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Exclusive: हमेशा के लिए नहीं बनती है कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी, विशेषज्ञों ने बताई ये बड़ी बात

Mon, 23 Nov 2020 04:46 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 23 Nov 2020 04:46 PM IST
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Corona virus fighting antibodies not last forever BRD Medical College will research on antibodies
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में कोरोना वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी हमेशा के लिए नहीं बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर में हमेशा के लिए इम्युनिटी बन जाए ऐसा संभव नहीं है। इसका असर कुछ महीनों में खत्म हो जाता है। जबकि सार्स और मार्स वायरस से संक्रमित होकर ठीक हुए लोगों में एंटीबॉडी का असर दो से तीन सालों तक रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग अब इस विषय पर शोध करेगा।
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BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि जरूरी नहीं है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर में हमेशा के लिए इम्युनिटी बनी रहे, क्योंकि एंटीबॉडी इस प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा भर है।
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डॉ. अमरेश सिंह।(file) - फोटो : अमर उजाला।
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि शोध में यह बात सामने आ चुकी है कि कोरोना संक्रमित मरीज के शरीर में एंटीबॉडी का असर खत्म हो जाता है। कई बार बनता भी नहीं है।
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कोरोना जांच। - फोटो : iStock
डॉ. अमरेश ने बताया कि एंटीबॉडी वह प्रोटीन है जिसे बी-कोशिकाएं वायरस को जकड़कर खत्म करने के लिए बनाती हैं। वायरस का पहला संक्रमण होने पर शरीर इससे आसानी से नहीं लड़ पाता है, लेकिन दूसरी बार संक्रमण होने पर शरीर का इम्युनिटी सिस्टम इससे निपटने के लिए तैयार हो जाता है और पहले से ज्यादा बेहतर एंटीबॉडी बनाता है, लेकिन कोरोना वायरस के साथ ऐसा नहीं हो रहा है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कइयों के शरीर में बनी ही नहीं एंटीबॉडी
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि कई ऐसे कोरोना संक्रमित मिले हैं, जिनके शरीर में एंटीबॉडी विकसित ही नहीं हुई। ऐसे मरीजों की संख्या 30-35 के आसपास है। जबकि कई संक्रमित ऐसे मिले हैं, जो दूसरी बार संक्रमण की चपेट में आए हैं। इसकी वजह एंटीबॉडी का जल्दी शरीर से खत्म हो जाना रहा है। ऐसे में कोरोना एक अबूझ पहेली बन गया है। जबकि सार्स और मार्स वायरस के संक्रमण के बाद मानव के शरीर में दो से तीन सालों तक एंटीबॉडी बनी रही। अब इस पर शोध करने की जरूरत है कि आखिर वायरस का म्यूटेशन किस तरह से शरीर पर हो रहा है।
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