कोरोना के डर से भटक रहे हैं सांस के रोगी, डॉक्टर के अनुसार जरा सी लापरवाही से जा सकती है जान
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ब्रोंकाइटिस की दिक्कत थी लखनऊ जाना पड़ा
10 नंबर बोरिंग के रमेश पांडेय को सांस लेने में तकलीफ थी। ऑक्सीजन लेवल लगातार ऊपर-नीचे हो रहा था। चेस्ट का सीटी स्कैन कराया और एक निजी अस्पताल में रिपोर्ट दिखाई, तो डॉक्टर ने कोरोना के लक्षण बताएं। कोरोना जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। निगेटिव रिपोर्ट के बावजूद निजी अस्पताल उन्हें भर्ती करने में आनाकानी करते रहे। कई अस्पतालों की ना के बाद मजबूरी में परिजन लखनऊ लेकर गए। यहां भी दो बार कोरोना की जांच हुई, दोनों बार रिपोर्ट निगेटिव आई। डॉक्टरों ने बताया कि ब्रोंकाइटिस की समस्या है।
केस दो
शंका समाधान में तीन बार कराई कोरोना जांच, अस्थमा निकला
गोरखनाथ के रहने वाले राजीव श्रीवास्तव को अचानक सांस लेने में परेशानी हुई। जिला अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टर ने कोरोना जांच कराने की सलाह दी। ट्रूनेट और आरटीपीसीआर दोनों जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। बीआरडी में भी जांच कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आई। चेस्ट सीटी स्कैन में अस्थमा की तस्दीक हुई। इसके बाद बीआरडी में इलाज शुरू हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि लक्षण कोविड के थे, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई।
चेस्ट का सिटी स्कैन जरूरी
डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि सांस के मरीजों को सलाह दी जा रही है कि एक बार चेस्ट का सिटी स्कैन जरूर करा लें। इससे कोविड का पता आसानी से चल जाता है। फेफड़े में ग्राउंड ग्लासिंग (सफेद निमोनिया के पैच) इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि कोविड का संक्रमण है।
लापरवाही न करें, कोविड के तहत ही कराएं इलाज
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि सांस के मरीजों को अतरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। जरा सी लापरवाही से मरीजों की जान जा सकती है। सबसे अधिक खतरा शुगर और बीपी के मरीजों को है।