डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर समस्या है, जिसका खतरा अब कम उम्र के लोगों में भी देखा जा रहा है। पहले डायबिटीज बुजुर्गों को होने वाली बीमारी माना जाती थी हालांकि अब युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो ये बीमारी किसी को भी हो सकती है, हालांकि जिनकी लाइफस्टाइल ठीक नहीं है, खान-पान गड़बड़ है या फिर माता-पिता या परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही है, उनमें खतरा अधिक हो सकता है।
Blood Sugar Monitoring: शुगर की जांच के लिए अब निडिल चुभाने की जरूरत नहीं, मिनटों में मिलेगा रिजल्ट
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी-एम) के शोधकर्ताओं ने मधुमेह रोगियों के लिए एक कम बजट वाली, यूजर फ्रेडली और उपयोग करने में आसान ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण विकसित किया है।
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ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी-एम) के शोधकर्ताओं ने मधुमेह रोगियों के लिए एक कम बजट वाला, यूजर फ्रेडली और उपयोग करने में आसान ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण विकसित किया है। शोधकर्ताओं की टीम का मानना है कि इसकी मदद से शुगर लेवल को नियमित रूप से जांचने में बिना दर्द के मदद मिल सकती है।
यह पेटेंट उपकरण मरीजों को बिना उंगलियों में सुई चुभने के दर्द के भी ग्लूकोज के स्तर को मापने में मददगार हो सकती है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के मुताबिक देश की लगभग 9 प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है, इनमें से अधिकतर लोगों को डॉक्टर नियमित रूप से शुगर की जांच करते रहने की सलाह देते हैं।
ग्लूकोमीटर से घर पर डायबिटीज की जांच
अभी तक घर पर डायबिटीज की जांच के लिए ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये एक छोटा-सा डिवाइस होता है जिससे आप घर पर ही अपने ब्लड शुगर की जांच कर सकते हैं। इसके लिए ग्लूकोमीटर में एक नई टेस्ट स्ट्रिप लगाने के बाद, अपनी उंगली में निडिल या सिरिंज की मदद से पिन करके एक ड्रॉप खून को इसी स्ट्रिप पर लगाना होता है। कुछ सेकंड में डिवाइस आपकी ब्लड शुगर वैल्यू दिखा देती है।
हालांकि अब इस नए ग्लूकोमीटर की मदद से बिना सुई के भी शुगर की जांच की जा सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल और थिन फिल्म्स लैब के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर परशुरामन स्वामीनाथन के नेतृत्व में इसे विकसित किया है।
इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे आईआईटी मद्रास के डॉ एल. बालामुरुगन कहते हैं, इस तरह का उपकरण वास्तव में बहुत सहायक है। ग्लूकोज की निगरानी को दर्दरहित बनाने के साथ ये किफायती भी है। यह ग्लूकोज के स्तर की नियमित जांच करने, अपने शरीर के पैटर्न को समझने में जांच के लिए अनावश्यक दौड़ भाग को कम करने में मदद करता है।
हालांकि ये डिवाइस किस तरह से काम करती है फिलहाल इसकी स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।