ये किस्सा खुद शबाना आजमी का बताया हुआ है। शबाना आजमी तब फिल्मों में नहीं आई थीं और कपूर खानदान के तब तक के सबसे हैंडसम हीरो शशि कपूर की दीवानी हुआ करती थीं। जेबखर्च से मिले पैसों से शबाना उनके फोटो पोस्टकार्ड खरीदती और जब भी शशि कपूर से सामना होता तो उन्हीं फोटो पर उनके ऑटोग्राफ भी लेतीं। रामचरित मानस की चौपाई ‘जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू।।’ को चरितार्थ करते हुए एक दिन ऐसा भी हुआ जब शबाना आजमी फिल्म फकीरा में शशि कपूर की हीरोइन बन गईं। पहला सीन जो उनका शशि कपूर के साथ शूट होना था। वह एक गाना था, ‘दिल में तुझे बिठाके, कर लूंगी मैं बंद आंखें, पूजा करूंगी तेरी, हो के रहूंगी तेरी....।’
बाइस्कोप: शशि कपूर की शागिर्द शबाना की इसलिए हुई फिल्म कलयुग से छुट्टी, नसीर ने ईगो में ना कर दी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तो ऐसे थे राज कपूर और शम्मी कपूर के छोटे भाई बलबीर राज कपूर यानी शशि कपूर। शशिराज उनका नाम अपने पिता की कंपनी पृथ्वी थिएटर्स में काम करते करते पड़ा। शशि कपूर हिंदी सिनेमा के पहले सितारे हैं जिन्होंने हॉलीवुड में लीड एक्टर के तौर पर काम करना शुरू किया। और, वह पहले ऐसे अभिनेता भी रहे जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई रियल इस्टेट या सोने चांदी में निवेश करने की बजाय वहीं लगाई, जहां से उन्हें ये दौलत मिली थी यानी थिएटर और सिनेमा। शशि कपूर ने फिल्मवाला नाम की एक प्रोडक्शन कंपनी खोली और इस कंपनी के बैनर तले पहली फिल्म बनाई जुनून। जुनून के निर्देशक थे श्याम बेनेगल और इसमें शशि कपूर के साथ उनकी पत्नी जेनिफर केंडल व शबाना आजमी दोनों ने अभिनय किया। शशि कपूर को शबाना आजमी अपना उस्ताद मानती रही हैं। ये अलग बात है कि इन दोनों की करीबियों को लेकर जेनिफर की भावनाएं कभी सहज नहीं रहीं।
24 जुलाई 1981 को रिलीज हुई कलयुग भी श्याम बेनेगेल ने ही निर्देशित की। महाभारत जैसी कहानी पर बनी खून और भरोसे के रिश्तों के खून की कहानी कलयुग के लिए भी श्याम बेनेगल सबसे पहले शबाना आजमी के पास ही फिल्म की हीरोइन बनने का ऑफर लेकर गए थे। शबाना आजमी का नाम फिल्म कलयुग के लिए चला तो शशि कपूर को इसका घर में काफी विरोध झेलना पड़ा। बताते हैं कि उनकी पत्नी जेनिफर कतई नहीं चाहती थीं कि शबाना फिल्म कलयुग में काम करें। बात श्याम बेनेगल तक भी पहुंची। उन्होंने ये बात शशि कपूर के साथ भी साझा की। शशि कपूर इस मामले में बिल्कुल अपने बड़े भाई राज कपूर पर गए। उन्होंने घर की इज्जत हमेशा रखी और जब भी जरूरत पड़ी इसे साबित भी किया कि उनके लिए परिवार पहले है।
जेनिफर की बात सुनने के बाद शशि कपूर खुद रेखा के पास गए, उन्हें सारी बात बताई और फिल्म कलयुग का ऑफर उन्हें दिया। ये वो दौर था जब रेखा और अमिताभ की कथित प्रेम कहानी फिल्म पत्रिकाओं की सुर्खियों से ओझल होने लगी थी। रेखा को ये भी समझ आने लगा था कि खूबसूरत जैसी फिल्में ही उनकी हिंदी सिनेमा में पारी लंबी कर सकती हैं। उन्होंने तुरंत शशि कपूर का ऑफर स्वीकार कर लिया। शशि कपूर अपनी पत्नी जेनिफर से बहुत प्यार करते थे। जब जेनिफर का निधन हुआ तो शशि कपूर गोवा में एक नाव भाड़े पर लेकर बीच समंदर में चले गए थे और वहां घंटों बुक्का फाड़ कर रोते रहे थे।
फिल्म कलयुग की कहानी रामचंद और भीष्मचंद नाम के दो कारोबारी भाइयों की कहानी है। भीष्मचंद अविवाहित है और उसने रामचंद के निधन के बाद उसके दोनों बेटों खूबचंद और पूरनचंद को पाल पोसकर बड़ा किया। खूबचंद के बेटों धनराज और संदीपराज की पूरनचंद के बेटो धरमराज, बलराज और भरतराज के बीच अदावत चलती रहती है। कहानी में एक निरापद पात्र है करण। कहानी के मुताबिक वह अनाथ है जिसे भीष्मचंद ने पाला है। दोनों परिवारों के बीच चलती अदावत तब खूनी जंग में बदल जाती है जब धनराज के गुर्गों के हाथों बलराज के युवा बेटे का कत्ल हो जाता है। जवाबी हमले में करण मारा जाता है। और, इसके बाद जो होता है वह कलयुग की महाभारत से कम नहीं होता।
श्याम बेनेगल ने फिल्म कलयुग के लिए बेहतरीन तकनीकी टीम काम पर लगाई थी। गोविंद निहलानी उनके सिनेमैटोग्राफर थे और फिल्म कलयुग का संगीत तैयार किया था वनराज भाटिया ने। फिल्म की कहानी पर महीनों काम चला और इसे लिखने में श्याम बेनेगेल ने मशहूर अभिनेता और नाट्यकार गिरीश कर्नाड के अलावा हिंदी रंगमंच के यशस्वी युगधर्मी सत्यदेव दुबे की भी मदद ली। कला की इस त्रिमूर्ति ने फिल्म कलयुग को भव्यता का एक अलग स्तर तो प्रदान किया ही, इन तीनों ने मिलकर फिल्म कलयुग के किरदार इतने मजबूती से गढ़ दिए कि उनके चरित्र की परतों को उधेड़ने में सिनेमा के दर्शक परेशान हो गए। ये सही है कि फिल्म के किरदारों के कॉम्प्लेक्स होने से उनको हकीकत के करीब रखने में मदद मिलती है लेकिन फिल्म कलयुग जिस परिवेश और कलेवर में रची गई, उसके रंग उस वक्त के हिंदी फिल्म दर्शकों की समझ से बाहर थे। हालांकि, इस सबके बावजूद कलयुग को फिल्मफेयर का बेस्ट फिल्म अवार्ड मिला।
फिल्म कलयुग में अभिनेत्री दीना पाठक की बेटी और अभिनेत्री रत्ना पाठक की छोटी बहन सुप्रिया पाठक का डेब्यू भी हुआ। इस फिल्म की रिलीज के अगले ही साल रत्ना और अभिनेता नसीरूद्दीन शाह की शादी हुई थी। और दिलचस्प बात ये है कि फिल्म कलयुग में काम करने का इसके निर्देशक श्याम बेनेगल का ऑफर नसीरूद्दीन शाह ने ठुकरा दिया था। नसीर के पास तब तारीखों का टोटा था और अपनी इस धृष्टता का पश्चाताप करने के लिए नसीर ने तय किया कि वह श्याम बेनेगल की फिल्म मंडी में बिना कोई सवाल जवाब किए काम करेंगे। कहा ये भी जाता है कि नसीर ने ये फिल्म सिर्फ इसलिए नहीं की क्योंकि ये ऑफर उन्हें फिल्म के निर्माता शशि कपूर की तरफ से नहीं आया।
उधर शशि कपूर फिल्म कलयुग में अपना वाला रोल बंगाल के मशहूर अभिनेता सौमित्र चटर्जी को ऑफर कर आए थे, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इसे करने में अमसर्थता जाहिर की और आखिर में ये रोल शशि कपूर को ही करना पड़ा। फिल्म की एक और मजेदार बात ये है कि फिल्म में राज बब्बर का किरदार बड़े भाई का है लेकिन जिन दो कलाकारों कुलभूषण खरबंदा और अनंत नाग ने उनके छोटे भाइयों के रोल किए, वे दोनों उनसे उम्र में बड़े हैं।
फिल्म में सुषमा सेठ, आकाश खुराना, रीमा लागू, ए के हंगल और विक्टर बनर्जी ने अहम किरदार निभाए। आपको हैरानी ये जानकर भी होगी कि फिल्म कलयुग में रेखा के बेटे का रोल करने वाला बाल कलाकार कोई और नहीं बल्कि उर्मिला मातोंडकर थीं। उर्मिला मातोंडकर, रेखा और विक्टर की तिकड़ी साल 2003 में फिर एक साथ परदे पर निर्माता निर्देशक राम गोपाल वर्मा की फिल्म भूत में नजर आई थी। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
पढ़ें: बाइस्कोप: जब अमिताभ बच्चन को पड़ा था झन्नाटेदार चांटा और ताउम्र की दोस्ती हुई उनकी विनोद खन्ना से