उत्तरी कमान में आयोजित अलंकरण समारोह में आठ शहीदों को मरणोपरांत सेना वीरता मेडल से सम्मानित किया गया। इनके परिवार के सदस्यों ने यह पुरस्कार हासिल किया। किसी की पत्नी, मां या फिर पिता पुरस्कार लेने के लिए पहुंचे थे। जब इन शहीद जवानों की नाम की घोषणा हुई तो पूरा ऑडिटोरियम तालियों के गूंज उठा।
अलंकरण समारोह: मेडल लेते ही भर आईं शहीदों के परिजनों की आंखें, पढ़िए जांबाजों की शौर्यगाथा
शहीद मेजर की पत्नी बनी सेना में अफसर
शहीद मेजर कौस्तुभ प्रकाश राणे को सेना वीरता मेडल से सम्मानित किया गया। सात अगस्त 2018 को वह कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने सटीक गोलीबारी से चार आतंकियों को घायल कर दिया और दो को मार गिराया। गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल होने के कारण मातृभूमि की सेवा में अपने प्राणों का बलिदान ले दिया। उनकी पत्नी कनिका राणे ने यह पुरस्कार लिया। मौजूदा समय में कनिका भी सेना की अधिकारी बन चुकी हैं। वह चेन्नई में प्रशिक्षण हासिल कर रही हैं।
हवलदार जोरावर के हौसले को सलाम
हवलदार जोराबर सिंह ने 21 मार्च 2018 को जम्मू-कश्मीर के जंगलों में आतंक विरोधी खोजी अभियान चलाया। घनी झाड़ियों की आड़ में आतंकवादी ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, लेकिन उन्होंने चीते की फुर्ती से कार्रवाई करते हुए आतंकियों के भागने के सभी रास्ते बंद कर दिए। दुश्मन की गोली लगने के बावजूद गोलीबारी जारी रखते हुए एक आतंकी को मार गिराया। गंभीर रूप से घायल होने के कारण वह शहीद हो गए। जोरावर सिंह की पत्नी सरंजना कुमारी को यह पुरस्कार दिया गया।
नायक रंजीत ने आतंकी मारा, हुए शहीद
नायक रंजीत खालके को मरणोप्रांत सेना मेडल वीरता के साथ सम्मानित किया गया। जम्मू कश्मीर के एक गांव में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में रंजीत खालके ने एक आतंकी को मार गिराया था। हालांकि इसी मुठभेड़ में वह आतंकी गोलीबारी में शहीद हो गए। शहीद की पत्नी रोनेल खालके को यह पुरस्कार दिया गया।
साथियों की जान बचाते हुए किशोर ने दी जान
किशोर कुमार मुन्ना को मरणोप्रांत को सेना मेडल वीरता के साथ सम्मानित किया गया। किशोर कुमार चार फरवरी 2018 को जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ विरोधी अभियान में तैनात थे। अचानक सीजफायर उल्लंघन के दौरान दुश्मन के गोले से जनरेटर शेड में आग लग गई और कई जवान आग में फंस गए। किशोर कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना सभी साथियों को सुरक्षित बंकरों में भेजा। इसके बाद दुश्मन की गोलीबारी की परवाह किए बना आग बुझाने में लग गए। हालांकि इस दौरान वह शहीद हो गए। अलंकरण समारोह में उनकी मां तुलो देवी को यह पुरस्कार दिया गया।