राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद चार जून को गीता प्रेस आ रहे हैं। वह यहां गीता प्रेस शताब्दी वर्ष समारोह का विधिवत शुभारंभ करेंगे। राष्ट्रपति के आने की सूचना ईमेल के माध्यम से गीता प्रेस प्रबंधन को सोमवार को मिल गई है।
Gita Press: चार जून को गीता प्रेस आएंगे राष्ट्रपति, शताब्दी वर्ष समारोह का करेंगे शुभारंभ
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जिला प्रशासन ने किया निरीक्षण
राष्ट्रपति का कार्यक्रम आने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को गीता प्रेस का निरीक्षण किया। डीएम विजय किरण आनंद, एडीएम वित्त राजेश कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर आदि अधिकारियों ने गीता प्रेस पहुंचकर व्यवस्था को लेकर करीब एक घंटे तक गीता प्रेस निरीक्षण किया और गीता प्रेस प्रबंधन के साथ बैठक की। लीला चित्र मंदिर, मंच, पंडाल, सीटिंग व्यवस्था आदि का विस्तृत खाका जिला प्रशासन ने तैयार किया।
राज्यपाल व सीएम भी रहेंगे मौजूद
गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के आयोजन को लेकर गीता प्रेस प्रबंधन ने सीएम से विस्तृत चर्चा कर कार्य योजना बनाई है।
शताब्दी वर्ष विशेषांक का कार्य शुरु
गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष पर गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाले शताब्दी वर्ष विशेषांक के प्रकाशन का कार्य शुरु हो गया है। इसकी शुरुआत लेखों के संकलन से हुई है। बता दें कि गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष पर कल्याण के अबतक के सभी विशेषांकों से एक-एक लेख लेकर शताब्दी वर्ष विशेषांक का प्रकाशन होना है। गीता प्रेस ने विशेषांक की तैयारी शुरु कर दी है।
शताब्दी वर्ष में आयोजित होंगे तीन बड़े कार्यक्रम
गीता प्रेस शताब्दी वर्ष समरोह पर गीता प्रेस परिसर में तीन बड़े कार्यक्रम होने हैं। पहला कार्यक्रम चार जून को राष्ट्रपति का होगा। इस कार्यक्रम के संगोष्ठी और पुस्तकों का विमोचन होना है। इसके बाद तीन दिसंबर को गीता जयंती पर कथा आयोजित होगी। अंतिम कार्यक्रम तीन मई को शताब्दी वर्ष समारोह के समापन अवसर पर होगा। इसके अंतर्गत भक्तमाल की कथा होगी। इस कथा के कथाव्यास राजेंद्र दास महाराज होंगे।
देश भर में आयोजित हो रहे हैं कार्यक्रम
गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष पर देशभर में स्थित गीता प्रेस के विभिन्न केंद्रों पर गीता प्रेस के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। गीता प्रेस प्रबंधन के मुताबिक राजस्थान के चुरु, रतनगढ़, कोलकाता, बेंगलुरु आदि जगहों पर अलग-अलग समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ये कार्यक्रम शताब्दी समारोह के समापन समारोह तिथि तीन मई तक होते रहेंगे।
ऐसे हुई थी गीता प्रेस की स्थापना
गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ लाल मणि तिवारी ने बताया कि वर्ष 1921 के आसपास जयदयाल गोयंदका ने कोलकाता में गोविंद भवन ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसी ट्रस्ट के तहत वहीं से वह गीता का प्रकाशन कराते थे। पुस्तक में कोई त्रुटि न हो इसके लिए प्रेस को कई बार संशोधन करना पड़ता था। प्रेस मालिक ने एक दिन कहा कि इतनी शुद्ध गीता प्रकाशित करवानी है तो अपना प्रेस लगा लीजिए। गोयंदका ने इस कार्य के लिए गोरखपुर को चुना। 23 अप्रैल 1923 को उर्दू बाजार में दस रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया गया और वहीं से शुरू हुआ गीता का प्रकाशन। धीरे-धीरे गीताप्रेस का निर्माण हुआ और इसकी वजह से पूरे विश्व में गोरखपुर को एक अलग पहचान मिली। आज प्रेस के पास दो लाख वर्ग फीट जमीन है। इसमें 1.45 लाख वर्ग फीट में प्रेस, कार्यालय व मशीनें हैं। 55 हजार वर्ग फीट में दुकानें व आवास हैं।