फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Exclusive: डॉक्टरों के लिए अबूझ पहेली बना बार-बार गर्भपात, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने लिया शोध का फैसला

Thu, 22 Dec 2022 10:56 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 22 Dec 2022 10:56 AM IST
विज्ञापन
Repeated miscarriage became a puzzle for doctors
गर्भपात। (सांकेतिक) - फोटो : Social Media

गोरखपुर जिले की 20 से 25 फीसदी महिलाओं के मां बनने का सपना बार-बार टूट रहा है। उनका बार-बार गर्भपात डॉक्टरों के लिए अबूझ पहेली बन गया है। महज एक से दो फीसदी मामलों में कारण समझ तो आ रहे हैं, लेकिन अन्य मामलों में कारणों का पता नहीं चल पा रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में इस समस्या से हर दिन 20 से 25 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इस पर विभाग ने मरीजों का डाटा एकत्र कर शोध का फैसला लिया है।



 

Repeated miscarriage became a puzzle for doctors
गर्भपात। (सांकेतिक) - फोटो : Social Media

जानकारी के मुताबिक, जिले की 20 से 25 फीसदी महिलाएं गर्भवती तो हो रही हैं, लेकिन प्रसव से पहले उनका गर्भपात हो जा रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि इस तरह के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन 20 से 25 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। ऐसे मरीजों में अब तक केवल एक कारण समझ आया है, वह एंटीफोस्फोलिपिड सिंड्रोम है।

 

Repeated miscarriage became a puzzle for doctors
गर्भवती। (सांकेतिक) - फोटो : pixabay

इस सिंड्रोम की वजह से महिलाओं में खून का थक्का बनने लगता है, जो गर्भपात का कारण बन रहा है। इस सिंड्रोम की वजह से शिशु भी मृत पैदा होता है। ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बताया कि एक से दो फीसदी केस में मामले समझ में तो आ जा रहे हैं, लेकिन अन्य केस को जानने के लिए कई तरह की जांचें करानी पड़ेंगी। इसकी तैयारी की जा रही है। मरीजों का पूरा डाटा एकत्र किया जा रहा है। शोध के बाद यह पता चल सकेगा कि आखिर बड़ी वजह क्या है?  

विज्ञापन
विज्ञापन
Repeated miscarriage became a puzzle for doctors
गर्भवती महिला (demo) - फोटो : shutterstock

टांगों में बन रहा खून का थक्का
डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि एंटीफोस्फोलिपिड सिंड्रोम में गर्भवतियों के टांगों में खून का थक्का बन रहा है। इसे साइंस की भाषा में डीप वेन थ्रोंबोसिस (डीवीटी) कहते हैं। इसमें थक्के टांग में विकसित होकर खून के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। खून गाढ़ा हो जाता है। इस स्थिति में मरीज को पल्मोनरी एंबोलिस्म हो जाता है। इसकी वजह से महिला को बार-बार गर्भपात होता है या मृत बच्चा पैदा होता है। महिलाओं को यह लक्षण समझ में नहीं आता है। जब मरीज को परेशानी शुरू होती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। हालांकि, ऐसे मामले एक से दो फीसदी मरीजों में होते हैं।

 

विज्ञापन
Repeated miscarriage became a puzzle for doctors
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
मरीजों का किया जा रहा इलाज
डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि इन मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इलाज से वे प्रेग्नेंट भी हो रही हैं। प्रेंग्नेंसी के बाद उन्हें हर दो माह पर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए कहा जाता है, जिससे गर्भपात को रोका जा सके।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed