ब्रेन ट्यूमर के मामले हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। ये समस्या अब कम उम्र के लोगों को भी तेजी से अपना शिकार बनाती जा रही है। ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर समस्या है, जिससे हर साल हजारों लोगों की जान जा रही है। ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही अक्सर लोग घबरा जाते हैं, यही कारण है कि अब भी इस बीमारी को लेकर खूब हौआ बना हुआ है।
Myths & Facts: ब्रेन ट्यूमर हो गया है तो मौत पक्की? जानिए इस बीमारी को लेकर फैले अफवाह और उनकी हकीकत
ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य सिरदर्द, उल्टी या कमजोरी जैसे लगते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। यही कारण है कि कई मामलों में बीमारी का पता देर से चलता है।
ब्रेन ट्यूमर तब होता है जब दिमाग में कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं और एक गांठ का रूप ले लेती हैं। यह गांठ दिमाग के किसी भी हिस्से में हो सकती है। ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, अगर इसपर ध्यान न दिया जाए तो ये कैंसर का रूप भी ले सकते हैं। हालांकि हर ट्यूमर कैंसर वाला नहीं होता है। विशेषज्ञों के अनुसार जेनेटिक बदलाव, रेडिएशन के संपर्क में आना, इम्यून सिस्टम कमजोर होने जैसी स्थितियों के कारण ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। आइए इससे जुड़ी कुछ अफवाहों के बारे में जान लेते हैं।
मिथ: ब्रेन ट्यूमर का मतलब आपको कैंसर हो गया
अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि ब्रेन ट्यूमर का मतलब कैंसर है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट्स बताते हैं कि ब्रेन ट्यूमर बेनाइन और मैलिग्नेंट दो तरह के हो सकते हैं। बेनाइन ट्यूमर कैंसर वाले नहीं होते और कई बार ये धीरे-धीरे बढ़ते हैं। सही समय पर पहचान और इलाज से ऐसे ट्यूमर को सर्जरी या दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
मिथ: ब्रेन ट्यूमर हो गया तो मौत तय
ये डर अक्सर लोगों के मन में देखा जाता रहा है, हालांकि आधुनिक चिकित्सा में कई ऐसे इलाज उपलब्ध हैं जिससे ट्यूमर को ठीक किया जा सकता है। यदि ट्यूमर शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए तो इलाज होने और जान जाने की संभावना बढ़ जाती है। ब्रेन ट्यूमर का मतलब मौत या कैंसर नहीं होता।
मिथ: ब्रेन ट्यूमर सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी है
अक्सर माना जाता है कि ब्रेन ट्यूमर सिर्फ अधिक उम्र वालों या फिर बुजर्गों को होता है, हालांकि मेडिकल रिपोर्ट्स बताते हैं ब्रेन ट्यूमर बच्चों, युवाओं और वयस्कों किसी को भी हो सकता है। कुछ प्रकार के ट्यूमर तो बच्चों में ज्यादा देखे जाते हैं, इसलिए उम्र के आधार पर लक्षणों को नजरअंदाज करना सही नहीं है।
मिथ: मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से होता है ब्रेन ट्यूमर
अक्सर लोगों को लगता है कि मोबाइल फोन का ज्यादा करने वालों को ब्रेन ट्यूमर होता है। हालांकि अध्ययनों से पता चलता है कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल और ब्रेन ट्यूमर के बीच सीधा और पुख्ता संबंध नहीं मिला है। हालांकि सावधानी के तौर पर लंबे समय तक फोन कान से लगाए रखने से बचने की सलाह दी जाती है।