गोरखपुर महानगर के हिंदी बाजार में स्थित घंटाघर स्वतंत्रता आंदोलन के वीर बलिदानियों के शहादत की गौरव-गाथा को अपने भीतर समेटे हुए है। वर्तमान में जहां यह घंटाघर है वहां 1857 में एक विशाल पाकड़ का पेड़ हुआ करता था। इसी पेड़ पर पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अली हसन के साथ दर्जनों स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी। वहीं महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की शव यात्रा भी यहां रुकी थी। यहीं उनकी मां ने एक प्रेरणादायी भाषण दिया था।
आजादी महोत्सव: वीर बलिदानियों की गौरव गाथा समेटे हुए है घंटाघर, इतिहास जानकर गर्व करेंगे आप
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 06 Aug 2022 12:37 PM IST
सार
19 दिसंबर 1927 में जब जिला कारागार में बिस्मिल को फांसी दी गई तो शहर में निकली उनकी शवयात्रा इसी घंटाघर पर आकर रुकी थी। उसी दौरान बिस्मिल की माता ने यहां पर प्रेरणादायी भाषण भी दिया था। इस घटना के बाद यह स्थान पूरी तरह से पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को समर्पित हो गया।
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