Causes of Sudden Blurred Vision: अक्सर जब लोगों की नजर धुंधली होने लगती है, तो वो इसे थकान या बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या सीधे चश्मा लगवाने की सोचते हैं। मगर चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, धुंधला दिखाई देना हमेशा आंखों की कमजोरी का नतीजा नहीं होता। यह शरीर में पनप रही किसी गंभीर अंदरूनी बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। हमारी आंखें मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से गहराई से जुड़ी होती हैं, इसलिए शरीर के अन्य अंगों में होने वाली गड़बड़ी का असर सबसे पहले आंखों पर देखने को मिलता है।
Health Tips: सिर्फ आंखों की ही समस्या नहीं है धुंधला दिखना, इन जानलेवा बीमारियों का भी हो सकता है संकेत
Link Between Diabetes And Blurry Eyesight: आंखों से धुधला दिखना आमतौर पर आंखों से जुड़ी समस्याओं की वजह से ही होता है। मगर कुछ मामलों में आंखों से धुंधला दिखना शरीर के आंतरिक समस्या का संकेत हो सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
डायबिटीज और रेटिनोपैथी का खतरा
धुंधली नजर का सबसे आम और खतरनाक कारण डायबिटीज हो सकता है। जब खून में शुगर का लेवल अनियंत्रित रूप से बढ़ता है, तो यह आंखों के लेंस में तरल पदार्थ के जमा होने का कारण बनता है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है। लंबे समय तक हाई शुगर रहने से 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' हो सकती है, जिसमें रेटिना की बारीक रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। अगर समय पर शुगर कंट्रोल न की जाए, तो यह पूर्ण अंधापन का कारण बन सकता है।
ये भी पढ़ें- Diabetes: बिना दवाओं के कंट्रोल रखना चाहते हैं शुगर लेवल? मिल गया इसका सबसे आसान और कारगर तरीका
हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक के संकेत
हाई बीपी न सिर्फ हृदय को प्रभावित करता है, बल्कि यह आंखों की नसों पर भी भारी दबाव डालता है। अचानक धुंधला दिखना या नजर का चला जाना स्ट्रोक का एक प्रमुख लक्षण हो सकता है। जब मस्तिष्क के उस हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित होती है जो दृष्टि को नियंत्रित करता है, तो व्यक्ति को चीजें धुंधली या दोहरी दिखने लगती हैं। इसे 'मेडिकल इमरजेंसी' मानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ये भी पढ़ें- Health Tips: शरीर में सूजन होने से बढ़ जाता है कई बीमारियों का खतरा, जान लें इंफ्लामेशन के बचाव के उपाय
ब्रेन ट्यूमर और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
मस्तिष्क में होने वाली कोई भी असामान्य वृद्धि या ट्यूमर आंखों की नसों पर दबाव बना सकता है। इसके कारण व्यक्ति को धुंधला दिखने के साथ-साथ तेज सिरदर्द, चक्कर आना या जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, 'मल्टीपल स्केलेरोसिस' जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां भी दृष्टि को प्रभावित करती हैं। अगर तंत्रिका तंत्र के मूल कारण का इलाज न किया जाए इन स्थितियों में धुंधलापन स्थायी हो सकता है ।
नियमित जांच और सतर्कता जरूरी
दृष्टि में किसी भी तरह का बदलाव होने पर उसे मामूली न समझें। नियमित रूप से आंखों की जांच के साथ-साथ अपने ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की भी निगरानी रखें। संतुलित आहार, जिसमें विटामिन-A और ओमेगा-3 शामिल हो, आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। अगर धुंधलेपन के साथ आंखों में दर्द या लाली हो, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।