किसी भी फिल्म या टीवी धारावाहिक का जन्म उस बीज से होता है, जिसे अंग्रेजी में कॉन्सेप्ट यानी कथावस्तु कहते हैं। इन दिनों दूरदर्शन भारती पर फिर से प्रसारित हो रहे मशहूर धारावाहिक महाभारत की कथावस्तु रचने वाले पंडित नरेंद्र शर्मा इस धारावाहिक के निर्माता व निर्देशक बलदेव राज चोपड़ा के बहुत घनिष्ठ रहे। पंडित नरेंद्र शर्मा की बेटी लावण्या इन दिनों अपने बेटे के साथ अमेरिका में हैं। अमर उजाला के लिए पंकज शुक्ल साथ उन्होंने साझा किए महाभारत के निर्माण के समय के कुछ एक्सक्लूसिव संस्मरण।
EXCLUSIVE: हिंदी के इस कवि ने राही मासूम रजा से लिखवाई महाभारत, अमेरिका में रह रही बेटी ने सुनाई पूरी दास्तां
लावण्या कहती हैं, “दूरदर्शन ने जब महाभारत पर धारावाहिक बनाने का कार्य बी आर चोपड़ा को सौंपा तो सबसे पहले टीम तैयार करने का कार्य आरम्भ हुआ। कई महत्त्वपूर्ण बातें एक तार में बंधकर सुचारू रूप से आगे बढ़ सकें इसके लिए किसी टीम लीडर की जरूरत उनको मसहूस हुई। चोपड़ा जी ने इस बारे में खोजबीन की तो वह जिससे भी बात करते उन्हें एक ही सुझाव मिलता कि बंबई में पंडित नरेंद्र शर्मा रहते हैं। आप उनसे मिल लीजिए। आपकी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी।”
कम लोग ही जानते होंगे कि पंडित नरेंद्र शर्मा को ही देश में आकाशवाणी की विविध भारती सेवा शुरू करने का भी श्रेय दिया जाता है। उनकी बेटी बताती हैं, “एक दिन हमारे घर के बाहर एक लंबी सी विदेशी गाड़ी रुकी। और, पंडित नरेंद्र शर्मा को खोजते हुए खुद बी आर चोपड़ा ही हमारे यहां आ पहुंचे। वह चाहते तो किसी को भी भेजकर या फोन करके पापाजी को बुला सकते थे, लेकिन बी आर चोपड़ा आखिर ऐसे ही बी आर चोपड़ा नहीं बने। घर पर उनका खूब आदर सत्कार हुआ और उसी दिन उन्होंने पापाजी को महाभारत में परामर्शदाता के रूप में साइन कर लिया।”
इसके बाद बी आर फिल्म्स के दफ्तर में रोज बैठकें होने लगीं। एक तरफ बी आर चोपड़ा और उनके बेटे रवि होते, दूसरी तरफ इसकी पटकथा लिखने को तैयार हुए राही मासूम रजा। बीच में पापाजी कमरे में टहलते रहते और एक एक एपिसोड पर विचार चलता रहता। लावण्या भी इस बैठक में अक्सर शामिल होतीं। वह बताती हैं, “कभी कभी पापाजी कथा में इतना डूब जाते कि उठ कर खड़े हो जाते और टहलते हुए कथानक को इतने विस्तार से बतलाते कि सबको यूं लगता कि वे उसी कालखंड में जाकर खड़े हो गए हैं। पापाजी की कही कोई बात व्यर्थ न जाए, इसके चलते जैसे ही उनका बोलना आरम्भ होता, टेप रिकॉर्डर ऑन कर लिया जाता ताकि बाद में सब आराम से सुना जा सके।”
महाभारत धारावाहिक में भीष्म पितामह को सफेद कपड़े पहनाने का भी रोचक संस्मरण है, “एक बार ऐसे ही सभी कलाकरों की वेशभूषा और साज सज्जा की बात चल रही थी तो पापाजी ने कहा कि भीष्म पितामह हमेशा श्वेत वस्त्र धारण किया करते थे। तो बी आर अंकल और राही साहब जो पटकथा लिखा रहे थे, वे दोनों पूछने लगे कि आपको कैसे पता? इस पर पापाजी ने एक श्लोक सुनाया और ये भी बताया कि ये किस पन्ने पर लिखा है। वह अर्जुन के बचपन से संबंधित बात थी जिसमें भीष्म कहते हैं कि तुम्हारे धूल धूसरित वस्त्रों से मेरे सफेद कपड़े मैले हो रहे हैं। खुद राही साहब ने एक इंटरव्यू में कहा भी कि महाभारत की भूलभूलैया में मैं पंडित जी की अंगुली थामे आगे बढ़ता गया।"