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पिता-पुत्र का मिलन: 15 साल बाद लौटा लापता बेटा, बूढ़े पिता का हौसला जीत गया; मां इंतजार में छोड़ गई दुनिया
Thu, 20 Aug 2026 12:01 PM IST
Rohit Singh
मदन मोहन पांडेय, उरुवा/संवाद न्यूज एजेंसी
मदन मोहन पांडेय, उरुवा/संवाद न्यूज एजेंसी
Published by: Rohit Singh
Updated Thu, 20 Aug 2026 12:01 PM IST
सार
पत्नी निर्मला (45) के मुताबिक मुंबई के ठेकेदार ने बताया कि वे (विश्वनाथ) घर चले गए हैं और उनकी मजदूरी के चार हजार रुपये भेजने की बात कही। रुपये तो आए लेकिन वे न घर पहुंचे और न ही उनका कोई पता चला। बूढ़े पिता रामनैन और परिवार ने उन्हें खोजने के लिए हरसंभव प्रयास किया लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
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पत्नी और पिता के साथ मठराम गिरी जिगिनिया शाहपुर घर पर मौजूद विश्वनाथ साहनी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
गोरखपुर के जिगिनिया शाहपुर निवासी 80 वर्षीय रामनैन का हौसला जीत गया। 15 साल लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार उन्होंने अपने बेटे विश्वनाथ को ढूंढ निकाला। कोलकाता के एक एनजीओ और पुलिस ने उनकी मदद की और बेटे को पिता व परिवार से मिलवा दिया। बेटे के घर लौटने से पत्नी निर्मला, बच्चों और बूढ़े पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। विश्वनाथ अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं और बातचीत के दौरान कई बातें भूल जा रहे हैं।
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मामला बेलघाट थाना क्षेत्र के मठराम गिरी, जिगिनिया शाहपुर गांव का है। वर्ष 2011 में विश्वनाथ रोजी-रोटी कमाने मुंबई गए थे। करीब तीन महीने तक वह परिवार के संपर्क में रहे और खर्च के लिए रुपये भी भेजते रहे। इसके बाद अचानक उनका फोन आना बंद हो गया।
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पत्नी निर्मला (45) के मुताबिक मुंबई के ठेकेदार ने बताया कि वे (विश्वनाथ) घर चले गए हैं और उनकी मजदूरी के चार हजार रुपये भेजने की बात कही। रुपये तो आए लेकिन वे न घर पहुंचे और न ही उनका कोई पता चला।
बूढ़े पिता रामनैन और परिवार ने उन्हें खोजने के लिए हरसंभव प्रयास किया लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पत्नी निर्मला पांच बच्चों के साथ मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती रहीं। इस बीच विश्वनाथ की मां उसका इंतजार करते-करते 2024 में दुनिया छोड़ गईं।
आखिरकार सच हो गई उम्मीद...
विश्वनाथ साहनी की तलाश में परिवार के लोगों की आंखें भले ही थक गई थीं लेकिन बेटे के लौटने की उम्मीद ने पिता का हौसला कभी टूटने नहीं दिया। हर दिन यही भरोसा रहा कि बेटा जहां भी होगा एक दिन जरूर लौटेगा। इसी उम्मीद के सहारे उन्होंने 15 साल तक उसकी तलाश जारी रखी। आखिरकार बुधवार को उम्मीद उस वक्त सच हुई जब बेटा लौट आया।
विश्वनाथ साहनी की तलाश में परिवार के लोगों की आंखें भले ही थक गई थीं लेकिन बेटे के लौटने की उम्मीद ने पिता का हौसला कभी टूटने नहीं दिया। हर दिन यही भरोसा रहा कि बेटा जहां भी होगा एक दिन जरूर लौटेगा। इसी उम्मीद के सहारे उन्होंने 15 साल तक उसकी तलाश जारी रखी। आखिरकार बुधवार को उम्मीद उस वक्त सच हुई जब बेटा लौट आया।
ऐसे हुई पुष्टि: कोलकाता पुलिस व संस्था ने निभाई जिम्मेदारी
बेलघाट थानाध्यक्ष संदीप यादव ने बताया कि पहले कोलकाता की पुलिस और वहां की एक संस्था ईश्वर संकल्प ने बेलघाट पुलिस से संपर्क किया और उनकी तस्वीर व लोकेशन साझा की। पुलिस ने फोटो के आधार पर परिवार से संपर्क कर पहचान कराई। पहचान की पुष्टि की गई और परिवार को कोलकाता भेजा गया।
बेलघाट थानाध्यक्ष संदीप यादव ने बताया कि पहले कोलकाता की पुलिस और वहां की एक संस्था ईश्वर संकल्प ने बेलघाट पुलिस से संपर्क किया और उनकी तस्वीर व लोकेशन साझा की। पुलिस ने फोटो के आधार पर परिवार से संपर्क कर पहचान कराई। पहचान की पुष्टि की गई और परिवार को कोलकाता भेजा गया।
पत्नी निर्मला, बेटी रोशनी और रिश्तेदार सीताराम कोलकाता के हावड़ा पहुंचे संस्था के सदस्यों ने उन्हें अपने साथ ले जाकर विश्वनाथ से मिलवाया। कालीघाट पुलिस की मौजूदगी में विश्वनाथ को परिवार को सौंप दिया गया। बुधवार को विश्वनाथ को लेकर परिवार गोरखपुर लौट आया।
विश्वनाथ ने बताया- ठेकेदार से विवाद के बाद मुंबई से निकल गए
विश्वनाथ ने बताया कि मुंबई में वह ठेकेदार से अपने रुपये मांग रहे थे। उसने नहीं दिया तो नाराज होकर वह पैदल ही मुंबई से निकल पड़े और नागपुर पहुंच गए। इसके बाद वह कोलकाता कैसे पहुंचे उन्हें याद नहीं। पुलिस का कहना है कि वहां कुछ लोगों ने उन्हें एक आश्रम जैसी संस्था में पहुंचाया, जहां उनका इलाज कराया गया। हालत में सुधार होने के बाद उन्होंने संस्था को अपने घर का पता बताया।
विश्वनाथ ने बताया कि मुंबई में वह ठेकेदार से अपने रुपये मांग रहे थे। उसने नहीं दिया तो नाराज होकर वह पैदल ही मुंबई से निकल पड़े और नागपुर पहुंच गए। इसके बाद वह कोलकाता कैसे पहुंचे उन्हें याद नहीं। पुलिस का कहना है कि वहां कुछ लोगों ने उन्हें एक आश्रम जैसी संस्था में पहुंचाया, जहां उनका इलाज कराया गया। हालत में सुधार होने के बाद उन्होंने संस्था को अपने घर का पता बताया।