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तस्वीरें: यहां हाथ में महंगी घड़ी-स्कूटर देख लोग करते थे सलाम, इस जगह काम करने पर मिलता था सम्मान

Thu, 24 Jun 2021 03:54 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 24 Jun 2021 03:54 PM IST
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Gorakhpur Fertilizer special workers story in 1980
गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

आज हम आपको गोरखपुर खाद कारखाना की एक खास कहानी बताने जा रहे हैं। यहां ढाई दशक पहले बंद हुआ खाद कारखाना करीब दो दशकों तक गोरखपुर की संपन्नता की निशानी हुआ करता था। बाजार में महंगे कपड़े, हाथ में घड़ी और स्कूटर लिए कोई व्यक्ति खड़ा दिखाई पड़ता तो लोग समझ जाते थे कि वह खाद कारखाने में ही काम करने वाला कर्मचारी होगा।



कारखाने के आसपास कभी रात नहीं होती थी। 24 घंटे रोशनी से पूरा इलाका जगमगाता था। शिफ्टवार ड्यूटी चलती थी तो बाहर चाय-पानी और पान की दुकानों पर भी हमेशा मजमा लगा रहता था। खाद कारखाने में सीनियर टेक्नीशियन रह चुके कोदई सिंह कहते हैं कि 70-80 के दशक में गोरखपुर एवं आसपास इतनी पगार देने वाला न तो कोई दफ्तर था न ही कल-कारखाना। शहर में जब कोई विजय सुपर स्कूटर से निकलता तो लोगों के मुंह से यूं ही निकल पड़ता- 'लागत बा खाद कारखाने में काम करेला।' आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...

 

Gorakhpur Fertilizer special workers story in 1980
गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

उनकी यादों में बसा एक और किस्सा है- 'गोरखपुर के ही सरदारनगर के इब्राहिमपुर गांव में स्थित उनके पुश्तैनी मकान में रामचरितमानस का पाठ था। इसमें कारखाने के उनके साथी भी पहुंचे थे। गांव में एक साथ 20 से अधिक स्कूटर पहुंचे तो उन्हें देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुट गई थी। इसकी चर्चा कई दिनों तक इलाके में होती रही।

 

Gorakhpur Fertilizer special workers story in 1980
गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

मोदी-योगी ने साकार किया सपना
मामूली से विवाद के बाद मजदूरों के लंबे आंदोलन की वजह से बंद हुआ गोरखपुर खाद कारखाना खुलने की कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार कारखाने को खुलवाने के लिए सदन में आवाज उठाते थे। उनकी मेहनत तब रंग लाई जब 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आई।
 

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Gorakhpur Fertilizer special workers story in 1980
गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2016 में कारखाने की नींव रखी और आज पुराने कारखाने की जगह उससे ज्यादा क्षमता वाले नए कारखाने का काम तकरीबन पूरा होने को है।

 
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Gorakhpur Fertilizer special workers story in 1980
गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।
हिंदुस्तान उवर्रक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के गोरखपुर के वरिष्ठ प्रबंधक सुबोध दीक्षित का कहना है कि लगातार दूसरे साल कोविड के प्रकोप की वजह से कारखाने का निर्माण कार्य प्रभावित हुई है। कोरोना काल में करीब दो महीने तक काम ठप रहने की वजह से अभी भी बैगिंग बिल्डिंग, डीएम प्लांट और एसटीपी व ईटीपी का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। उम्मीद है कि अक्तूबर 2021 तक उत्पादन भी शुरू हो जाएगा।
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