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24 साल की उम्र में इस जवान ने पाक को किया था पस्त, जेब में रखी गीता से हुई थी पार्थिव शरीर की पहचान

Sun, 28 Jun 2020 02:16 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 28 Jun 2020 02:16 PM IST
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Major Somnath Sharma who was the first recipient of Param Vir Chakra
परमवीर चक्र पाने वाले देश के पहले योद्धा मेजर सोमनाथ शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया

भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन की डेल्टा कंपनी के कंपनी-कमांडर मेजर सोमनाथ शर्मा ने 1947 में पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए थे। मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोंपरान्त उनकी वीरता के लिए परमवीर चक्र से नवाजा गया। बता दें कि वह परमवीर चक्र पाने वाले देश के पहले योद्धा थे।

Major Somnath Sharma who was the first recipient of Param Vir Chakra
परमवीर चक्र पाने वाले देश के पहले योद्धा मेजर सोमनाथ शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया

परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा का जन्म 31 जनवरी 1923 को कांगड़ा जिले में हुआ था। मेजर शर्मा मात्र 24 साल की उम्र में तीन नवंबर 1947 को पाकिस्तानी घुसपैठियों को बेदखल करते समय शहीद हो गए थे। 
 

Major Somnath Sharma who was the first recipient of Param Vir Chakra
परमवीर चक्र पाने वाले देश के पहले योद्धा मेजर सोमनाथ शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया

युद्ध के दौरान जब वह एक साथी जवान की बंदूक में गोली भरने में मदद कर रहे थे तभी एक मोर्टार का गोला आकर गिरा। विस्फोट में उनका शरीर क्षत-विक्षत हो गया। मेजर शर्मा सदैव अपनी पैंट की जेब में गीता रखते थे। जेब में रखी गीता और उनकी बंदूक के खोल से उनके पार्थिव शरीर की पहचान की गई थी। 
 

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Major Somnath Sharma who was the first recipient of Param Vir Chakra

पाकिस्तान द्वारा 22 अक्टूबर को कश्मीर घाटी में आक्रमण के जवाब में भारतीय सेना के सैनिकों का एक बैच तैनात किया गया। 31 अक्टूबर को, कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन की डी कंपनी सोमनाथ शर्मा की कमान के तहत श्रीनगर पहुंची थी।

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Major Somnath Sharma who was the first recipient of Param Vir Chakra

इस दौरान उनके बाएं हाथ पर प्लास्टर चढ़ा था लेकिन उन्होंने अपनी कंपनी के साथ युद्ध में भाग लेने का निर्णय लिया और बाद में उन्हें इसकी अनुमति दी गई। वह द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अराकन अभियान में जापानी सेनाओं के विरुद्ध भी लड़े।

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