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Exclusive: दवा कंपनियों की मनमानी का खामियाजा भुगत रहे हैं लोग, बोले- 'मजबूरी का फायदा उठा रहीं कंपनियां'
Wed, 25 Nov 2020 03:23 PM IST
vivek shukla
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 25 Nov 2020 03:23 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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सरकार लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन दावे के उलट दवा कंपनियां कीमतों में हर छह माह में 10 से 15 फीसदी तक इजाफा कर रहीं हैं। कीमतों में बढ़ोत्तरी कुछ खास दवाओं तक ही सीमित नहीं, ज्यादातर दवाओं की कीमतों में ऐसा ही उछाल है।
फाइल फोटो।
- फोटो : pti
जानकार बताते हैं कि बाजार में मांग बढ़ते ही दवाओं का नया बैच जारी कर दिया जा रहा है और इसके साथ ही दवाओं के दाम भी बढ़ा दिए जा रहे हैं। इससे ग्राहक और दवा व्यापारी परेशान हैं। दवा व्यापारियों का कहना है कि जिस दवा की डिमांड ज्यादा रहती है, कंपनियां उनका दाम बढ़ा दे रहीं हैं। ऐसे में मजबूरी में हमें भी महंगे दाम पर दवाएं बेचनी पड़ती हैं। आम आदमी कंपनियों के इस खेल में पिस रहा है। मजबूरी में उसे दवा हर हाल में खरीदनी पड़ रही है।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : पिक्साबे
ये हैं केस
- एंटीबायोटिक डॉक्सीसाइक्लिन 100 एमजी के एक स्ट्रिप की कीमत बीते अगस्त में 74 रुपये थी। नवंबर में 10 गोली वाली इसी स्ट्रिप की कीमत 92-95 रुपये हो गई है।
- मानसिक रोगियों को दी जाने वाली दवा एसिलाटोप्रैम 15 गोली की कीमत जुलाई माह में 150 रुपये थी। नंवबर माह में इसकी कीमत बढ़कर 225 से 230 रुपये के बीच हो गई है।
- गैस में दी जाने वाली पैंटोप्राजोल और रेबिप्रजोल की कीमत अप्रैल माह में 172 रुपये पत्ता था। अक्तूबर माह में इसकी कीमत बढ़कर 195-210 रुपये पत्ता कर दिया गया है।
- महिलाओं में हार्मोंस बढ़ाने वाली दवा डुफास्टोन 10 गोली की कीमत जुलाई माह में 590 रुपये थी। अक्तूबर माह में 680 से 690 रुपये कर दी गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
फुटकर दुकानदारों से हो जाती है बहस
दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि दवाओं के दाम बढ़ने से थोक बाजार की लागत बढ़ जाती है। थोक व्यापारियों को तो इससे ज्यादा दिक्कत नहीं होती, लेकिन फुटकर दुकानदारों की समस्या बढ़ जाती है। क्योंकि मरीज कम मात्रा में दवाएं खरीदता है। कोई एक पत्ता ले जाता है और पांच दिन बाद जब वहीं दवा लेने दूसरी बार आता है, तो उसे महंगे दाम पर दिया जाता है। इस दौरान दुकानदारों और ग्राहकों में बहस भी हो जाती है।
दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि दवाओं के दाम बढ़ने से थोक बाजार की लागत बढ़ जाती है। थोक व्यापारियों को तो इससे ज्यादा दिक्कत नहीं होती, लेकिन फुटकर दुकानदारों की समस्या बढ़ जाती है। क्योंकि मरीज कम मात्रा में दवाएं खरीदता है। कोई एक पत्ता ले जाता है और पांच दिन बाद जब वहीं दवा लेने दूसरी बार आता है, तो उसे महंगे दाम पर दिया जाता है। इस दौरान दुकानदारों और ग्राहकों में बहस भी हो जाती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : PTI
मूल्य निर्धारण विभाग नहीं करता
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की ओर से दवाओं के दाम तय किए जाते हैं। दवा को ब्लैक में बेचने पर विभाग को कार्रवाई का अधिकार है। निर्धारित मूल्य से अधिक दवा बेचने पर विभाग कार्रवाई करता है। अब तक ऐसी कोई शिकायत भी नहीं आई है।
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की ओर से दवाओं के दाम तय किए जाते हैं। दवा को ब्लैक में बेचने पर विभाग को कार्रवाई का अधिकार है। निर्धारित मूल्य से अधिक दवा बेचने पर विभाग कार्रवाई करता है। अब तक ऐसी कोई शिकायत भी नहीं आई है।