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बाइस्कोप: अपने पिता से ताउम्र इसलिए नाराज रहे राम तेरी गंगा मैली के हीरो राजीव कपूर, 10 रोचक किस्से

Sat, 25 Jul 2020 08:53 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 25 Jul 2020 08:53 PM IST
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Ram Teri Ganga Maili this day that year series by pankaj shukla 25 july 1985 bioscope mandakini
राम तेरी गंगा मैली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

एक राधा, एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा


अन्तर क्या दोनों की चाह में बोलो
इक प्रेम दीवानी, इक दरस दीवानी..


साधारण से बोल। कम से कम साजिंदों के साथ बना संगीत। लेकिन, स्वर लता मंगेशकर का। और, इस आवाज ने ही इस गीत में असली कमाल कर दिया। रवींद्र जैन हिंदी सिनेमा के उन संगीतकारों में शुमार रहे हैं, जिनके बनाए गीत हिंदी सिनेमा के सौ सर्वश्रेष्ठ कालजयी गीतों में गिने जाते हैं। ये जानकर हैरानी होती है कि जो संगीतकार फिल्म ‘फकीरा’ का गाना ‘दिल में तुझे बिठाके’, फिल्म ‘अंखियों के झरोखों से’ का शीर्षक गीत और फिल्म ‘चोर मचाए शोर’ का ‘घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं’, कंपोज कर चुका हो, उसका जिक्र हिंदी सिनेमा संगीत में शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और आर डी बर्मन के साथ कम ही होता है। ऊपर जिस गीत की लाइनें मैंने यहां लिखी हैं, वे रवींद्र जैन की हैं। इन्हीं को गाते उन्हें राज कपूर ने सुना फिल्म ‘प्रेम रोग’ के बाद एक फंक्शन में और फिर उसी दिन ये गाना राज कपूर की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक ‘राम तेरी गंगा मैली’ का गाना हो गया। राज कपूर ने रवींद्र जैन को वहीं साइन कर लिया।

फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ अपने समय की एक सामाजिक, राजनीतिक और सामयिक सिनेमाई टिप्पणी है। फिल्म की नायिका गंगा के बहाने राज कपूर ने गंगा नदी का गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक का सफर दिखाया है और दिखाया कि कैसे मनुष्य के चरित्र के साथ साथ गंगा भी मैली होती जाती है। ‘राम तेरी गंगा मैली’ जब रिलीज हुई तब राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बने ज्यादा समय नहीं बीता था। राज कपूर की अपनी सिनेमा में ये खासियत रही है कि वह उस समय के सामाजिक चलन को सिनेमा के प्रतिबिंबों के सहारे बहुत ही सलीके से दर्शक के सामने रखते हैं और उसमें अपना एक मत भी जाहिर करते हैं। फिल्म को दो बार सेंसर किया गया। पहले ये फिल्म यू सर्टीफिकेट के साथ ही रिलीज हो गई थी, बाद में इसे दोबारा सेंसर करके यूए सर्टिफिकेट दिया गया है। वजह थी फिल्म का ये गाना और फिल्म में एक जगह मंदाकिनी का एक बच्चे को दूध पिलाने वाला सीन।

Ram Teri Ganga Maili this day that year series by pankaj shukla 25 july 1985 bioscope mandakini
राम तेरी गंगा मैली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

‘राम तेरी गंगा मैली’ के बाइस्कोप का प्रारंभ इसके संगीत की चर्चा के साथ करने का भी एक कारण है। और वह ये कि इस फिल्म के लिए रवींद्र जैन ने जो गीत और उनका संगीत तैयार किया, उन्हें समझकर एक बार तो लता मंगेशकर का भी माथा ठनक गया। खुद लता मंगेशकर कहती हैं, “दद्दू (रवींद्र जैन को लोग इसी नाम से बुलाते थे) के साथ मेरा पहला गाना फिल्म ‘सौदागर’ के लिए था। इसमें मैंने गाना गाया था ‘तेरा मेरा साथ रहे’। मुझे लगा था कि ये गाना बहुत ही ऊंचे सुर में है। ऐसा ही गाना शंकर जयकिशन ने मेरे लिए फिल्म ‘आरजू’ में तैयार किया था, ‘अजी रूठ कर अब कहां जाइएगा...।’ मुझे तब लगता था कि ये गाने मेरी गायन क्षमता की परीक्षा लेने के लिए जानबूझकर तैयार किए जाते हैं। मैं विरोध भी करती लेकिन दद्दू कहते हो जाएगा। तो ऐसा था हमारा और दद्दू का रिश्ता।” यहां ये उल्लेख भी जरूरी है कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ के बाद राज कपूर ने फिल्म ‘हिना’ के लिए भी रवींद्र जैन को ही संगीतकार नियुक्त किया था और इस फिल्म के गीत ‘चिट्ठिए’ का कंपोजीशन ऐसा था कि सुरेश वाडेकर जैसे गुणी गायक सिर्फ लता मंगेशकर को ये गाना रिकॉर्ड करते देखने पहुंचे थे।



राज कपूर हिंदी सिनेमा के महान फिल्मकार रहे हैं। जमाना उन्हें शो मैन के नाम से जानता है। लेकिन, उनके बेटे उनसे ना जाने क्यों अक्सर रूठे ही मिले। ऋषि कपूर ने तो अपनी किताब तक में उनके और नरगिस के अफसानों का जिक्र किया है। रणधीर कपूर ने अपने पिता का स्वर्गवास होते ही उनकी शुरू की गई फिल्म ‘हिना’ में तमाम फेरबदल कर दिए थे और राजीव कपूर…। फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में सारी लाइम लाइट फिल्म की हीरोइन मंदाकिनी के खाते चली जाने की वजह से राजीव कपूर अपने पिता से ताउम्र चिढ़े रहे। वह चाहते थे कि उनके पिता उनको बतौर हीरो लेकर एक और शानदार फिल्म बनाएं और ऐसी फिल्म जिसमें पूरा फोकस उन पर ही रहे लेकिन काबिल इंसान जिद्दी भी होता है। राज कपूर ने जिद में ही राजीव कपूर के साथ फिर दूसरी फिल्म नहीं बनाई।

Ram Teri Ganga Maili this day that year series by pankaj shukla 25 july 1985 bioscope mandakini
राम तेरी गंगा मैली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में अगर शशि कपूर की बेटी संजना लॉन्च हो गई होतीं तो वह कपूर खानदान में फिल्मों में काम करने वाली पहली बेटी होतीं। लेकिन संजना को अभिनय करने में रुचि ही नहीं थी। राज कपूर ने इस बारे में अपने छोटे भाई शशि कपूर से बात भी की लेकिन शशि ने अपनी किसी संतान पर कभी अपनी मर्जी नहीं थोपी। संजना के बाद डिंपल कपाड़िया का भी इस फिल्म के लिए स्क्रीन टेस्ट हुआ लेकिन वह फिल्म के किरदार गंगा जैसी मासूम नहीं दिखी परदे पर और तब इस फिल्म में एंट्री हुई एक ऐसी लड़की की, जिसका भूत, भविष्य और वर्तमान सब सरहद पार बैठे मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम से जुड़ा था। दाऊद के साथ मंदाकिनी के पहले फोटो फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ की रिलीज के 10 साल बाद सार्वजनिक हुए लेकिन मुंबई में कहा यही जाता है कि मंदाकिनी को इस फिल्म में मौका ही दाऊद के कहने पर मिला।

जैसा कि फिल्म का नाम है और फिल्म में मंदाकिनी का जो किरदार है तो पूरी फिल्म उनके निभाए किरदार गंगा के ही आजू बाजू बहती चलती है। शहर से पहाड़ों पर आए शहरी बाबू के बच्चे की मां बन गई गंगा, अपने बच्चे के भविष्य के लिए उसे तलाशने निकलती है। गंगोत्री से कोलकाता जाने के रास्ते उसके साथ अत्याचार, व्यभिचार और भ्रष्टाचार सब होता है। वह अपने पति के सामने नाचनेवाली के तौर पर तब पेश होती है जब वह कहानी की दूसरी नायिका के साथ विवाह रचाने जा रहा है। गनीमत ये है कि 1985 तक देश के युवा में अपनी गलती मान लेने की हिम्मत बाकी थी। नायक अपनी गलती मानता है और अपने परिवार के तमाम दबाव के बावजूद दूसरी शादी से इंकार करके अपनी पहली पत्नी और बच्चे के साथ रहने का फैसला कर लेता है।

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Ram Teri Ganga Maili this day that year series by pankaj shukla 25 july 1985 bioscope mandakini
राम तेरी गंगा मैली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

राज कपूर की फिल्मों की सिनेमैटोग्राफी पर अगर आपने कभी गौर किया हो तो आपको इसमें एक सिलसिला सा बनता चलता दिखता है बिल्कुल जिंदगी की धूप छांव जैसा। प्रकाश के जरिए दृश्यों में भाव भरने का ये काम फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में भी राज कपूर के पसंदीदा सिनेमैटोग्राफर राधू करमाकर ने खूब किया। फिल्म ‘मिलन’ में उनके काम को देखकर राज कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म ‘आवारा’ में सबसे पहली बार काम दिया था। एक निर्देशक और एक सिनेमैटोग्राफर का ये एक ऐसा रिश्ता इस फिल्म में बना कि राज कपूर की आखिरी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ तक साथ चला। राधू करमाकर को राज कपूर ने अपने प्रोडक्शन हाउस की फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ के निर्देशन का भी मौका दिया। और, इसी फिल्म के दौरान राज कपूर को पहली बार फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ का विचार भी आया। ये बात है सन 1959 की और फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ रिलीज हुई 1985 में।

फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के गाने इसके संगीतकार रवींद्र जैन ने खुद ही लिखे लेकिन फिल्म का एक हिट गाना ‘सुन साहिबा सुन’ प्यार की धुन का क्रेडिट फिल्म में गीतकार हसरत जयपुरी को दिया गया है। इस गाने की भी तकदीर फिल्म की तरह ही निराली है। राज कपूर जिन दिनों आवारा और श्री 420 जैसी फिल्में बना रहे थे, उन्हीं दिनों उन्होंने एक फिल्म आर के स्टूडियोज के बैनर तले ही शुरू की थी, अजंता। इस फिल्म के लिए काबिल गीतकार हसरत जयपुरी ने ये गाना लिखा था और इसे शंकर जय किशन ने कंपोज भी कर लिया था। ये गाना 30 साल तक राज कपूर के जेहन में बसा रहा और जब ‘राम तेरी गंगा मैली’ को बनाने का समय आया तो ये गाना राज कपूर ने इस फिल्म में बिल्कुल परफेक्ट सिचुएशन पर इस्तेमाल कर लिया।

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राम तेरी गंगा मैली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ को लेकर भी तमाम किस्से फिल्म के निर्माण से लेकर अब तक सुनने को मिलते रहते हैं। इस फिल्म की हीरोइन को लेकर राजीव कपूर और राज कपूर के बीच मनमुटाव का किस्सा मैं बता ही चुका हूं। ऋषि कपूर से भी मंदाकिनी के पिता का पंगा हुआ। ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सक्सेस पार्टी के दौरान दोनों में किसी बात को लेकर भ्रम पैदा हो गया और बातचीत हाथापाई तक पहुंच गई थी। बाद में, ऋषि कपूर ने बड़प्पन दिखाते हुए अपनी गलती भी मानी थी और मंदाकिनी के पिता से माफी भी मांग ली थी।

फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ की एक खास बात यहां और बतानी जरूरी है और वो ये कि राज कपूर ने अपनी तमाम दूसरी फिल्मों की तरह इस फिल्म के भी दो क्लाइमेक्स शूट किए थे, एक सुखांत और एक दुखांत। राज कपूर अपनी फिल्म को एडिट करने के बाद दोनों क्लाइमेक्स इसमें लगाकर देखते और फिर तय करते थे कि फाइनल कॉपी में किसे रखना है। अपनी सुपरहिट फिल्म बॉबी में भी राज कपूर ने ऐसा ही किया था।

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