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तस्वीरें: जींद की धरती से इनेलो की हुंकार, समर्थकों में दिखा उत्साह, खूब झूमीं रैली में आई महिलाएं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 25 Sep 2021 04:10 PM IST
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जींद में इनेलो की रैली।
- फोटो : अमर उजाला
इंडियन नेशनल लोकदल हरियाणा में बांगर की धरती से खुद को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। इनेलो का अधिक प्रभाव बांगर व बागड़ में रहा है। ऐसे में यहां से इनेलो को फिर से राजनीतिक संजीवनी मिलने की उम्मीद है। इसके लिए पार्टी ने पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवी लाल की 108वीं जयंती का मौका चुना। शनिवार को जींद की नई अनाज मंडी में इंडियन नेशनल लोकदल ने सम्मान दिवस रैली का आयोजन किया।
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जींद में मंच पर पहुंचे पूर्व सीएम चौटाला और प्रकाश सिंह बादल।
- फोटो : अमर उजाला
बादल और फारूक अब्दुल्ला पहुंचे
रैली में पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, जनता दल यूनाइटेड के प्रधान महासचिव केसी त्यागी पहुंचे। इनेलो नेता उमेद लोहान ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर तंज कसा कि ये सत्ता को क्या छोड़ेंगे, मेज पर रखे परांठे नहीं छूटते। वहीं सुनैना चौटाला महिलाओं के बीच पहुंचीं और उनसे बात की।
रैली में पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, जनता दल यूनाइटेड के प्रधान महासचिव केसी त्यागी पहुंचे। इनेलो नेता उमेद लोहान ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर तंज कसा कि ये सत्ता को क्या छोड़ेंगे, मेज पर रखे परांठे नहीं छूटते। वहीं सुनैना चौटाला महिलाओं के बीच पहुंचीं और उनसे बात की।
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जींद रैली में डांस करतीं बास गांव निवासी शांति।
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2000 में पहली बार चुनाव में उतरा था इनेलो
इनेलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला का दावा है कि रैली के बाद कांग्रेस व भाजपा के विरोधी दलों के एकजुट करने की कवायद शुरू हो जाएगी। दरअसल, इनेलो हरियाणा में काफी प्रभाव वाला राजनीतिक दल रहा है। चौधरी देवीलाल के नाम पर इनेलो को लोगों का अपार समर्थन मिलता रहा है। चौधरी देवीलाल द्वारा बनाए गए जनता दल से इनेलो नाम के साथ यह पार्टी पहली बार 2000 के चुनाव में मैदान में उतरी थी।
इनेलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला का दावा है कि रैली के बाद कांग्रेस व भाजपा के विरोधी दलों के एकजुट करने की कवायद शुरू हो जाएगी। दरअसल, इनेलो हरियाणा में काफी प्रभाव वाला राजनीतिक दल रहा है। चौधरी देवीलाल के नाम पर इनेलो को लोगों का अपार समर्थन मिलता रहा है। चौधरी देवीलाल द्वारा बनाए गए जनता दल से इनेलो नाम के साथ यह पार्टी पहली बार 2000 के चुनाव में मैदान में उतरी थी।
जींद रैली में पहुंचते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
2005 में मिली थी करारी शिकस्त
शुरुआत में ही इनेलो ने शानदार प्रदर्शन किया। इनेलो ने कुल 90 में से 62 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और 47 सीटों के साथ सरकार बनाई। हालांकि इससे पहले ही ओमप्रकाश चौटाला 1989 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे। 2000 के विधानसभा चुनाव में इनेलो ने 29.61 प्रतिशत मत हासिल किए। हालांकि उस समय कांग्रेस को 31.22 प्रतिशत मत मिले लेकिन कांग्रेस की सीट महज 21 रह गई थी। इसके बाद 2005 में हुए चुनाव में इनेलो को बुरी हार का सामना करना पड़ा।
शुरुआत में ही इनेलो ने शानदार प्रदर्शन किया। इनेलो ने कुल 90 में से 62 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और 47 सीटों के साथ सरकार बनाई। हालांकि इससे पहले ही ओमप्रकाश चौटाला 1989 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे। 2000 के विधानसभा चुनाव में इनेलो ने 29.61 प्रतिशत मत हासिल किए। हालांकि उस समय कांग्रेस को 31.22 प्रतिशत मत मिले लेकिन कांग्रेस की सीट महज 21 रह गई थी। इसके बाद 2005 में हुए चुनाव में इनेलो को बुरी हार का सामना करना पड़ा।
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जींद रैली में पहुंचे लोग।
- फोटो : अमर उजाला
परिवार में फूट से हुआ नुकसान
2009 के चुनाव में फिर से इनेलो सत्ता में तो नहीं आ सकी, लेकिन 88 सीटों पर चुनाव लड़ कर उसके 31 विधायक विजयी हुए। इस बार भी इनेलो का वोट प्रतिशत घट कर 25.79 रह गया। 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो ने 88 सीटों पर चुनाव लड़ा और 24.11 प्रतिशत वोटों के साथ 19 विधायक बने। इसके बाद 2019 में इनेलो व देवीलाल परिवार में हुई फूट के बाद इनेलो को काफी नुकसान हुआ और 2019 के चुनाव में महज एक सीट ही जीत पाई।
2009 के चुनाव में फिर से इनेलो सत्ता में तो नहीं आ सकी, लेकिन 88 सीटों पर चुनाव लड़ कर उसके 31 विधायक विजयी हुए। इस बार भी इनेलो का वोट प्रतिशत घट कर 25.79 रह गया। 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो ने 88 सीटों पर चुनाव लड़ा और 24.11 प्रतिशत वोटों के साथ 19 विधायक बने। इसके बाद 2019 में इनेलो व देवीलाल परिवार में हुई फूट के बाद इनेलो को काफी नुकसान हुआ और 2019 के चुनाव में महज एक सीट ही जीत पाई।