की शुरूआत की तरह ही फिल्म गुप्त के ओपनिंग क्रेडिट्स डिजाइन उन्होंने बनवाए। लोगों को ये पसंद भी आए। महिलाओं की नाचती छायाओं के ऊपर उभरते कलाकारों और तकनीशियनों के नामों ने फिल्म का मूड सेट करने में काफी मदद की। राजीव ने फिल्म बनाई ही वयस्क दर्शकों को ध्यान में रखकर थी तो थोड़ा बहुत ओवरबोर्ड जाने में भी राजीव ने यहां परहेज नहीं किया। राजीव राय की असल जीत थी फिल्म के सहायक कलाकारों के लिए काबिल अभिनेताओं की पूरी लाइन लगा देना। फिल्म में प्रिया तेंदुलकर के अलावा राज बब्बर से लेकर परेश रावल, शरत सक्सेना, प्रेम चोपड़ा, रजा मुराद, सदाशिव अमरापुरकर, ओम पुरी, कुलभूषण खरबंदा, दलीप ताहिल और मुकेश ऋषि के अलावा तमाम कलाकार फिल्म में ऐसे रहे जिन्होंने अपने अपने छोटे लेकिन असरदार किरदारों में जान डालने में कसर नहीं छोड़ी।
फिल्म गुप्त का एक और विनिंग प्वाइंट रहा इसका म्यूजिक। संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंदजी की विरासत संभालने वाले विजू शाह (कल्याणजी के बेटे) ने राजीव राय की पिछली तीनों फिल्में विश्वात्मा, त्रिदेव और मोहरा की तरह इस फिल्म का भी संगीत तैयार किया। राजीव राय और विजू शाह ने जोड़ी बनाकर एक साथ लगातार चार हिट फिल्में देने का हिंदी सिनेमा में ये अलहदा रिकॉर्ड बनाया। उन दिनों फिल्मों के गानों के कैसेट की पायरेसी खूब होती थी, इसके बावजूद गुप्त के गानों के कैसेट खूब बिके। विजू शाह को फिल्म के बैकग्राउंड के लिए फिल्मफेयर का पुरस्कार भी मिला। फिल्म के टाइटल सॉन्ग के अलावा उदित नारायण का गाया और बॉबी देओल पर फिल्माया गया ये गाना भी खूब हिट हुआ।
फिल्म गुप्त के लिए काजोल ने बेस्ट विलेन का फिल्फेयर अवार्ड जीता। वीजू शाह ने बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर का अवार्ड जीता और राजीव राय को मिला था फिल्मफेयर बेस्ट एडिटिंग अवॉर्ड। फिल्म को पांच और कैटेगरीज में भी उस साल नॉमीनेशन मिले थे। देसी फिल्मों की कामयाबी के दौर में राजीव राय की इस फिल्म की कामयाबी का राज रहा इसकी किसी हॉलीवुड फिल्म सी मेकिंग। राजीव राय ने काजोल के साथ जुड़ा सस्पेंस अंत तक बचा कर रखा और दोनों हीरोइनों के किरदार इतने संतुलन के साथ फिल्माए कि आखिर तक लोगों को समझ नहीं आया कि अपराधी कौन है? बॉबी देओल ने दूसरा ब्याह रचाने वाली मां के बेटे के किरदार में बहुत ही बढ़िया काम किया और उनके चेहरे के भावों को तमाम फिल्ममेकर्स ने नोटिस किया। गुप्त के बाद बॉबी देओल के पास हर हफ्ते आठ दस नई फिल्मों के ऑफर आते थे लेकिन बॉबी ने गिनती की ही फिल्में इनमें से छांटी। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
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