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पूर्वांचल के घर-घर में भगवान कृष्ण की भक्ति पहुंचाएगा इस्कॉन, जानिए क्या है इनका प्लान

Mon, 28 Dec 2020 05:33 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 28 Dec 2020 05:33 PM IST
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ISKCON will bring devotion to Lord Krishna in Purvanchal house
ISKCON Temple - फोटो : Amar Ujala

गोरखपुर जिले में इस्कॉन की नींव मजबूत होनी शुरू हो गई है। सत्संग केंद्र की स्थापना होने के बाद अब इस्कॉन का अगला लक्ष्य जल्द मंदिर की स्थापना कर पूर्वांचल के हर घर तक भगवान कृष्ण की भक्ति को पहुंचाना है।



 

ISKCON will bring devotion to Lord Krishna in Purvanchal house
इस्कॉन मंदिर - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला संवाददाता से विशेष बातचीत में इस्कॉन के संयोजक विद्यापति माधव दास ने बताया कि श्रीकृष्ण भक्ति के प्रचार की अंतरराष्ट्रीय संस्था इस्कॉन (अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) ने जिले में सत्संग केंद्र की स्थापना कर दी है। अगले वर्ष फरवरी में इसका औपचारिक उद्घाटन हो जाएगा। केंद्र स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह भक्त शहर के विभिन्न मोहल्लों में जाकर प्रभु नाम का संकीर्तन कर रहे हैं।

ISKCON will bring devotion to Lord Krishna in Purvanchal house
ISKCON Noida - फोटो : अमर उजाला।

उन्होंने बताया कि अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपादजी चाहते थे कि गोरखपुर के हर घर को मंदिर बनाया जाए। ऐसे में हम लोग जिले के प्रत्येक मोहल्लों में एक सार्वजनिक स्थल का चुनाव करेंगे, हर सप्ताह कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में मोहल्ले के लोगों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रम में भाग लेने वाले भक्तों को गीता की शिक्षा के साथ पुराणों के ज्ञान और वैदिक सभ्यताओं से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के साथ ही सभी शिक्षण संस्थाओं में जाकर गीता पर आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित कराएंगे। इसके अलावा सभी में प्रसाद का वितरण भी किया जाएगा।

 

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ISKCON will bring devotion to Lord Krishna in Purvanchal house
इस्कॉन मंदिर - फोटो : अमर उजाला

जल्द बनेगा इस्कॉन का मंदिर
संयोजक विद्यापति माधव दास ने बताया कि पूर्वांचल के साथ ही पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के घरों में श्रीकृष्ण भक्ति पहुंचाना इस्कॉन का लक्ष्य है। इसके लिए सत्संग केंद्र की स्थापना के बाद गोरखपुर में मंदिर बनाने की कवायद तेज हो चुकी है।

 

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Iskcon temple - फोटो : अमर उजाला।

हनुमान प्रसाद पोद्धार ने की थी आर्थिक सहायता
स्वामी प्रभुपादजी 1962 में भागवत गीता को प्रिंट में आर्थिक सहयोग करने के लिए भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार से मिलने आए थे। हनुमान प्रसाद से अर्थिक सहयोग मिलने के बाद जो भागवत पुराण छपी उसी को लेकर वह अमेरिका गए, जहां उन्होंने इस्कॉन की स्थापना की। इसके बाद 11 सालों में ही उन्होंने दुनिया में 108 इस्कॉन के केंद्र स्थापित किए। 1971 में पुन: स्वामी प्रभुपादजी गोरखपुर आए और 15 दिनों तक गीता वाटिका में प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने अपने अमेरिकी शिष्यों को पत्र लिखकर हिंदीभाषी लोगों को इस्कॉन से जोड़ने के लिए गोरखपुर में इस्कॉन का केंद्र बनाने की मंशा जाहिर की थी। उन्हीं की मंशा को पूरा करने के लिए यहां इस्कॉन की कवायद हो रही है।

 

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