शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए हम सभी लाइफस्टाइल-डाइट में सुधार के साथ तरह-तरह के उपाय करते रहते हैं। पर क्या ये काफी है? जवाब है शायद नहीं। हम जिस तरह की दिनचर्या का पालन करते हैं, जो कुछ भी खाते-पीते रहते हैं, इन सबका सेहत पर सीधा असर होता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग नींद, भोजन और मानसिक शांति को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका असर धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ता है। इसी तरह से हमारा लोगों को प्रति व्यवहार कैसा है, ये भी सेहत को प्रभावित करने वाली स्थिति हो सकती है।
Alert: अक्सर बीपी हाई रहने के लिए कहीं ज्यादा गुस्सा आना तो नहीं है वजह? जान लीजिए इसका कनेक्शन
क्या आपको भी ज्यादा गुस्सा आता है, बात-बात पर चिड़चिड़े हो जाते हैं? ये आदत आपको गंभीर खतरे में न डाल दे? अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों को ज्यादा गुस्सा आता है उनमें कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का खतरा हो सकता है।
कुछ लोगों को ज्यादा गुस्सा क्यों आता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादा गुस्सा आना केवल स्वभाव की बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई जैविक, मानसिक और सामाजिक कारण हो सकते हैं। जब व्यक्ति तनाव, चिंता, नींद की कमी या हार्मोनल असंतुलन से गुजरता है, तो मस्तिष्क का भावनाओं को नियंत्रित करने वाला हिस्सा अमिगडाला ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे गुस्सा जल्दी आता है।
- अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार लंबे समय तक तनाव में रहना गुस्से की समस्या को बढ़ाना वाला हो सकता है।
- इसके अलावा बचपन के ट्रॉमा, पारिवारिक विवाद, आर्थिक दबाव और काम का तनाव भी ज्यादा गुस्सा आने का कारण हो सकता है।
- नींद की कमी से कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे शरीर फाइट मोड में रहता है। इस वजह से भी आपको ज्यादा गुस्सा आ सकता है।
ज्यादा गुस्से आने से क्या-क्या दिक्कतें होती हैं?
ज्यादा गुस्सा आने पर शरीर में कई जैविक बदलाव होते हैं। आपके दिल की धड़कन तेज होने लगती है, ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है और मांसपेशियों में तनाव आ सकता है।
जो लोग अक्सर गुस्से में रहते हैं उनके शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ा रह सकता है जिससे दिल की सेहत, क्रॉनिक बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर हो सकता है। गुस्सा मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। बार-बार गुस्सा करने से मस्तिष्क में नकारात्मक सोच का पैटर्न विकसित हो जाता है, जिससे व्यक्ति चिड़चिड़ा, असंतुष्ट और मानसिक रूप से अस्थिर हो सकता है।
ब्लड प्रेशर हाई रहना कहीं ज्यादा गुस्से की वजह से तो नहीं?
अध्ययनों से पता चलता है कि ज्यादा गुस्सा करने वालों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा काफी अधिक होता है।
- जब हम ज्यादा गुस्से में होते हैं तो शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन तेजी से बढ़ता है, जिससे दिल तेजी से पंप करता है और रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं।
- इससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है। अगर यह स्थिति लगातार बनी रहती है तो आप हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हो सकते हैं।
- हाई ब्लड प्रेशर से दिल, किडनी और मस्तिष्क पर गंभीर असर पड़ सकता है।
- इससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक और किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
हृदय रोग और स्ट्रोक का भी खतरा
जिन लोगों को ज्यादा गुस्सा आता है उनमें समय के साथ दिल की बीमारियों का खतरा भी अधिक हो सकता है।
- गुस्से के दौरान दिल की धड़कन तेज हो जाती है और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है। इससे हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे समय के साथ हृदय कमजोर हो सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि बार-बार गुस्सा करने वाले लोगों में हार्ट अटैक का खतरा 2-3 गुना तक बढ़ सकता है।
- अक्सर गुस्से की स्थिति शरीर में सूजन बढ़ाने वाली भी हो सकती है, जिससे धमनियों में प्लाक जमा होने और ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है।
ज्यादा गुस्सा स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ा सकता है। जब व्यक्ति गुस्सा करता है, तो ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है, जिससे मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। इससे रक्त वाहिका फट सकती है और स्ट्रोक हो सकता है। शोध में पाया गया है कि के गुस्से के दौरान लोगों में स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है।
-------------
नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।