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'कातिल' टीचर: कभी आईएएस बनने का सपना, अब अपराधों की फाइलों में दर्ज नाम; वैभव के 'हत्यारे' की इसलिए बदल गई राह
वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 30 Jul 2026 03:21 PM IST
सार
गोरखपुर के वैभव हत्याकांड में मुख्य आरोपी पहले भी जेल जा चुका था। आरोपी टीईटी साल्वर गिरोह में फंसा था। प्रयागराज में 2022 में साल्वर गिरोह पकड़ा गया था। 36 लाख के कर्ज और संदिग्ध संपर्कों की पड़ताल पुलिस कर रही है।
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gorakhpur murder
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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कभी प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखने वाला सर्वेश कुमार भट्ट उर्फ बिट्टू अब अपराध के गंभीर आरोपों में घिरा है। जिस हाथ में कभी किताबें थीं, उसी नाम पर अब पुलिस की केस डायरी तैयार हो रही है। मासूम वैभव हत्याकांड में मुख्य आरोपी बने सर्वेश का अतीत खंगालने पर सामने आया कि वह पहले भी कानून के शिकंजे में आ चुका है।
वर्ष 2022 में प्रयागराज में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के साल्वर गिरोह से जुड़े होने के आरोप में सर्वेश की गिरफ्तारी हुई थी। आरोप है कि वह फर्जी दस्तावेजों के सहारे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने की तैयारी में था। जेल से बाहर आने के बाद भी वह अपनी जिंदगी को अपराध से दूर नहीं रख सका और अब हत्या जैसे संगीन मामले में पुलिस जांच का केंद्र बन गया है।
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अंतिम संस्कार के लिए ले जाते वैभव का पार्थिव शरीर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस के अनुसार, सर्वेश पढ़ाई में तेज था। वर्ष 2008 में उसने गोरखपुर स्थित स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एडवांस डिप्लोमा इन कंप्यूटर एजुकेशन किया था। इसके बाद उसने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और आईएएस बनने का लक्ष्य तय किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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अयोध्या धाम सरयू नदी तट पर वैभव वर्मा का हुआ अंतिम संस्कार।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वर्ष 2010 में उसने अपने बड़े भाई सतीश भट्ट के नाम से सुदर्शन सेवा शिक्षा संस्थान के नाम पर एक फर्म भी शुरू कराई थी। जांच एजेंसियां अब इस फर्म की गतिविधियों, पंजीकरण और आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटा रही हैं। बताया जा रहा है कि फर्म में परिवार के सदस्य निदेशक और सदस्य रहे हैं।
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आरोपी सर्वेश कुमार भट्ट उर्फ बिट्टू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कर्ज का दबाव और गलत संगत ने बदली राह
पुलिस जांच में सामने आया है कि आर्थिक परेशानियां भी बढ़ती चली गईं। शादी के लिए करीब 13 लाख रुपये का कर्ज लिया गया। इसके बाद कंप्यूटर कोचिंग सेंटर खोलने के लिए करीब 23 लाख रुपये का ऋण लिया गया। करीब 36 लाख रुपये के कर्ज के बीच सर्वेश कोचिंग पढ़ाने लगा।
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इसी कोचिंग सेंटर में पढ़ाता था आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी दौरान उसकी संगत ऐसे लोगों से हुई, जिनके संपर्क ने उसे टीईटी साल्वर गिरोह तक पहुंचा दिया। प्रतियोगी परीक्षा पास कर सरकारी अधिकारी बनने का सपना देखने वाला सर्वेश खुद परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोपों में फंस गया।
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