आज का बाइस्कोप लिखने से पहले मैंने फेसबुक पर एक छोटा सा सर्वे किया। पिछली सदी के आठवें, नौवें और आखिरी दशक की तीन फिल्मों की रिलीज की तारीखों का जिक्र 22 जुलाई के तौर पर मिलता है। जानना मैंने ये चाहा कि इन तीन फिल्मों में से किस फिल्म का बाइस्कोप लोग पढ़ना ज्यादा पसंद करेंगे। 22 जुलाई को इन तीन दशकों में रिलीज हुई फिल्में रहीं धर्मेंद्र, फिरोज खान और सायरा बानो की फिल्म इंटरनेशनल क्रुक, जिसमें धर्मेंद्र के किरदार के दो चेहरे हैं एक शेखर और दूसरा टाइगर का। दूसरी फिल्म है गोविंदा और किमी काटकर की फिल्म तोहफा मोहब्बत का और तीसरी फिल्म रही निर्देशक मेहुल कुमार की फिल्म क्रांतिवीर। सबसे ज्यादा जिस फिल्म के बारे में लोगों ने पढ़ने की मंशा जताई, वो फिल्म है क्रांतिवीर।
बाइस्कोप: राम तेरी गंगा मैली के इस राइटर ने दिखाया क्रांतिवीर में कमाल, नाना को दिलाया नेशनल अवॉर्ड
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1987 में रिलीज हुई राजकुमार और गोविंदा की फिल्म मरते दम तक मेहुल कुमार की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म रही और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर तभी देखा जब अमिताभ बच्चन की राजनीतिक पारी के बाद फिल्मों में वापसी वाली फिल्म मृत्युदाता फ्लॉप हो गई। राजकुमार के साथ मेहुल ने ही नाना पाटेकर की जोड़ी फिल्म तिरंगा में बनाई और फिर नाना पाटेकर के साथ अमिताभ बच्चन की जोड़ी बनाई फिल्म कोहराम में। आज का बाइस्कोप है मेहुल कुमार निर्देशित फिल्म क्रांतिवीर पर जिसके वह निर्माता भी रहे।
क्रांतिवीर अपने समय के लिहाज से एक बेहद बेधड़क फिल्म मानी जाती है। ये वह समय था जब देश में हर रोज किसी न किसी भ्रष्टाचार की खबर अखबारों में आ ही जाती थी। बाबरी मस्जिद का मसला भी सुर्खियों में चल ही रहा था। मेहुल ने एक बार बातचीत में बताया था कि कैसे उन्होंने बाबरी मस्जिद के बाद देश में बने तनाव के माहौल में कॉरपोरेट, नेता और अपराधियों का मायाजाल जोड़कर क्रांतिवीर का विचार तैयार किया था। फिल्म में रोमांस का एक ट्रैक वह शुरू से रखना ही चाहते थे। क्रांतिवीर जिस साल रिलीज हुई उसी साल सलमान खान और माधुरी दीक्षित की फिल्म हम आपके हैं कौन ने कमाई का नया रिकॉर्ड बनाते हुए सौ करोड़ी क्लब की शुरुआत की थी, दूसरे नंबर पर उस साल कमाई के मामले में रही थी अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन व पूनम झावर की फिल्म मोहरा।
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और, तीसरे नंबर पर ताबड़तोड़ एंट्री मारी थी नाना पाटेकर की फिल्म क्रांतिवीर ने। तब के सुपरस्टार गोविंदा की फिल्म राजा बाबू का नंबर इसके बाद आता है। क्रांतिवीर इतनी बड़ी हिट फिल्म हुई थी कि पूरे देश में इसका हल्ला हो गया। ये फिल्म अगले ही साल तेलुगू में बनी पुण्यभूमि ना देशम के नाम से। फिल्म के हीरो थे मोहन बाबू। और इसी की कहानी को साल 2007 में उपेंद्र ने परोडी के नाम से कन्नड़ में बनाया। 10 साल पहले मेहुल कुमार क्रांतिवीर का सीक्वेल भी बना चुके हैं, बतौर निर्देशक ये सीक्वेल ही उनके करियर की आखिरी फिल्म भी रही।
मेहुल कुमार की फिल्म क्रांतिवीर लोग देखने गए तो सिर्फ एक वजह के चलते और वह वजह थी नाना पाटेकर। नाना पाटेकर को पहला नेशनल फिल्म अवार्ड 1990 में मिला था फिल्म परिंदा के लिए। ये पुरस्कार था सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का। 1995 में फिल्म क्रांतिवीर के लिए उन्हे बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवार्ड मिला और इसके दो साल बाद फिल्म अग्निसाक्षी ने उन्हें एक और नेशनल फिल्म अवार्ड दिलाया, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का। नाना पाटेकर का करियर ग्राफ भी खास तौर से प्रहार से लेकर क्रांतिवीर तक का ही सबसे खास है। इसके बाद वह अपहरण और राजनीति जैसी फिल्मों में चमके, लेकिन असली दमक नाना पाटेकर की वही सात आठ साल ही रही।
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क्रांतिवीर की जब भी चर्चा होती है, इसके संवाद जरूर सामने आ जाते हैं। नाना पाटेकर ने इन संवादों को बोला भी एक खास व्यंगात्मक लहजे में बहुत खूब है। फिल्म में इन संवादों की बानगी कुछ इस तरह है:
“आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने”
“अपने खुद के देश में एक सुई नहीं बना सकते... और हमारे देश तोड़ने का सपना देखते हैं”
“ये मुसलमान का खून ये हिन्दू का खून.... बता इस में मुसलमान का कौन सा हिन्दू का कौनसा बता!”
“कुत्ते की तरह जीने की आदत पड़ी है सबको”
फिल्म का क्लाइमेक्स सबसे जबर्दस्त रहा। जिसके लिए कोई आठ सौ जूनियर कलाकारों को इकट्ठा किया गया था औऱ पहली बार जब ये शूट प्लान हुआ तो नाना पाटेकर बीमार पड़ गए। मेहुल का काफी पैसा इस दिन की शूटिंग के लिए लग चुका था। वह मुंह लटकाए नाना के पास बैठे थे तो नाना ने बोला, नुकसान नहीं होने दूंगा तुम्हारा। अगला शेड्यूल बताओ। वन टेक में शूट होगा ये सीन। लिख के ले लो। आमतौर पर चर्चा यही रही है कि नाना पाटेकर ने क्लाइमेक्स में जो कुछ बोला सब अपने मन से बोलते चले गए अपनी रौ में।
लेकिन, नाना पाटेकर को जो जानते हैं, वे ये भी जानते हैं कि वह निर्देशक के कलाकार हैं। बिना निर्देशक से चर्चा किए वह कुछ भी नहीं जोड़ते। फिल्म के क्लाइमेक्स की तारीख तय होने के बाद शूटिंग से हफ्ता भर पहले से नाना पाटेकर ने इस सीन की तैयारियां शुरू कीं और के के सिंह की लिखी हर लाइन वह घर से याद करके सेट पर पहुंचे। मेहुल कुमार ने ये सीन चार कैमरे लगाकर शूट किया था।
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फिल्म क्रांतिवीर की बात छिड़ने पर चाहें नाना पाटेकर हों या फिर मेहुल कुमार फिल्म के राइटर का नाम कम ही लेते हैं। दोनों इसकी कामयाबी को अपने अपने खाते में डालते रहे हैं लेकिन सच यही है कि क्रांतिवीर की कामयाबी में बड़ा हाथ इसकी पटकथा और इसके संवादों का भी है। नाना पाटेकर का बड़बड़ करने वाला किरदार मेहुल ने भले अपने एक दोस्त के तौर तरीकों के हिसाब से गढ़ा हो लेकिन ये प्रताप तिलक नाम का ये सनकी किस्म का किरदार जो भी बोलता है पब्लिक उसे बहुत ध्यान से सुनती है। और इस किरदार के लिए जो भी लिखा गया वह के के सिंह की कलम से ही निकला।
हिंदी सिनेमा की क्रेडिट्स पर नजर रखने वालों ने के के सिंह का नाम और भी तमाम फिल्मों में देखा होगा। राज कपूर ने फिल्म प्रेम रोग में उन्हें संवाद लिखने का पहला मौका दिया था फिर वह उनके साथ राम तेरी गंगा मैली में भी जुड़े रहे। बाद में त्रिदेव से लेकर तिरंगा और क्रांतिवीर तक के के सिंह की कलम से खूब दमदार संवाद निकले। अक्षय कुमार के वह फेवरिट राइटर रहे हैं। उनकी फिल्मों जानवर, एक रिश्ता और मेरे जीवन साथी के संवाद के के सिंह ने ही लिखे।
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